राम मंदिर CEO नियुक्ति पर सपा सांसद सनातन पांडेय का BJP पर हमला, बोले — 'पहले मुखिया खुद को साफ करे'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद सनातन पांडेय ने राम मंदिर ट्रस्ट में पूर्व एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में नियुक्ति पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। 3 सितंबर को लखनऊ में उन्होंने कहा कि यह नियुक्ति देशहित के विरुद्ध है और लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमज़ोर करती है।
मुखिया की ईमानदारी पर सवाल
पांडेय ने तीखे अंदाज़ में कहा कि किसी भी संस्था की पारदर्शिता उसके नेतृत्व से तय होती है। उनके शब्दों में, 'जिस घर का मुखिया ईमानदार होगा, उसके घर के कर्मचारी भी ईमानदार होते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि पहले ट्रस्ट के मुखिया को यह स्पष्ट करना होगा कि 'चोरी का पैसा कहाँ गया', उसके बाद ही सीईओ की नियुक्ति की बात उचित होगी।
सपा सांसद ने यह भी कहा कि सीईओ की नियुक्ति विपक्ष ने नहीं, बल्कि ट्रस्ट ने की है — और ट्रस्ट वही करेगा जो सरकार चाहेगी। उनके अनुसार, ट्रस्ट किसके नियंत्रण में है और निर्णय किस प्रक्रिया से लिए जा रहे हैं, यह पहले सार्वजनिक होना चाहिए।
BJP पर संवैधानिक मूल्यों की अनदेखी का आरोप
पांडेय ने आरोप लगाया कि जो लोग भारत के संविधान में विश्वास नहीं रखते, वे जनता से किए गए झूठे वादों के ज़रिए सार्थक बदलाव नहीं ला सकते। उन्होंने कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल को लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा नहीं है, तो उसका प्रशासन भी ठीक से काम नहीं कर सकता।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने सब कुछ अपने नियंत्रण में ले लिया है — जिसमें चुनाव आयोग (ECI) भी शामिल है। उन्होंने याद दिलाया कि चुनाव आयोग का गठन संविधान के तहत हुआ है और पहले चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए सत्ता पक्ष, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश वाली समिति की व्यवस्था का उल्लेख किया जाता था।
सपा-कांग्रेस गठबंधन और 2027 के चुनाव
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे की चर्चाओं पर पांडेय ने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी गठबंधन बनाए रखना चाहती है। उन्होंने कहा कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव कांग्रेस के साथ गठबंधन के पक्ष में हैं।
हालाँकि, पांडेय ने स्पष्ट किया कि सीटों का आधार 'जीतने की क्षमता' होना चाहिए — न कि केवल संख्या। उनके अनुसार, 'सीट बताएं कि हम यहाँ-यहाँ से जीत रहे हैं — संख्या नहीं।' उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के प्रदर्शन का हवाला दिया।
115-120 सीटों की माँग पर कड़ी प्रतिक्रिया
कांग्रेस के कुछ नेताओं द्वारा 115 से 120 सीटों से कम पर समझौता न करने की खबरों पर पांडेय ने कहा कि इस तरह की बातें करने वाले लोग 'न पार्टी के शुभचिंतक हैं, न गठबंधन के और न ही देश के।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यह टिप्पणी कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व — राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे — के बारे में नहीं है।
पांडेय ने कहा कि गठबंधन का उद्देश्य केवल सीटों का बंटवारा नहीं, बल्कि सरकार बनाना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सीटों को लेकर विवाद गठबंधन को ही कमज़ोर कर दे, तो यह भाजपा-विरोधी लक्ष्य के खिलाफ होगा।
आगे क्या होगा
पांडेय के अनुसार, अखिलेश यादव उन सीटों पर निर्णय लेने में पीछे नहीं हटेंगे जहाँ कांग्रेस जीत सकती है। गठबंधन से अलग होने वाले किसी भी दल को उन्होंने 'देशहित के बजाय राजनीतिक स्वार्थ' से प्रेरित बताया। 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस के बीच सीट-साझा वार्ता निर्णायक दौर में पहुँचने की उम्मीद है।