क्रिटिकल मिनरल्स पर चीन का 90% दबदबा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा: रुबियो की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 3 जून को वॉशिंगटन में चेतावनी दी कि क्रिटिकल मिनरल्स की वैश्विक सप्लाई चेन पर चीन का बढ़ता दबदबा अमेरिका और उसके सहयोगियों की आर्थिक तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी एक देश पर 90 प्रतिशत तक की निर्भरता ‘खतरनाक’ है और इसे कम करने के लिए अमेरिका दुनिया भर में नई साझेदारियाँ बना रहा है।
संसदीय समिति के सामने बयान
अमेरिकी संसद की हाउस एप्रोप्रिएशंस सबकमेटी के सामने बोलते हुए रुबियो ने कहा कि एक ही देश में महत्वपूर्ण खनिजों और उनकी प्रोसेसिंग क्षमता का इस तरह केंद्रित होना अमेरिका ही नहीं, बल्कि यूरोप और एशिया के सहयोगी देशों के लिए भी बड़ी रणनीतिक कमज़ोरी है। उनके शब्दों में, ‘यह दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं है और सच कहूं तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक है कि किसी भी जरूरी चीज के लिए 90 प्रतिशत तक एक ही देश पर निर्भर रहना पड़े — चाहे वह आपकी इंडस्ट्रियल बेस हो, डिफेंस सिस्टम हो या टेक्नोलॉजी।’
क्यों अहम हैं ये खनिज
लिथियम, कोबाल्ट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स और ग्रेफाइट जैसे क्रिटिकल मिनरल्स इलेक्ट्रिक वाहनों, सेमीकंडक्टर्स, बैटरियों, टेलीकॉम उपकरणों, रिन्यूएबल एनर्जी तकनीक और आधुनिक सैन्य प्रणालियों के लिए अनिवार्य हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन अपनी आर्थिक और विदेश नीति में क्रिटिकल मिनरल्स को बीजिंग के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच केंद्रीय भूमिका दे रहा है।
कूटनीतिक रणनीति में बदलाव
रुबियो ने बताया कि अमेरिका ने हाल ही में आयोजित क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल मीटिंग में ‘तीन दर्जन या उससे भी ज्यादा देशों’ को शामिल किया। उनके अनुसार अब लगभग हर अमेरिकी दूतावास इस मुद्दे पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है, और यह विदेश नीति की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल हो चुका है। रणनीति केवल कच्चे माल तक सीमित नहीं है — जिन देशों में ये संसाधन मिलते हैं, वहीं प्रोसेसिंग क्षमता विकसित करने पर भी ज़ोर है।
दबाव का हथियार बनने का जोखिम
विदेश मंत्री ने आगाह किया कि अगर किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता हो, तो संकट के समय इसका इस्तेमाल आर्थिक दबाव बनाने के औज़ार के तौर पर किया जा सकता है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी पर बनी हाउस सेलेक्ट कमेटी के अध्यक्ष जॉन मोलिनार ने भी सप्लाई चेन को मज़बूत करने और बीजिंग पर निर्भरता घटाने की कोशिशों का समर्थन किया।
दवा क्षेत्र में भी चिंता
रुबियो ने जोड़ा कि इसी तरह की चिंताएँ दवाइयों और कई अन्य क्षेत्रों में भी हैं, जहाँ उत्पादन का बड़ा हिस्सा चीन में केंद्रित हो चुका है। यह केंद्रीकरण वैश्विक बाज़ार और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। आने वाले महीनों में अमेरिका द्वारा कई द्विपक्षीय खनिज समझौतों की घोषणा की उम्मीद है, जिनकी निगाह भारत-प्रशांत क्षेत्र पर विशेष रूप से होगी।