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शहीद दिवस पर दिलीप घोष का ममता पर हमला: 'शहीदों के परिवारों को ₹25 लाख की जगह मिले सिर्फ ₹2 लाख'

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शहीद दिवस पर दिलीप घोष का ममता पर हमला: 'शहीदों के परिवारों को ₹25 लाख की जगह मिले सिर्फ ₹2 लाख'

सारांश

शहीद दिवस पर दिलीप घोष का दोहरा हमला — एक तरफ शहीद परिवारों को ₹25 लाख की जगह ₹2 लाख मुआवज़े का आरोप, दूसरी तरफ गोलीबारी के आरोपियों को मंत्री-सांसद बनाने का दावा। TMC के दो गुटों में बँटे कार्यक्रम ने पार्टी की आंतरिक दरारें भी उजागर कर दीं।

मुख्य बातें

मंत्री दिलीप घोष ने 21 जुलाई 2026 को शहीद दिवस पर ममता बनर्जी और TMC पर तीखे आरोप लगाए।
आरोप: अदालत के आदेश के बावजूद शहीद परिवारों को ₹25 लाख की जगह केवल ₹2 लाख मुआवज़ा दिया गया।
घोष का दावा — 21 जुलाई गोलीबारी के जिम्मेदार लोगों को बाद में मंत्री, सांसद और विधायक बनाया गया।
TMC के दो गुटों ने अलग-अलग शहीद दिवस कार्यक्रम आयोजित किए, जिसे घोष ने पार्टी की आंतरिक फूट बताया।
घोष ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर सरकारी अस्पतालों की उपेक्षा का भी आरोप लगाया।

पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने 21 जुलाई को शहीद दिवस के अवसर पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखे आरोप लगाए। घोष ने दावा किया कि TMC ने शहीदों, उनके परिवारों और जनता — तीनों के साथ विश्वासघात किया है, और यही कारण है कि आज पार्टी राजनीतिक रूप से अकेली खड़ी है।

शहीद दिवस पर राजनीति का आरोप

घोष ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि शहीद दिवस का मंच श्रद्धांजलि का स्थान है, विरोध प्रदर्शन का नहीं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कार्यक्रम 21 जुलाई को निर्धारित था, तो TMC नेताओं को एक रात पहले से धरने पर बैठने की आवश्यकता क्यों पड़ी। उनके अनुसार यह कदम शहीदों के प्रति सम्मान नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रदर्शन था।

TMC में आंतरिक मतभेद उजागर

TMC के दो गुटों द्वारा अलग-अलग आयोजित शहीद दिवस कार्यक्रमों पर टिप्पणी करते हुए घोष ने कहा कि पार्टी के भीतर फूट साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'कोई वोल्टेज नहीं है, सब लो वोल्टेज हैं। यह कार्यक्रम केवल अपना अस्तित्व दिखाने का प्रयास है, जबकि समाज शहीदों का सम्मान करेगा।' घोष ने यह भी दावा किया कि TMC के इस कार्यक्रम में जनसमर्थन नहीं दिखा।

शहीद परिवारों के मुआवज़े में कथित अनियमितता

घोष ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि न्यायालय ने 21 जुलाई की गोलीबारी के शहीदों के परिवारों को ₹25 लाख मुआवज़ा देने का आदेश दिया था, लेकिन पूर्ववर्ती सरकार में अधिकारियों ने केवल ₹2 लाख का भुगतान किया और शेष राशि रोक ली। उनके अनुसार, इस प्रकार शहीद परिवारों के साथ खुला अन्याय हुआ।

गोलीबारी के आरोपियों को पद देने का दावा

घोष ने यह भी आरोप लगाया कि 21 जुलाई की गोलीबारी के लिए जिम्मेदार लोगों को बाद में मंत्री, सांसद और विधायक जैसे महत्वपूर्ण पद दिए गए, जबकि शहीदों के परिवारों की लगातार उपेक्षा होती रही। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद TMC पर कई मोर्चों पर दबाव बढ़ रहा है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी निशाना

मंत्री घोष ने स्वास्थ्य सेवाओं के मुद्दे पर भी TMC के कार्यकाल को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने कभी सरकारी अस्पतालों का दौरा नहीं किया, जबकि इलाज के लिए स्वयं विदेश जाते रहे। उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की हालत बेहद खराब रही। गौरतलब है कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पिछले कई वर्षों से विपक्ष के निशाने पर रही है। आने वाले दिनों में यह राजनीतिक विवाद और गहरा होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसकी स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए। TMC के दो गुटों में बँटे शहीद दिवस कार्यक्रम यह संकेत देते हैं कि पार्टी की अंदरूनी एकता दबाव में है। हालाँकि घोष स्वयं सत्तापक्ष के प्रतिनिधि हैं, इसलिए उनके दावों को स्वतंत्र सत्यापन के बिना अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। असली परीक्षा यह है कि नई सरकार शहीद परिवारों को शेष मुआवज़ा कब और कैसे सुनिश्चित करती है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिलीप घोष ने ममता बनर्जी पर क्या आरोप लगाए?
मंत्री दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि TMC सरकार ने शहीदों के परिवारों को अदालत के आदेश के बावजूद ₹25 लाख की जगह केवल ₹2 लाख मुआवज़ा दिया। उन्होंने यह भी कहा कि 21 जुलाई गोलीबारी के जिम्मेदार लोगों को बाद में मंत्री, सांसद और विधायक बनाया गया।
21 जुलाई शहीद दिवस पर TMC के दो अलग कार्यक्रम क्यों हुए?
घोष के अनुसार TMC के भीतर आंतरिक मतभेदों के कारण पार्टी के दो गुटों ने अलग-अलग शहीद दिवस कार्यक्रम आयोजित किए। उन्होंने इसे पार्टी की फूट का स्पष्ट प्रमाण बताया।
शहीद परिवारों के मुआवज़े का मामला क्या है?
घोष के दावे के अनुसार, न्यायालय ने 21 जुलाई की गोलीबारी के शहीदों के परिवारों को ₹25 लाख मुआवज़ा देने का आदेश दिया था। पूर्ववर्ती TMC सरकार में अधिकारियों ने केवल ₹2 लाख का भुगतान किया और शेष राशि का भुगतान नहीं किया गया।
दिलीप घोष ने पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर क्या कहा?
घोष ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने कभी सरकारी अस्पतालों का दौरा नहीं किया, जबकि खुद इलाज के लिए विदेश जाते रहे। उनके अनुसार पश्चिम बंगाल के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की स्थिति पहले बेहद खराब थी।
क्या घोष के आरोपों पर TMC ने कोई प्रतिक्रिया दी?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस रिपोर्ट तक TMC की ओर से इन विशेष आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह विवाद आगे और तूल पकड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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