शहीद दिवस पर दिलीप घोष का ममता पर हमला: 'शहीदों के परिवारों को ₹25 लाख की जगह मिले सिर्फ ₹2 लाख'
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने 21 जुलाई को शहीद दिवस के अवसर पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखे आरोप लगाए। घोष ने दावा किया कि TMC ने शहीदों, उनके परिवारों और जनता — तीनों के साथ विश्वासघात किया है, और यही कारण है कि आज पार्टी राजनीतिक रूप से अकेली खड़ी है।
शहीद दिवस पर राजनीति का आरोप
घोष ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि शहीद दिवस का मंच श्रद्धांजलि का स्थान है, विरोध प्रदर्शन का नहीं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कार्यक्रम 21 जुलाई को निर्धारित था, तो TMC नेताओं को एक रात पहले से धरने पर बैठने की आवश्यकता क्यों पड़ी। उनके अनुसार यह कदम शहीदों के प्रति सम्मान नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रदर्शन था।
TMC में आंतरिक मतभेद उजागर
TMC के दो गुटों द्वारा अलग-अलग आयोजित शहीद दिवस कार्यक्रमों पर टिप्पणी करते हुए घोष ने कहा कि पार्टी के भीतर फूट साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'कोई वोल्टेज नहीं है, सब लो वोल्टेज हैं। यह कार्यक्रम केवल अपना अस्तित्व दिखाने का प्रयास है, जबकि समाज शहीदों का सम्मान करेगा।' घोष ने यह भी दावा किया कि TMC के इस कार्यक्रम में जनसमर्थन नहीं दिखा।
शहीद परिवारों के मुआवज़े में कथित अनियमितता
घोष ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि न्यायालय ने 21 जुलाई की गोलीबारी के शहीदों के परिवारों को ₹25 लाख मुआवज़ा देने का आदेश दिया था, लेकिन पूर्ववर्ती सरकार में अधिकारियों ने केवल ₹2 लाख का भुगतान किया और शेष राशि रोक ली। उनके अनुसार, इस प्रकार शहीद परिवारों के साथ खुला अन्याय हुआ।
गोलीबारी के आरोपियों को पद देने का दावा
घोष ने यह भी आरोप लगाया कि 21 जुलाई की गोलीबारी के लिए जिम्मेदार लोगों को बाद में मंत्री, सांसद और विधायक जैसे महत्वपूर्ण पद दिए गए, जबकि शहीदों के परिवारों की लगातार उपेक्षा होती रही। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद TMC पर कई मोर्चों पर दबाव बढ़ रहा है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी निशाना
मंत्री घोष ने स्वास्थ्य सेवाओं के मुद्दे पर भी TMC के कार्यकाल को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने कभी सरकारी अस्पतालों का दौरा नहीं किया, जबकि इलाज के लिए स्वयं विदेश जाते रहे। उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की हालत बेहद खराब रही। गौरतलब है कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पिछले कई वर्षों से विपक्ष के निशाने पर रही है। आने वाले दिनों में यह राजनीतिक विवाद और गहरा होने की संभावना है।