सुप्रीम कोर्ट का शिक्षा मंत्रालय के सचिव को अवमानना नोटिस, 14 वर्ष तक के बच्चों की शिक्षा पंजीकरण मामले में
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 15 सितंबर 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के सचिव टी.के. अनिल कुमार को अवमानना नोटिस जारी किया। यह कार्रवाई वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की अवमानना याचिका पर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि केंद्र सरकार ने 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को धर्मनिरपेक्ष या धार्मिक शिक्षा देने वाले संस्थानों के पंजीकरण, मान्यता और निगरानी पर निर्णय लेने के न्यायालय के स्पष्ट निर्देश का तय समय में पालन नहीं किया।
मामले की पृष्ठभूमि
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने यह नोटिस तब जारी किया, जब उपाध्याय की ओर से अवमानना याचिका दाखिल की गई। याचिकाकर्ता का दावा है कि उन्होंने 10 फरवरी 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के समक्ष एक अर्जी दी थी और कोर्ट ने 11 मई के आदेश में मंत्रालय को तय समय-सीमा में उस पर निर्णय लेने को कहा था।
गौरतलब है कि उस 11 मई के आदेश में सर्वोच्च न्यायालय ने उपाध्याय की मूल रिट याचिका का निपटारा करते हुए उन्हें सक्षम अधिकारी के पास जाने की स्वतंत्रता दी थी और प्रत्यक्ष सुनवाई से मना करते हुए अर्जी पर फैसले का इंतजार करने को कहा था। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद संबंधित अधिकारी ने कोई फैसला नहीं लिया।
याचिका में क्या मांगा गया है
उपाध्याय की याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे 14 वर्ष तक के बच्चों को धर्मनिरपेक्ष या धार्मिक शिक्षा देने वाले सभी संस्थानों का पंजीकरण, मान्यता, देखरेख और निगरानी सुनिश्चित करें। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 21ए (शिक्षा का अधिकार), अनुच्छेद 30(1) (अल्पसंख्यकों का शैक्षणिक संस्थान स्थापना का अधिकार) और अनुच्छेद 26 (धार्मिक संस्थाओं के अधिकार) के दायरे पर भी स्पष्टीकरण माँगा गया है।
याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया है कि बिना पंजीकरण और मान्यता के संचालित हो रहे संस्थान बच्चों को समान गुणवत्ता वाली शिक्षा देने में असमर्थ हैं। इस संदर्भ में 'तमिलनाडु राज्य बनाम के. श्याम सुंदर' मामले में सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियों का हवाला भी दिया गया है।
सीमावर्ती जिलों में अनियमितता का दावा
अवमानना याचिका में उपाध्याय ने दावा किया कि जनवरी में उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई सीमावर्ती जिलों का दौरा किया, जहाँ कई ऐसे संस्थान मिले जो न तो पंजीकृत थे और न ही मान्यता प्राप्त। उनका आरोप है कि देश के सीमावर्ती जिलों में ऐसे अनियमित संस्थानों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है, जो बच्चों के शैक्षणिक अधिकारों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर रही है।
पुरानी याचिकाओं का इतिहास
यह मुद्दा पहले भी उपाध्याय की एक अन्य जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय के सामने आ चुका है। अगस्त में कोर्ट ने इसी विषय पर उनकी एक तीसरी याचिका को, वापस लिए जाने के आधार पर, खारिज करते हुए स्पष्ट किया था कि एक ही मामले से संबंधित बार-बार दाखिल याचिकाओं पर विचार नहीं किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में धार्मिक व अनौपचारिक शैक्षणिक संस्थानों के नियमन को लेकर व्यापक बहस चल रही है।
आगे की सुनवाई
सर्वोच्च न्यायालय ने अवमानना कार्यवाही पर अगली सुनवाई 16 अक्टूबर 2026 के लिए निर्धारित की है। आईएएस अधिकारी टी.के. अनिल कुमार को तब तक अपना जवाब दाखिल करना होगा। शिक्षा मंत्रालय की प्रतिक्रिया अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है।