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वंदे मातरम विवाद: पिनाराई विजयन का कांग्रेस पर 'सॉफ्ट हिंदुत्व' का आरोप, धर्मनिरपेक्ष विरासत पर सवाल

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वंदे मातरम विवाद: पिनाराई विजयन का कांग्रेस पर 'सॉफ्ट हिंदुत्व' का आरोप, धर्मनिरपेक्ष विरासत पर सवाल

सारांश

स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस द्वारा वंदे मातरम का पूर्ण संस्करण गाने के फैसले ने एक पुराने विवाद को नई आग दे दी। पिनाराई विजयन ने इसे 'सॉफ्ट हिंदुत्व' करार दिया और 1937 के कांग्रेस के अपने फैसले की याद दिलाई — जो पार्टी को उसकी ही विरासत के कटघरे में खड़ा करता है।

मुख्य बातें

पिनाराई विजयन ने 15 अगस्त 2026 को कांग्रेस पर 'सॉफ्ट हिंदुत्व' अपनाने का आरोप लगाया।
कांग्रेस ने एआईसीसी मुख्यालय और कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना में वंदे मातरम का पूर्ण संस्करण गाने का निर्णय लिया।
विजयन ने 1937 के कांग्रेस कार्यकारी समिति के उस फैसले की याद दिलाई जिसमें केवल पहले दो छंद गाने की परंपरा तय की गई थी।
सर्वोच्च न्यायालय के मार्च 2026 के फैसले (मोहम्मद सईद नूरी मामला) के अनुसार, सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम गाना अनिवार्य नहीं।
केरल में राज्य वन विभाग के मुख्यालय और लोक भवन में भी पूर्ण संस्करण गाया गया।

केरल के विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने 15 अगस्त 2026 को कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, जब पार्टी ने एआईसीसी मुख्यालय और अपने शासन वाले राज्यों — कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना — में स्वतंत्रता दिवस के आधिकारिक समारोहों में वंदे मातरम का पूर्ण संस्करण गाने का निर्णय लिया। विजयन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की राह पकड़ रही है और देश की धर्मनिरपेक्ष राष्ट्रवादी परंपरा से मुँह मोड़ रही है।

विजयन का आरोप: क्या कहा

एक तीखे सोशल मीडिया पोस्ट में विजयन ने कहा कि कांग्रेस ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धताओं की असलियत उजागर कर दी है। उन्होंने तर्क दिया कि पार्टी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के हिंदुत्व एजेंडे की नकल करते हुए बहुसंख्यकवादी राजनीति से प्रतिस्पर्धा करने की कोशिश कर रही है। उनके शब्दों में, यह कांग्रेस के 'आरएसएस की बी-टीम' बन जाने का ताज़ा प्रमाण है।

ऐतिहासिक संदर्भ: 1937 का कांग्रेस फैसला

विजयन ने याद दिलाया कि कांग्रेस कार्यकारी समिति ने 1937 में स्पष्ट किया था कि गीत में धार्मिक प्रतीकों की उपस्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय आंदोलन के मंचों पर केवल पहले दो छंद ही गाए जाएँ। उन्होंने आगे कहा कि 1950 में जब संविधान सभा ने वंदे मातरम को राष्ट्रगान का दर्जा दिया, तब भी यही परंपरा बरकरार रखी गई थी। उनके अनुसार, पूर्ण संस्करण अपनाकर कांग्रेस अपनी धर्मनिरपेक्ष विरासत को 'कूड़ेदान में फेंक रही है।'

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला

विजयन ने मार्च 2026 में सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले का भी उल्लेख किया जो मोहम्मद सईद नूरी मामले में आया था। उन्होंने कहा कि इस फैसले में स्पष्ट किया गया था कि सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम गाना अनिवार्य नहीं है और केंद्र के संशोधित कानून के तहत भी ऐसा न करना दंडनीय अपराध नहीं है।

केरल में विवाद की छाया

यह विवाद केरल तक भी पहुँचा, जहाँ राज्य वन विभाग के मुख्यालय में एक आधिकारिक समारोह में वंदे मातरम का पूर्ण संस्करण गाया गया। राजनीतिक विश्लेषकों ने गौर किया कि यह गीत उन स्थानों पर सुना गया जहाँ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मजबूत उपस्थिति है। इसके अलावा, लोक भवन में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने स्वयं स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम गाकर नेतृत्व किया।

राजनीतिक असर: वाम-कांग्रेस संघर्ष में नया मोर्चा

इन टिप्पणियों ने केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन और वामपंथी दलों के बीच पहले से जारी राजनीतिक संघर्ष में एक नया आयाम जोड़ दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर वंदे मातरम एक अप्रत्याशित और तीखे विवाद का केंद्र बन गया। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी राष्ट्रीय प्रतीक को लेकर वाम और कांग्रेस आमने-सामने आए हों — लेकिन इस बार विवाद की जड़ें कांग्रेस के अपने ऐतिहासिक निर्णयों में हैं, जो इसे और अधिक पेचीदा बनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो वामपंथी आलोचना को ऐतिहासिक वैधता देता है। लेकिन इसमें एक विरोधाभास भी है: वंदे मातरम को लेकर केरल में खुद वाम मोर्चे के भीतर भी एकमत नहीं रहा है, और राज्यपाल द्वारा लोक भवन में पूर्ण संस्करण गाना — जिसे वाम सरकार ने चुनौती नहीं दी — इस आलोचना की धार को कुंद करता है। मुख्यधारा की कवरेज जो नज़रअंदाज़ कर रही है वह यह है कि यह विवाद असल में 2026 के केरल चुनावी मौसम की पृष्ठभूमि में वाम और कांग्रेस के बीच 'धर्मनिरपेक्षता के ठेकेदार' की जंग है — और वंदे मातरम महज़ एक नया रणभूमि है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वंदे मातरम पूर्ण संस्करण विवाद क्या है?
15 अगस्त 2026 को कांग्रेस ने एआईसीसी मुख्यालय और अपने शासन वाले राज्यों कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना में वंदे मातरम का पूर्ण संस्करण गाने का निर्णय लिया। इस पर केरल के विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने कांग्रेस पर 'सॉफ्ट हिंदुत्व' अपनाने का आरोप लगाया।
1937 में कांग्रेस ने वंदे मातरम पर क्या फैसला लिया था?
1937 में कांग्रेस कार्यकारी समिति ने निर्णय लिया था कि गीत में धार्मिक प्रतीकों की उपस्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय आंदोलन के मंचों पर केवल पहले दो छंद ही गाए जाएँ। 1950 में संविधान सभा ने भी इसी परंपरा को बरकरार रखा था।
सुप्रीम कोर्ट ने वंदे मातरम पर क्या कहा है?
मार्च 2026 में सर्वोच्च न्यायालय ने मोहम्मद सईद नूरी मामले में स्पष्ट किया कि सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम गाना अनिवार्य नहीं है और केंद्र के संशोधित कानून के तहत भी ऐसा न करना दंडनीय अपराध नहीं है।
केरल में इस विवाद का क्या असर पड़ा?
केरल के राज्य वन विभाग के मुख्यालय में एक आधिकारिक समारोह में वंदे मातरम का पूर्ण संस्करण गाया गया। लोक भवन में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने स्वयं वंदे मातरम गाकर समारोह का नेतृत्व किया।
पिनाराई विजयन ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
विजयन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस आरएसएस के हिंदुत्व एजेंडे की नकल कर रही है और बहुसंख्यकवादी राजनीति से प्रतिस्पर्धा के प्रयास में संघ परिवार के रुख को अपना रही है। उन्होंने कांग्रेस को 'आरएसएस की बी-टीम' तक कह दिया।
राष्ट्र प्रेस
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