30 अक्टूबर 2026
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विश्व-2026: रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने मानेकशॉ सेंटर में स्वदेशी रक्षा तकनीक और वैश्विक साझेदारी सम्मेलन का उद्घाटन किया

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विश्व-2026: रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने मानेकशॉ सेंटर में स्वदेशी रक्षा तकनीक और वैश्विक साझेदारी सम्मेलन का उद्घाटन किया

सारांश

भारत ने 'विश्व-2026' सम्मेलन के ज़रिए स्पष्ट संदेश दिया — अब वह केवल रक्षा उपकरणों का खरीदार नहीं, बल्कि संयुक्त विकास और सह-उत्पादन में वैश्विक भागीदार बनने को तैयार है। DRDO की बहुभाषी पुस्तिका और एयरो इंडिया-2027 का निमंत्रण इस महत्वाकांक्षा की ठोस अभिव्यक्ति है।

मुख्य बातें

रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 30 अक्टूबर 2026 को मानेकशॉ सेंटर, नई दिल्ली में 'विश्व-2026' सम्मेलन का उद्घाटन किया।
कार्यक्रम का आयोजन DRDO ने सेंटर फॉर ज्वाइंट वारफेयर स्टडीज के सहयोग से किया।
DRDO की रक्षा उत्पाद पुस्तिका अरबी, स्पेनिश और फ्रेंच भाषाओं में जारी की गई।
रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने सहयोग को संयुक्त विकास और सह-उत्पादन तक विस्तारित करने का आह्वान किया।
बेंगलुरु में प्रस्तावित एयरो इंडिया-2027 के लिए मित्र देशों को औपचारिक निमंत्रण भेजे जा रहे हैं।
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने रणनीतिक स्वायत्तता और उभरती तकनीकों में सहयोग को रक्षा कूटनीति का केंद्र बताया।

रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 30 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में 'विश्व-2026' (विजन, इनोवेशन, सिनर्जी एंड वैल्यूज) कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस आयोजन का उद्देश्य भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीकों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करना और मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग को नई गहराई देना था।

कार्यक्रम का स्वरूप और विषय

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने सेंटर फॉर ज्वाइंट वारफेयर स्टडीज के सहयोग से इस सम्मेलन का आयोजन किया। कार्यक्रम का केंद्रीय विषय था — 'रक्षा क्षमताओं का प्रदर्शन और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करना।' इसके अंतर्गत साझेदार देशों के लिए एक विशेष संगोष्ठी भी आयोजित की गई, जिसमें भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीकों, रक्षा उत्पादन और द्विपक्षीय सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

विश्व-2026 के चार स्तंभ

रक्षा राज्य मंत्री सेठ ने कार्यक्रम के चार मूलभूत सिद्धांतों का विस्तार से उल्लेख किया। विजन के अंतर्गत भविष्य की रक्षा जरूरतों को पहचानकर समय रहते तैयारी करना है। इनोवेशन के माध्यम से शोध को व्यावहारिक तकनीकी समाधानों में रूपांतरित करना है। सिनर्जी के तहत सशस्त्र बलों, शोध संस्थानों, उद्योग और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों को एकीकृत मंच पर लाना है। वैल्यूज आपसी विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी की नींव पर टिके सहयोग को सुनिश्चित करते हैं।

वरिष्ठ अधिकारियों की प्रमुख बातें

रक्षा सचिव और DRDO के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने कहा कि भारत की रक्षा तैयारियों और वैश्विक भागीदारी को सुदृढ़ करने के लिए तकनीकी क्षमता, औद्योगिक सामर्थ्य और संस्थागत सहयोग को एकजुट होकर आगे बढ़ाना होगा। रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने भारत की बढ़ती रक्षा विनिर्माण क्षमता का हवाला देते हुए कहा कि अब सहयोग को केवल खरीदार-विक्रेता तक सीमित न रखकर संयुक्त विकास, सह-उत्पादन और विनिर्माण साझेदारी तक विस्तारित करने की आवश्यकता है।

विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बदलते भू-राजनीतिक और तकनीकी परिवेश में रक्षा कूटनीति के नए आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने रणनीतिक स्वायत्तता, विभिन्न देशों के साथ संतुलित संबंध, आपसी विश्वास और उभरती तकनीकों में सहयोग को रक्षा कूटनीति की आधारशिला बताया।

DRDO की बहुभाषी पुस्तिका और एयरो इंडिया-2027 का निमंत्रण

इस अवसर पर संजय सेठ ने DRDO के रक्षा उत्पादों की अरबी, स्पेनिश और फ्रेंच भाषाओं में तैयार की गई पुस्तिका का विमोचन किया। यह पहल मित्र देशों को भारत के रक्षा उत्पादों एवं तकनीकी समाधानों से परिचित कराने और संवाद को सहज बनाने के लिए उठाया गया कदम है। साथ ही, रक्षा उत्पादन सचिव ने बताया कि बेंगलुरु में आयोजित होने वाले एयरो इंडिया-2027 के लिए मित्र देशों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधियों को औपचारिक निमंत्रण भेजे जा रहे हैं।

आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत-2047 की दिशा में कदम

रक्षा राज्य मंत्री ने जोर देकर कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए देश को तकनीकी रूप से उन्नत और आत्मनिर्भर रक्षा तंत्र खड़ा करना होगा। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्वदेशी शोध, डिजाइन, विकास और विनिर्माण क्षमताओं को प्राथमिकता दी जा रही है। गौरतलब है कि यह कार्यक्रम ऐसे समय में हुआ जब भारत का रक्षा निर्यात तेज़ी से बढ़ रहा है और देश वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में स्थापित हो रहा है। 'विश्व-2026' ने रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, तीनों सेनाओं, DRDO, भारतीय रक्षा विनिर्माताओं के संगठन और मित्र देशों के रक्षा अताशे को एक छत के नीचे लाकर दीर्घकालिक सहयोग के नए द्वार खोले हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि प्रौद्योगिकी-निर्यातक की भूमिका में आना चाहता है। हालांकि, संयुक्त विकास और सह-उत्पादन की महत्वाकांक्षा तब तक कागज़ी रहती है जब तक बौद्धिक संपदा, ऑफसेट शर्तें और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के ढाँचे स्पष्ट न हों। DRDO की बहुभाषी पुस्तिका और एयरो इंडिया-2027 के निमंत्रण सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि मित्र देश भारत को केवल एक विकल्प मानते हैं या दीर्घकालिक तकनीकी भागीदार।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'विश्व-2026' कार्यक्रम क्या है?
'विश्व-2026' (विजन, इनोवेशन, सिनर्जी एंड वैल्यूज) एक रक्षा सम्मेलन है जिसे DRDO ने 30 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित किया। इसका उद्देश्य भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीकों को अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के सामने प्रस्तुत करना और वैश्विक रक्षा सहयोग को बढ़ावा देना है।
DRDO की बहुभाषी रक्षा उत्पाद पुस्तिका का क्या महत्व है?
DRDO ने अपने रक्षा उत्पादों की जानकारी अरबी, स्पेनिश और फ्रेंच भाषाओं में उपलब्ध कराई है ताकि मध्य-पूर्व, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के मित्र देशों तक आसानी से पहुँचा जा सके। यह भारत की रक्षा निर्यात रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत संवाद और सहयोग को सरल बनाना है।
एयरो इंडिया-2027 कहाँ और क्यों महत्वपूर्ण है?
एयरो इंडिया-2027 बेंगलुरु में आयोजित होने वाला है और इसके लिए मित्र देशों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधियों को औपचारिक निमंत्रण भेजे जा रहे हैं। यह आयोजन भारत की बढ़ती विमानन और रक्षा क्षमताओं को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने और नए रक्षा सहयोग समझौतों की नींव रखने का अवसर होगा।
विकसित भारत-2047 और रक्षा आत्मनिर्भरता का क्या संबंध है?
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ के अनुसार, विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को तकनीकी रूप से उन्नत और आत्मनिर्भर रक्षा तंत्र चाहिए। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्वदेशी शोध, डिज़ाइन, विकास और विनिर्माण क्षमताओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
'विश्व-2026' में किन-किन पक्षों ने हिस्सा लिया?
इस सम्मेलन में रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, तीनों सेनाओं, DRDO, भारतीय रक्षा विनिर्माताओं के संगठन, शिक्षण संस्थानों और मित्र देशों के रक्षा अताशे व विदेशी राजनयिक मिशनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
राष्ट्र प्रेस
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