डीजे पर 10 बजे पाबंदी क्यों? वारिस पठान का सरकार पर दोहरे मानदंड का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने 4 सितंबर को मुंबई में सरकार पर त्योहारों के दौरान ध्वनि प्रतिबंध को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी पर डीजे बजाने की अनुमति रात 12 बजे तक दी गई, जबकि मुसलमानों के त्योहारों पर लाउडस्पीकर रात 10 बजे के बाद बंद करा दिया जाता है।
मुख्य आरोप: कानून सबके लिए एक होना चाहिए
पठान ने स्पष्ट किया कि उन्हें गणेश चतुर्थी या जन्माष्टमी पर डीजे बजाने से कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा, 'सबको त्योहार मनाने का अधिकार है।' लेकिन उनका तर्क है कि यही छूट मुसलमानों के त्योहारों पर भी मिलनी चाहिए। उन्होंने सरकार को संविधान पढ़ने की नसीहत देते हुए कहा कि 'कोई कानून या संविधान से ऊपर नहीं है।'
अजान और लाउडस्पीकर विवाद
पठान ने अजान के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उनका कहना है कि भारत में 1,400 वर्षों से लाउडस्पीकर पर अजान दी जाती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लोगों ने शिकायतें करके और मिनारों पर चढ़कर लाउडस्पीकर उतरवाए, यह कहते हुए कि अजान से ध्वनि प्रदूषण होता है और नींद खराब होती है। पठान का कहना है कि यदि ध्वनि प्रदूषण का नियम लागू करना है, तो वह सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
वंदे मातरम पर पठान का रुख
वंदे मातरम के प्रश्न पर पठान ने कहा कि वे इसका आदर करते हैं, लेकिन इसकी कुछ पंक्तियाँ ऐसी हैं जो इस्लामी आस्था के अनुसार एक मुसलमान के लिए बोलना संभव नहीं है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला दिया, जिसमें राष्ट्रीय झंडे, राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय गीत का उल्लेख है। उन्होंने यह भी कहा कि मार्च 2026 में सर्वोच्च न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि राष्ट्रीय गान जन-गण-मन सभी को पढ़ना चाहिए — और वे इसे पूरे गर्व के साथ पढ़ते हैं तथा राष्ट्रीय झंडे को 'तन मन धन से सलाम' करते हैं।
RSS और स्वतंत्रता संग्राम पर तीखा सवाल
पठान ने यह भी पूछा कि आज़ादी की लड़ाई के दौरान कितने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के लोगों ने वंदे मातरम गाते हुए फाँसी का सामना किया। उनका कहना था कि इस पर कोई नाम उपलब्ध नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि वे वंदे मातरम नहीं पढ़ेंगे और इस पर उन्हें कोई दबाव स्वीकार नहीं है।
स्वरा भास्कर के बयान पर प्रतिक्रिया
अभिनेत्री स्वरा भास्कर के एक हालिया बयान पर पठान ने कहा कि उन्होंने वह बयान सुना और बाद में स्वरा ने स्पष्टीकरण भी दिया। उन्होंने इस विषय पर अधिक टिप्पणी करने से परहेज़ किया और कहा कि वे सभी की आस्था का सम्मान करते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस्लाम में हत्या को उचित नहीं माना जाता, लेकिन दूसरों की परंपराओं में हस्तक्षेप करना उनका इरादा नहीं है। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देशभर में त्योहारी सीज़न के दौरान ध्वनि प्रदूषण और धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर बहस तेज़ हो रही है।