26 अक्टूबर 2026
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फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए ई100 ईंधन मानक लागू, केंद्र ने मोटर वाहन नियमों में किया बड़ा संशोधन

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फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए ई100 ईंधन मानक लागू, केंद्र ने मोटर वाहन नियमों में किया बड़ा संशोधन

सारांश

केंद्र सरकार ने मोटर वाहन नियमों में संशोधन कर फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए ई100 ईंधन मानक लागू कर दिए हैं। इससे 100% शुद्ध एथेनॉल पर वाहन चलाने का रास्ता खुला है। गडकरी के अनुसार इससे ईंधन लागत ₹25 प्रति लीटर तक आ सकती है। ई25 लक्ष्य पर 2031 तक 17.9 अरब लीटर एथेनॉल माँग का अनुमान है।

मुख्य बातें

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 26 अक्टूबर 2026 से केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन लागू किया।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में अब 100% एथेनॉल (ई100) ईंधन के उपयोग को मानक मान्यता मिली; ई85 के साथ ई100 भी शामिल।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार एथेनॉल पर वाहन चलाने की लागत लगभग ₹25 प्रति लीटर तक आ सकती है।
ब्रिकवर्क रेटिंग्स के अनुसार ई25 लक्ष्य पर वित्त वर्ष 2030-31 तक एथेनॉल माँग 17.9 अरब लीटर होगी; मौजूदा क्षमता 18.25 अरब लीटर ।
ई85/ई100 ईंधन केवल उन वाहनों में मान्य होगा जिन्हें OEM विशेष रूप से इस ईंधन के लिए डिज़ाइन करेंगे।
उत्सर्जन तालिका में सकल वाहन भार सीमा 3,000 किग्रा से बढ़ाकर 3,500 किग्रा की गई।

केंद्र सरकार ने 26 अक्टूबर 2026 से फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए 100 प्रतिशत एथेनॉल (ई100) ईंधन मानकों को औपचारिक रूप से लागू कर दिया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के तहत केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन किया गया है, जो एथेनॉल-आधारित हरित गतिशीलता की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

नए मानकों में क्या बदला

संशोधित नियमों के अंतर्गत उत्सर्जन मानकों और परीक्षण प्रक्रियाओं में अब तक केवल ई85 ईंधन के जो संदर्भ थे, उन्हें बदलकर ई85 या ई100 कर दिया गया है। इससे फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में 100 प्रतिशत शुद्ध एथेनॉल के उपयोग का कानूनी मार्ग खुल गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ई85 या ई100 ईंधन केवल उन्हीं वाहनों में इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिन्हें मूल उपकरण निर्माता (OEM) विशेष रूप से इस प्रकार के ईंधन के लिए डिज़ाइन करेंगे।

इसके साथ ही एक उत्सर्जन तालिका में सकल वाहन भार की सीमा 3,000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3,500 किलोग्राम कर दी गई है। अन्य तकनीकी संशोधनों में हाइड्रोजन-कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (HCNG), 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई20), बायोडीजल मानक और उत्सर्जन परीक्षण प्रक्रियाएँ भी शामिल हैं।

सरकार की मंशा और मंत्री गडकरी की बात

इस वर्ष की शुरुआत में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि यदि वाहन पूरी तरह एथेनॉल पर चलें, तो ईंधन की लागत लगभग ₹25 प्रति लीटर पेट्रोल के बराबर रह सकती है। उन्होंने यह भी कहा था कि 'दुनिया के 19 देशों में एथेनॉल का उपयोग हो रहा है और भारत में भी अब तक इससे वाहनों को लेकर कोई बड़ी शिकायत सामने नहीं आई है।' यह ऐसे समय में आया है जब सरकार पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने के दोहरे लक्ष्य पर ज़ोर दे रही है।

एथेनॉल माँग का अनुमान और क्षमता

ब्रिकवर्क रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि देश में ई25 मिश्रण का लक्ष्य हासिल किया जाता है, तो वित्त वर्ष 2030-31 तक एथेनॉल की माँग बढ़कर 17.9 अरब लीटर तक पहुँच सकती है। गौरतलब है कि देश की वर्तमान स्थापित डिस्टिलेशन क्षमता 18.25 अरब लीटर है, जो इस माँग को पूरा करने के लिए पर्याप्त बताई गई है।

यदि एथेनॉल मिश्रण स्तर ई20 पर बना रहता है, तब भी माँग लगभग 14.3 अरब लीटर रहने का अनुमान है — जो मौजूदा क्षमता के लगभग 78 प्रतिशत के बराबर है। इससे ज़ाहिर होता है कि आपूर्ति पक्ष अभी मज़बूत स्थिति में है।

आम जनता और उद्योग पर असर

ई100 मानकों के लागू होने से देश में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा और ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए अब एक स्पष्ट नियामक ढाँचा उपलब्ध है। उपभोक्ताओं को दीर्घकालिक रूप से सस्ते ईंधन विकल्प मिल सकते हैं, बशर्ते एथेनॉल की उपलब्धता पंप स्तर तक सुनिश्चित की जाए। आलोचकों का कहना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर — विशेष रूप से ई100 पंपों का नेटवर्क — अभी भी सीमित है, जो व्यापक अपनाने में बाधा बन सकता है।

आगे क्या होगा

नए मानक तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं, लेकिन बाज़ार में ई100-सक्षम वाहनों की उपलब्धता OEM की उत्पादन योजनाओं पर निर्भर करेगी। इस क्षेत्र में टोयोटा और अन्य निर्माता पहले से रुचि दिखा चुके हैं। एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की सफलता अब नीति, उद्योग और वितरण — तीनों के समन्वय पर टिकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा ज़मीन पर होगी — जहाँ ई100 पंपों का नेटवर्क अभी नगण्य है। भारत का एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम वर्षों से घोषणाओं और क्रियान्वयन के बीच की खाई से जूझता रहा है; ई20 का लक्ष्य भी कई बार टला है। गडकरी का '₹25 प्रति लीटर' का दावा आकर्षक है, लेकिन यह तब ही वास्तविकता बनेगा जब OEM बड़े पैमाने पर ई100-सक्षम वाहन उतारें और वितरण ढाँचा तैयार हो। बिना इन दोनों के, यह संशोधन केवल कागज़ी सुधार बनकर रह सकता है।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ई100 ईंधन मानक क्या हैं और ये कब से लागू हुए?
ई100 यानी 100 प्रतिशत शुद्ध एथेनॉल-आधारित ईंधन मानक हैं, जो केंद्र सरकार ने 26 अक्टूबर 2026 से केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन कर लागू किए हैं। ये मानक विशेष रूप से उन फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए हैं जिन्हें OEM इस ईंधन के लिए डिज़ाइन करेंगे।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन क्या होते हैं और क्या हर गाड़ी में ई100 चलेगा?
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन वे होते हैं जो पेट्रोल, एथेनॉल या दोनों के मिश्रण पर चल सकते हैं। नहीं — ई85 या ई100 ईंधन केवल उन्हीं वाहनों में उपयोग किया जा सकेगा जिन्हें मूल उपकरण निर्माता (OEM) विशेष रूप से इस ईंधन के लिए डिज़ाइन करेंगे; सामान्य वाहनों में यह मान्य नहीं होगा।
एथेनॉल पर वाहन चलाना कितना सस्ता पड़ेगा?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, यदि वाहन पूरी तरह एथेनॉल पर चलें तो ईंधन लागत लगभग ₹25 प्रति लीटर पेट्रोल के बराबर हो सकती है। यह मौजूदा पेट्रोल कीमतों की तुलना में उल्लेखनीय बचत हो सकती है, हालाँकि यह अंततः एथेनॉल की उपलब्धता और वितरण पर निर्भर करेगा।
भारत में 2031 तक एथेनॉल की माँग कितनी होगी?
ब्रिकवर्क रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, यदि ई25 मिश्रण लक्ष्य हासिल होता है तो वित्त वर्ष 2030-31 तक एथेनॉल की माँग 17.9 अरब लीटर तक पहुँच सकती है। देश की मौजूदा स्थापित डिस्टिलेशन क्षमता 18.25 अरब लीटर है, जो इस माँग को पूरा करने के लिए पर्याप्त बताई गई है।
नए मोटर वाहन नियम संशोधन में और क्या-क्या बदला है?
ई100 मानकों के अलावा, संशोधन में उत्सर्जन तालिका में सकल वाहन भार सीमा 3,000 किग्रा से बढ़ाकर 3,500 किग्रा की गई है। HCNG, ई20, बायोडीजल मानकों और उत्सर्जन परीक्षण प्रक्रियाओं में भी तकनीकी संशोधन किए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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