फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए ई100 ईंधन मानक लागू, केंद्र ने मोटर वाहन नियमों में किया बड़ा संशोधन
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 26 अक्टूबर 2026 से फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए 100 प्रतिशत एथेनॉल (ई100) ईंधन मानकों को औपचारिक रूप से लागू कर दिया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के तहत केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन किया गया है, जो एथेनॉल-आधारित हरित गतिशीलता की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
नए मानकों में क्या बदला
संशोधित नियमों के अंतर्गत उत्सर्जन मानकों और परीक्षण प्रक्रियाओं में अब तक केवल ई85 ईंधन के जो संदर्भ थे, उन्हें बदलकर ई85 या ई100 कर दिया गया है। इससे फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में 100 प्रतिशत शुद्ध एथेनॉल के उपयोग का कानूनी मार्ग खुल गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ई85 या ई100 ईंधन केवल उन्हीं वाहनों में इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिन्हें मूल उपकरण निर्माता (OEM) विशेष रूप से इस प्रकार के ईंधन के लिए डिज़ाइन करेंगे।
इसके साथ ही एक उत्सर्जन तालिका में सकल वाहन भार की सीमा 3,000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3,500 किलोग्राम कर दी गई है। अन्य तकनीकी संशोधनों में हाइड्रोजन-कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (HCNG), 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई20), बायोडीजल मानक और उत्सर्जन परीक्षण प्रक्रियाएँ भी शामिल हैं।
सरकार की मंशा और मंत्री गडकरी की बात
इस वर्ष की शुरुआत में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि यदि वाहन पूरी तरह एथेनॉल पर चलें, तो ईंधन की लागत लगभग ₹25 प्रति लीटर पेट्रोल के बराबर रह सकती है। उन्होंने यह भी कहा था कि 'दुनिया के 19 देशों में एथेनॉल का उपयोग हो रहा है और भारत में भी अब तक इससे वाहनों को लेकर कोई बड़ी शिकायत सामने नहीं आई है।' यह ऐसे समय में आया है जब सरकार पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने के दोहरे लक्ष्य पर ज़ोर दे रही है।
एथेनॉल माँग का अनुमान और क्षमता
ब्रिकवर्क रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि देश में ई25 मिश्रण का लक्ष्य हासिल किया जाता है, तो वित्त वर्ष 2030-31 तक एथेनॉल की माँग बढ़कर 17.9 अरब लीटर तक पहुँच सकती है। गौरतलब है कि देश की वर्तमान स्थापित डिस्टिलेशन क्षमता 18.25 अरब लीटर है, जो इस माँग को पूरा करने के लिए पर्याप्त बताई गई है।
यदि एथेनॉल मिश्रण स्तर ई20 पर बना रहता है, तब भी माँग लगभग 14.3 अरब लीटर रहने का अनुमान है — जो मौजूदा क्षमता के लगभग 78 प्रतिशत के बराबर है। इससे ज़ाहिर होता है कि आपूर्ति पक्ष अभी मज़बूत स्थिति में है।
आम जनता और उद्योग पर असर
ई100 मानकों के लागू होने से देश में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा और ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए अब एक स्पष्ट नियामक ढाँचा उपलब्ध है। उपभोक्ताओं को दीर्घकालिक रूप से सस्ते ईंधन विकल्प मिल सकते हैं, बशर्ते एथेनॉल की उपलब्धता पंप स्तर तक सुनिश्चित की जाए। आलोचकों का कहना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर — विशेष रूप से ई100 पंपों का नेटवर्क — अभी भी सीमित है, जो व्यापक अपनाने में बाधा बन सकता है।
आगे क्या होगा
नए मानक तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं, लेकिन बाज़ार में ई100-सक्षम वाहनों की उपलब्धता OEM की उत्पादन योजनाओं पर निर्भर करेगी। इस क्षेत्र में टोयोटा और अन्य निर्माता पहले से रुचि दिखा चुके हैं। एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की सफलता अब नीति, उद्योग और वितरण — तीनों के समन्वय पर टिकी है।