MCX पर चांदी ₹2,31,637 पर चमकी, सोना ₹1,44,206 पर सपाट; फेड चेयर की स्पीच से निवेशक सतर्क
सारांश
मुख्य बातें
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर गुरुवार, 2 जुलाई 2026 को सोने और चांदी में मिलाजुला कारोबार दर्ज किया गया। जहाँ सोना करीब-करीब सपाट बना रहा, वहीं चांदी 0.54 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹2,31,637 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुँच गई। बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, फेड चेयर केविन वॉर्श के हालिया बयान के बाद निवेशकों में सतर्कता का माहौल बना हुआ है।
सोने का हाल: सपाट कारोबार, सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव
MCX पर 5 अगस्त 2026 के सोने के वायदा अनुबंध ने पिछली क्लोजिंग ₹1,44,430 के मुकाबले ₹548 (0.37 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ ₹1,43,882 पर कारोबार शुरू किया। हालाँकि, शुरुआती घंटों में ही खरीदारी का दबाव बना और कीमतें संभल गईं।
सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर सोना ₹244 (0.16 प्रतिशत) की मामूली गिरावट के साथ ₹1,44,206 पर कारोबार कर रहा था। दिन के कारोबार में सोने ने ₹1,43,882 का निम्न स्तर और ₹1,44,448 का उच्च स्तर छुआ।
चांदी में चमक: आधे प्रतिशत से अधिक की तेजी
सोने की तुलना में चांदी का प्रदर्शन बेहतर रहा। MCX पर 5 सितंबर 2026 के चांदी के वायदा अनुबंध ने पिछली क्लोजिंग ₹2,30,384 के मुकाबले ₹812 (0.35 प्रतिशत) की बढ़त के साथ ₹2,31,196 पर शुरुआत की।
बाद में यह और मज़बूत होकर ₹1,253 (0.54 प्रतिशत) की तेजी के साथ ₹2,31,637 पर पहुँच गई। दिन के कारोबार में चांदी ने ₹2,30,973 का निम्न स्तर और ₹2,32,339 का उच्च स्तर दर्ज किया।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी मिलाजुला रुख
वैश्विक बाज़ारों में भी यही तस्वीर देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना 0.14 प्रतिशत की कमजोरी के साथ $4,076 प्रति औंस पर था, जबकि चांदी 0.14 प्रतिशत की बढ़त के साथ $60.59 प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।
फेड चेयर की स्पीच से बाज़ार में अनिश्चितता
बाज़ार जानकारों के अनुसार, सोने और चांदी के सीमित दायरे में कारोबार की प्रमुख वजह फेड चेयर केविन वॉर्श का हालिया बयान है। वॉर्श ने कहा कि महंगाई पहले के मुकाबले घटी है, लेकिन अभी भी ऊँचे स्तर पर बनी हुई है। उन्होंने आगामी फेड बैठक में ब्याज दरों की दिशा को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया, जिससे निवेशक सतर्क बने हुए हैं।
गौरतलब है कि जब भी फेड की ब्याज दर नीति को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है, सोने और चांदी जैसी सुरक्षित परिसंपत्तियों में कारोबार सीमित दायरे में सिमट जाता है, क्योंकि निवेशक अगले संकेत का इंतजार करते हैं। आने वाले सत्रों में फेड के रुख पर बाज़ार की नज़र बनी रहेगी।