सोने-चांदी में लगातार दूसरे दिन गिरावट: MCX पर सोना ₹1,41,951, चांदी ₹2,18,491 प्रति किलो
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे दिन कमज़ोरी दर्ज की गई, जहाँ दोनों कीमती धातुएँ 0.6 प्रतिशत तक टूट गईं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सुबह 11 बजे सोना 870 रुपए की गिरावट के साथ ₹1,41,951 प्रति 10 ग्राम पर था, जबकि चांदी 884 रुपए कमज़ोर होकर ₹2,18,491 प्रति किलो पर कारोबार कर रही थी। डॉलर इंडेक्स के 101 के पार पहुँचने से कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा है।
MCX पर सोने का कारोबार
5 अगस्त 2026 के सोने के कॉन्ट्रैक्ट ने ₹1,42,821 प्रति 10 ग्राम के पिछले बंद भाव के मुकाबले ₹1,42,392 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार की शुरुआत की। दिन के कारोबार में सोने ने ₹1,41,742 प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम और ₹1,42,393 प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर छुआ। यह गिरावट 0.61 प्रतिशत रही, जो पिछले कुछ सत्रों की कमज़ोर धारणा को दर्शाती है।
चांदी में भी दबाव जारी
चांदी के 4 सितंबर 2026 के कॉन्ट्रैक्ट ने पिछले ₹2,19,375 प्रति किलो के बंद भाव के मुकाबले ₹2,18,280 प्रति किलो पर शुरुआत की। दिन के दौरान चांदी ने ₹2,17,325 प्रति किलो का न्यूनतम और ₹2,18,884 प्रति किलो का उच्चतम स्तर दर्ज किया। गिरावट 0.40 प्रतिशत रही।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी कमज़ोरी
वैश्विक स्तर पर भी कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव रहा। COMEX पर सोना 0.48 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ 4,030 डॉलर प्रति औंस पर था, जबकि चांदी 0.41 प्रतिशत गिरकर 57.80 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। गौरतलब है कि घरेलू और वैश्विक — दोनों बाज़ारों में एक साथ गिरावट ने निवेशकों की धारणा को और कमज़ोर किया है।
गिरावट की मुख्य वजह: डॉलर और भू-राजनीतिक तनाव
कीमती धातुओं में इस कमज़ोरी की प्रमुख वजह डॉलर इंडेक्स का मज़बूत होना बताई जा रही है। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बाद डॉलर इंडेक्स फिर से 101 के पार पहुँच गया है। डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी मुद्रा की यूरो, जापानी येन, पाउंड स्टर्लिंग, कैनेडियन डॉलर, स्वीडिश क्रोना और स्विस फ्रैंक — इन छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले स्थिति को मापता है।
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है, वहीं अमेरिका ईरान के सैन्य ठिकानों पर लगातार हमले कर रहा है — जिसका उद्देश्य कथित तौर पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की पकड़ कमज़ोर करना है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पहले से ही अनिश्चितता के दौर से गुज़र रहे हैं।
आगे क्या देखें
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक डॉलर इंडेक्स मज़बूत बना रहेगा और अमेरिका-ईरान तनाव कम नहीं होता, कीमती धातुओं पर दबाव बने रहने की संभावना है। निवेशक अब अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के अगले संकेतों और मध्य पूर्व की स्थिति पर नज़र रखेंगे, जो आने वाले सत्रों में सोने-चांदी की दिशा तय करेंगे।