खाड़ी देशों में ऊर्जा संरचना पर हमलों के बाद अपस्ट्रीम ऑयल कंपनियों को मिल सकता है लाभ: नई रिपोर्ट
सारांश
Key Takeaways
- खाड़ी देशों में ऊर्जा संरचना पर हमले का असर अपस्ट्रीम ऑयल कंपनियों पर पड़ेगा।
- डाउनस्ट्रीम उद्योग के लिए चुनौतियाँ बढ़ेंगी।
- ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से सभी ऊर्जा आयातक प्रभावित हो सकते हैं।
- भारत का कच्चे तेल का आयात हाल के हफ्तों में घटा है।
- एलएनजी की कीमतों में तेजी आई है।
नई दिल्ली, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। खाड़ी देशों में ऊर्जा संरचना पर हुए हमलों के परिणामस्वरूप कीमतों में वृद्धि से अपस्ट्रीम ऑयल और सेवा कंपनियों को लाभ मिलने की संभावना है। दूसरी ओर, डाउनस्ट्रीम और अंतिम उपभोक्ता उद्योग की चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं।
अपस्ट्रीम ऑयल कंपनियों का तात्पर्य कच्चे तेल के उत्पादन करने वाली इकाइयों से है, जबकि डाउनस्ट्रीम कंपनियों का अर्थ वितरण इकाइयों से है।
सिस्टमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ऊर्जा कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति में रुकावट का ऊर्जा आयातक देशों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
इस रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि आपूर्ति को पुनः स्थापित करने और फिर से शुरू करने में लंबा समय लग सकता है, जिससे इस क्षेत्र को दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है।
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, 6 मार्च को समाप्त सप्ताह में भारत का कच्चे तेल का आयात घटकर 1.9 मिलियन बैरल रह गया, जबकि फरवरी 2026 में यह लगभग 25 मिलियन बैरल प्रति सप्ताह था।
रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के साप्ताहिक निर्यात की मात्रा 7 मार्च को समाप्त सप्ताह में घटकर 228 मिलियन बैरल और 14 मार्च को समाप्त सप्ताह में 184 मिलियन बैरल रह गई, जो फरवरी 2026 में लगभग 268 मिलियन बैरल प्रति सप्ताह थी।
सऊदी अरब से कच्चे तेल का निर्यात मार्च के पहले और दूसरे सप्ताह में क्रमशः 26 मिलियन बैरल और 12 मिलियन बैरल रहा, जबकि फरवरी में यह औसतन 42 मिलियन और 33 मिलियन बैरल प्रति सप्ताह था।
इराक और संयुक्त अरब अमीरात के निर्यात में भी उल्लेखनीय गिरावट देखी गई, जबकि अमेरिका से निर्यात बढ़कर 25 मिलियन और 32 मिलियन बैरल हो गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि अन्य देशों के निर्यात में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं हुआ।
इसमें यह भी कहा गया है कि जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और भारत जैसे प्रमुख आयातकों से एलएनजी की मात्रा में भी भारी कमी आई है, जिसके परिणामस्वरूप हाल के हफ्तों में कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है, जो 10 डॉलर/मिमीबीटीयू से बढ़कर लगभग 20 डॉलर/मिमीबीटीयू हो गई है।