राज कुंद्रा को इंग्लैंड हाई कोर्ट का झटका: राजस्थान रॉयल्स विवाद में $4.94 मिलियन चुकाने का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
इंग्लैंड और वेल्स के हाई कोर्ट ने 20 जुलाई को व्यवसायी राज कुंद्रा को निवेश फर्म इमर्जिंग मीडिया वेंचर्स (EMV) को 4.94 मिलियन अमेरिकी डॉलर ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया है। साथ ही, कोर्ट ने उन्हें आईपीएल फ्रेंचाइजी राजस्थान रॉयल्स में अपनी पूर्व हिस्सेदारी से जुड़े किसी भी विवाद को लेकर भारत में कानूनी कार्रवाई करने पर स्थायी रोक लगा दी है। यह फैसला EMV के लिए एक निर्णायक कानूनी जीत है।
विवाद की पृष्ठभूमि
2015 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कुंद्रा को आईपीएल मुकाबलों में सट्टेबाजी का दोषी पाया था, जिसके बाद उन्हें राजस्थान रॉयल्स से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद एक शेयर ट्रांसफर एग्रीमेंट के तहत उन्होंने फ्रेंचाइजी में अपनी 11.7 प्रतिशत हिस्सेदारी हस्तांतरित की। 2019 में एक सेटलमेंट एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुए, जिसके तहत कुंद्रा ने 4.94 मिलियन अमेरिकी डॉलर स्वीकार किए, राजस्थान रॉयल्स के शेयरों पर सभी अधिकार छोड़े और यह सहमति दी कि भविष्य के किसी भी विवाद पर केवल इंग्लैंड की अदालतों का अधिकार क्षेत्र होगा।
मुख्य घटनाक्रम
इस साल की शुरुआत में जब EMV और उसके शेयरधारकों ने राजस्थान रॉयल्स में अपनी नियंत्रण हिस्सेदारी अरबपति लक्ष्मी मित्तल और उनके परिवार के नेतृत्व वाले एक समूह को बेची — जिसमें सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला भी भागीदार थे — तो कुंद्रा ने इस प्रक्रिया को चुनौती देने की कोशिश की। रिपोर्टों के अनुसार, यह डील लगभग 1.65 बिलियन अमेरिकी डॉलर की थी, जो आईपीएल के इतिहास की सबसे बड़ी फ्रेंचाइजी बिक्री में से एक मानी जा रही है।
कुंद्रा ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिकाएँ दायर कीं। उन्होंने EMV के सह-संस्थापक मनोज बडाले पर धोखाधड़ी और जानकारी छिपाने के आरोप लगाए, बीसीसीआई से संपर्क करने की धमकी दी और डील को बाधित करने का प्रयास किया। EMV ने तर्क दिया कि ये कदम 2019 के सेटलमेंट एग्रीमेंट का सीधा उल्लंघन थे।
अदालत का फैसला
जस्टिस ग्रिफिथ्स ने अपने फैसले में कहा कि कुंद्रा के पास EMV के दावे का सफलतापूर्वक बचाव करने की 'कोई वास्तविक संभावना' नहीं थी। कोर्ट को इस बात का भी 'कोई सबूत नहीं' मिला कि 2015 का शेयर ट्रांसफर एग्रीमेंट या 2019 का सेटलमेंट एग्रीमेंट धोखाधड़ी या अनुचित दबाव से हासिल किया गया था। कोर्ट ने पाया कि कुंद्रा ने कानूनी सलाहकारों की उपस्थिति में अपनी स्वेच्छा से दोनों एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए थे।
इसके अलावा, जनवरी में जारी किए गए एंटी-सूट इंजेक्शन को भी स्थायी कर दिया गया, जिसके तहत कुंद्रा और उनकी कंपनी कुकी इन्वेस्टमेंट्स को मुंबई में कंपनी याचिका आगे बढ़ाने या भारत में कोई भी संबंधित कानूनी कार्रवाई शुरू करने से रोका गया था। कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि EMV ने बार-बार के उल्लंघनों के कारण सेटलमेंट एग्रीमेंट को विधिसम्मत तरीके से समाप्त किया था।
आगे क्या होगा
कोर्ट के आदेश के अनुसार, कुंद्रा और कुकी इन्वेस्टमेंट्स को संयुक्त रूप से और अलग-अलग 4.94 मिलियन अमेरिकी डॉलर ब्याज सहित EMV को चुकाने होंगे। गौरतलब है कि यह वही राशि है जो कुंद्रा ने मूल रूप से 2019 के सेटलमेंट में प्राप्त की थी। यह फैसला राजस्थान रॉयल्स के स्वामित्व विवाद पर एक बड़ी न्यायिक विराम लगाता है, हालाँकि कुंद्रा के अगले कदम पर अभी स्पष्टता नहीं है।