भुने, भीगे या पकाए गए चने: कौन सा विकल्प है अधिक पौष्टिक?
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। शरीर के सही संचालन के लिए प्रोटीन की आवश्यकता अत्यधिक होती है, क्योंकि यह कोशिकाओं को मजबूती और शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। ऐसे में महंगे सप्लीमेंट्स के स्थान पर, किचन में उपलब्ध चना एक उत्कृष्ट प्रोटीन स्रोत है। चना एक पौष्टिक और आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर खाद्य पदार्थ है। इसमें प्रोटीन, फाइबर और कई आवश्यक पोषक तत्व होते हैं जो शरीर को ऊर्जा और ताकत प्रदान करते हैं।
आयुर्वेद के अनुसार, भुना चना, भीगा और पकाया हुआ चना, या चने का सत्तू, विभिन्न तरीकों से शरीर को लाभ पहुंचाते हैं। लेकिन चने का सेवन सही मात्रा और विधि से करना चाहिए, ताकि पाचन ठीक रहे और शरीर को पूरा लाभ मिले। सबसे पहले, भुने हुए चने की बात करें। भुने हुए चने में कैलोरी कम और फाइबर अधिक होता है, जिससे यह वजन नियंत्रित करने में सहायता करता है।
इसका सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और हृदय रोगों का खतरा कम होता है। ध्यान रहे कि इसका सेवन सुबह और दोपहर में करना चाहिए।
दूसरी ओर, भीगा और पकाया हुआ चना मुख्यतः काले चने का होता है, जिसे रातभर भिगोकर सुबह उबाला जाता है। इसका सेवन शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है और यह वजन बढ़ाने में भी सहायक होता है। अगर आप जिम में मेहनत कर रहे हैं, तो पकाया हुआ चना आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प है। साथ ही, यदि चने को देसी घी में छौंक दिया जाए, तो यह वात दोष को कम करने में मदद करता है। इसे नाश्ते या शाम के हल्के नाश्ते के रूप में खाया जा सकता है।
तीसरे स्थान पर आता है चने से बना सत्तू। सत्तू का सेवन गर्मियों में भी किया जा सकता है, क्योंकि यह प्रोटीन के साथ-साथ पेट को ठंडक देने का बेहतरीन उपाय है। इसका सेवन थकान और नेत्र संबंधी रोगों में कमी लाता है। गर्मियों में, तीनों प्रकार से चने का सेवन करना फायदेमंद है, लेकिन वात दोष से प्रभावित लोग चने का सेवन करते समय सावधानी बरतें।