नकली दवा नेटवर्क पर कर्नाटक का प्रहार: जानकारी देने पर ₹10,000 से ₹50,000 तक का इनाम, हेल्पलाइन 1902 जारी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री यूटी खादर ने 20 अगस्त 2026 को बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए राज्य में फैले नकली दवा नेटवर्क का भंडाफोड़ करने के लिए आम जनता से सीधी अपील की। मंत्री ने घोषणा की कि नकली दवाओं की आपूर्ति या बिक्री की विश्वसनीय जानकारी देने वाले व्यक्ति को ₹10,000 से ₹50,000 तक का नकद इनाम दिया जाएगा और उसकी पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।
मुख्य घटनाक्रम: ₹5 करोड़ की नकली दवाएँ जब्त
इस अपील से पहले उसी दिन — गुरुवार, 20 अगस्त को — प्रवर्तन अधिकारियों ने रामनगर जिले में सक्रिय एक नेटवर्क से ₹5 करोड़ मूल्य की नकली दवाएँ जब्त कीं। जब्त दवाओं पर कई बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लेबल लगे हुए थे। प्रारंभिक जाँच में यह सामने आया है कि यह नेटवर्क केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी सक्रिय है।
स्वास्थ्य मंत्री खादर ने इस मामले में अंतरराज्यीय जाँच की माँग की है। उन्होंने कहा कि यह नेटवर्क अस्पतालों और मेडिकल स्टोर — दोनों चैनलों के ज़रिए नकली दवाएँ वितरित कर रहा था।
सरकार की प्रतिक्रिया: हेल्पलाइन और क्यूआर कोड जारी
स्वास्थ्य विभाग ने जनता की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए दूरभाष नंबर 1902 और एक क्यूआर कोड जारी किया है, जिसके ज़रिए कोई भी नागरिक नकली दवा नेटवर्क की जानकारी सीधे विभाग को दे सकता है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सूचना देने वालों की पहचान किसी भी परिस्थिति में सार्वजनिक नहीं की जाएगी।
खादर ने नागरिकों को सतर्क करते हुए कहा कि यदि कोई विक्रेता किसी महँगी दवा को असामान्य रूप से कम दाम पर बेचने की कोशिश करे, तो यह संदेह का कारण है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि ऐसी स्थिति में तुरंत विभाग को सूचित करें।
आम जनता पर असर: 6.5 करोड़ की आबादी, सिर्फ 200 अधिकारी
मंत्री खादर ने एक चिंताजनक तथ्य सामने रखा — कर्नाटक की 6.5 करोड़ की आबादी की निगरानी के लिए खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य विभाग में केवल 200 कर्मचारी कार्यरत हैं। इस गंभीर अनुपात को देखते हुए उन्होंने कहा कि बिना जन-सहभागिता के इस तरह के छिपे हुए नेटवर्क का पता लगाना लगभग असंभव है।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में नकली दवाओं की समस्या सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। गौरतलब है कि नकली दवाएँ न केवल इलाज में विफलता का कारण बन सकती हैं, बल्कि मरीज़ की जान को भी जोखिम में डाल सकती हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं: अंतरराज्यीय जाँच की ज़रूरत
अतिरिक्त ड्रग कंट्रोलर डॉ. उमेश एस. ने बताया कि जाँच के दौरान यह स्पष्ट हुआ है कि यह नेटवर्क कर्नाटक के बाहर भी फैला हुआ है। उन्होंने कहा कि ड्रग्स कंट्रोलर और स्टेट लाइसेंसिंग अथॉरिटी को इस नेटवर्क के बारे में सूचित कर दिया गया है।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे उन वितरकों की पहचान करें जो इन नकली दवाओं को आम लोगों तक पहुँचाते थे। साथ ही, पर्चेस डिटेल्स और बैच डिटेल्स की जाँच कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कौन-सी दवा असली है और कौन-सी नकली। सभी अस्पतालों और मेडिकल स्टोरों पर निरीक्षण के आदेश दिए गए हैं।
क्या होगा आगे
अंतरराज्यीय जाँच की माँग के साथ यह मामला केंद्रीय औषधि नियामक एजेंसियों तक पहुँच सकता है। नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और हेल्पलाइन 1902 के ज़रिए मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर आने वाले हफ्तों में और गिरफ्तारियाँ और जब्ती की संभावना है।