विश्व आयोडीन अल्पता दिवस 2026: आयोडीनयुक्त नमक के 5 बड़े स्वास्थ्य फायदे, आयुष मंत्रालय ने किया जागरूक
सारांश
मुख्य बातें
आयोडीनयुक्त नमक केवल भोजन का स्वाद नहीं बढ़ाता, बल्कि यह शरीर की कई महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाओं को सुचारु बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। 21 अक्टूबर 2026 को मनाए गए विश्व आयोडीन अल्पता दिवस के अवसर पर आयुष मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि आयोडीन एक अनिवार्य पोषक तत्व है जो थायरॉइड ग्रंथि की सही कार्यप्रणाली के लिए ज़रूरी है। इस दिवस का उद्देश्य आम जन को आयोडीन की कमी से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति सचेत करना है।
आयोडीन शरीर के लिए क्यों ज़रूरी है
आयुष मंत्रालय के अनुसार, थायरॉइड ग्रंथि ऐसे हार्मोन उत्पन्न करती है जो शरीर के मेटाबॉलिज्म — यानी भोजन से ऊर्जा बनाने की प्रक्रिया — को नियंत्रित करते हैं। यह प्रक्रिया तभी सुचारु रहती है जब शरीर में आयोडीन की पर्याप्त मात्रा हो। इसके अलावा, आयोडीन बच्चों के मस्तिष्क विकास, सीखने-समझने की क्षमता और सामान्य शारीरिक बढ़ोतरी के लिए भी अपरिहार्य है।
यह ऐसे समय में याद दिलाना ज़रूरी है जब भारत के कई ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में अभी भी सादे अथवा अशुद्ध नमक का उपयोग होता है, जिसमें आयोडीन का अंश नगण्य होता है।
गर्भावस्था में आयोडीन की विशेष भूमिका
गर्भावस्था के दौरान आयोडीन की पर्याप्त मात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इस अवधि में गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र का विकास तेज़ी से होता है। मंत्रालय की जानकारी के अनुसार, गर्भावस्था में आयोडीन की गंभीर कमी होने पर शिशु के समग्र विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसीलिए गर्भवती महिलाओं के लिए आयोडीनयुक्त नमक के नियमित सेवन को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
कमी से होने वाली स्वास्थ्य समस्याएँ
शरीर में लंबे समय तक आयोडीन की कमी रहने पर थायरॉइड ग्रंथि असामान्य रूप से बढ़ सकती है, जिसे घेंघा रोग कहा जाता है। बच्चों में यह कमी उनकी बौद्धिक क्षमता और शारीरिक विकास दोनों को प्रभावित कर सकती है — सीखने और समझने में परेशानी इसके सामान्य लक्षण हैं।
गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) आयोडीन अल्पता को दुनिया भर में रोकी जा सकने वाली मानसिक मंदता के प्रमुख कारणों में गिनता है। भारत में नेशनल आयोडीन डेफिशिएंसी डिसऑर्डर कंट्रोल प्रोग्राम इसी दिशा में वर्षों से काम कर रहा है।
आयोडीन के प्राकृतिक स्रोत और नमक का सही उपयोग
आयुष मंत्रालय के अनुसार, दूध, दही, दालें, कुछ हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, आलू और बीज — जैसे तिल, कद्दू के बीज तथा सूरजमुखी के बीज — में भी आयोडीन की कुछ मात्रा पाई जाती है। इन खाद्य पदार्थों को दैनिक आहार में शामिल करना फायदेमंद है।
हालाँकि, आयोडीनयुक्त नमक के नाम पर नमक की अधिक मात्रा लेना उचित नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय है कि अधिक नमक से उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए नमक का सेवन सीमित किंतु आयोडीनयुक्त ही होना चाहिए।
जागरूकता की ज़रूरत और आगे की राह
विश्व आयोडीन अल्पता दिवस हर वर्ष इस बात की याद दिलाता है कि एक छोटा-सा बदलाव — सादे नमक की जगह आयोडीनयुक्त नमक अपनाना — सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बड़ा असर डाल सकता है। हर उम्र में, विशेषकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं में, आयोडीन की पर्याप्तता सुनिश्चित करना एक स्वस्थ समाज की बुनियाद है।