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व्याघ्रासन (टाइगर पोज): मणिपुर चक्र को सक्रिय करे, रक्त संचार सुधारे और कमर दर्द से दिलाए राहत

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व्याघ्रासन (टाइगर पोज): मणिपुर चक्र को सक्रिय करे, रक्त संचार सुधारे और कमर दर्द से दिलाए राहत

सारांश

दफ्तर की कुर्सी से टूटती पीठ और जमती अकड़न का जवाब है व्याघ्रासन — एक ऐसा टाइगर पोज जो मणिपुर चक्र जगाता है, रक्त संचार दुरुस्त करता है और साइटिका तक में राहत देता है। आयुष मंत्रालय भी इसे मान्यता देता है।

मुख्य बातें

व्याघ्रासन (टाइगर पोज) रीढ़ की हड्डी को मज़बूत और लचीला बनाता है तथा कमर दर्द व साइटिका में राहत देता है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इसे एक महत्वपूर्ण और प्रभावी योगासन के रूप में मान्यता दी है।
यह आसन मणिपुर चक्र (सोलर प्लेक्सस) और स्वाधिष्ठान चक्र को उत्तेजित कर आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति बढ़ाता है।
नियमित अभ्यास से रक्त संचार बेहतर होता है, पाचन तंत्र सक्रिय होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।
घुटनों या रीढ़ की गंभीर समस्या वाले लोगों को इसे योग प्रशिक्षक की देखरेख में करना चाहिए।

व्याघ्रासन (टाइगर पोज) एक सरल किंतु अत्यंत प्रभावशाली योगासन है, जो दफ्तर में घंटों कुर्सी पर बैठने से उत्पन्न अकड़न, कमर दर्द और पीठ दर्द से राहत दिलाने में सहायक है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन रीढ़ की हड्डी को मज़बूत और लचीला बनाता है तथा साइटिका जैसी तकलीफ़ों में भी उपयोगी है। नियमित अभ्यास से शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है और पेट की अतिरिक्त चर्बी भी कम होती है।

व्याघ्रासन क्या है और इसका नाम कैसे पड़ा

इस आसन को करते समय शरीर की मुद्रा बाघ के समान हो जाती है — इसीलिए इसे टाइगर पोज भी कहते हैं। यह मुद्रा शरीर में ऊर्जा को नियंत्रित और उद्देश्यपूर्ण ढंग से प्रवाहित करने में सहायक मानी जाती है। योग परंपरा में इसे एक संतुलित और सुलभ आसन माना गया है, जिसे शुरुआती अभ्यासी भी आसानी से कर सकते हैं।

मणिपुर और स्वाधिष्ठान चक्र पर प्रभाव

योग विशेषज्ञों के अनुसार, व्याघ्रासन मुख्य रूप से मणिपुर चक्र (सोलर प्लेक्सस चक्र) और स्वाधिष्ठान चक्र (सैक्रल चक्र) को उत्तेजित करता है। इन दोनों ऊर्जा केंद्रों के सक्रिय होने से आत्मविश्वास, आंतरिक शक्ति और सशक्तीकरण की भावना में वृद्धि होती है। यह ऐसे समय में विशेष रूप से लाभकारी है जब मानसिक थकान और तनाव दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हों।

रक्त संचार और पाचन तंत्र पर असर

इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है — विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व सुचारु रूप से पहुँचते हैं। इससे पैरों, हाथों और पीठ की मांसपेशियाँ मज़बूत होती हैं और थकान में कमी आती है। बेहतर रक्त प्रवाह से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है, जो दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

आसन के दौरान पेट के अंगों पर पड़ने वाले हल्के दबाव से पाचन तंत्र सक्रिय होता है। इससे गैस और कब्ज़ जैसी सामान्य समस्याओं में राहत मिलती है, भोजन का पाचन सुधरता है और सही समय पर भूख लगने लगती है।

व्याघ्रासन करने की सही विधि

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले योगा मैट पर घुटनों के बल बैठें और दोनों हथेलियों को ज़मीन पर टिका लें, जिससे शरीर का भार हाथों और घुटनों पर समान रूप से बँट जाए। इसके बाद गहरी साँस लेते हुए सामने देखें और दाईं टाँग को पीछे की ओर सीधा उठाएँ, साथ ही गर्दन को ऊपर की ओर खींचें। फिर साँस छोड़ते हुए उस टाँग को मोड़कर छाती की तरफ लाएँ और पीठ को ऊपर की ओर गोलाई में झुकाएँ। यही क्रम बाईं टाँग से भी दोहराएँ।

किन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए

घुटनों, कलाइयों या रीढ़ से जुड़ी किसी गंभीर समस्या से पीड़ित व्यक्तियों को यह आसन किसी योग्य योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं और हाल ही में पेट की सर्जरी करा चुके लोगों को इससे परहेज़ करने की सलाह दी जाती है। नियमित और सही तकनीक से किया गया यह अभ्यास दीर्घकाल में समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि चक्र-सक्रियण के दावे अभी तक पश्चिमी चिकित्सा विज्ञान द्वारा पूरी तरह प्रमाणित नहीं हैं। भारत में बढ़ती सेडेंटरी जीवनशैली और ऑफिस-संबंधी मस्कुलोस्केलेटल समस्याओं के मद्देनज़र, इस तरह के सुलभ योगाभ्यासों को बढ़ावा देना जनस्वास्थ्य की दृष्टि से उपयोगी है। हालाँकि, पाठकों को यह भी समझना चाहिए कि गंभीर शारीरिक समस्याओं में योग एकमात्र उपाय नहीं है — चिकित्सकीय परामर्श अनिवार्य है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

व्याघ्रासन (टाइगर पोज) क्या है और इसे कैसे करते हैं?
व्याघ्रासन एक योगासन है जिसमें शरीर की मुद्रा बाघ के समान होती है। इसे करने के लिए योगा मैट पर घुटनों के बल बैठकर हथेलियाँ ज़मीन पर टिकाएँ, साँस लेते हुए एक टाँग पीछे उठाएँ, फिर साँस छोड़ते हुए उसे मोड़कर छाती की ओर लाएँ और पीठ को गोलाई में झुकाएँ।
व्याघ्रासन से मणिपुर चक्र कैसे सक्रिय होता है?
योग विशेषज्ञों के अनुसार, व्याघ्रासन मणिपुर चक्र (सोलर प्लेक्सस चक्र) और स्वाधिष्ठान चक्र को उत्तेजित करता है। इन चक्रों के सक्रिय होने से आत्मविश्वास, आंतरिक शक्ति और सशक्तीकरण की भावना बढ़ती है।
क्या व्याघ्रासन कमर दर्द और साइटिका में फायदेमंद है?
हाँ, भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार व्याघ्रासन रीढ़ की हड्डी को मज़बूत और लचीला बनाता है तथा कमर दर्द व साइटिका से राहत देने में सहायक है। यह ऑफिस में लंबे समय तक बैठने वाले लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना गया है।
व्याघ्रासन से रक्त संचार पर क्या असर होता है?
इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व बेहतर तरीके से पहुँचते हैं। इससे मांसपेशियाँ मज़बूत होती हैं, थकान कम होती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी सुधार होता है।
किन लोगों को व्याघ्रासन से बचना चाहिए?
घुटनों, कलाइयों या रीढ़ की गंभीर समस्या से पीड़ित व्यक्तियों और गर्भवती महिलाओं को यह आसन करने से पहले किसी योग्य चिकित्सक या योग प्रशिक्षक से परामर्श लेना चाहिए। हाल ही में पेट की सर्जरी करा चुके लोगों को भी इससे परहेज़ करने की सलाह दी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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