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नेपाल बाढ़: भोटे कोसी में तबाही के बाद 290 भारतीय लापता, विदेश मंत्रालय ने जारी की बचाए गए नागरिकों की सूची

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नेपाल बाढ़: भोटे कोसी में तबाही के बाद 290 भारतीय लापता, विदेश मंत्रालय ने जारी की बचाए गए नागरिकों की सूची

सारांश

नेपाल में भोटे कोसी नदी की अचानक आई बाढ़ ने अंतरराष्ट्रीय संकट का रूप ले लिया है — 290 भारतीय समेत 644 लोग लापता हैं। कैलाश मानसरोवर यात्री, निर्माण श्रमिक और कई देशों के नागरिक इस आपदा की चपेट में हैं।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय ने 27 अगस्त 2026 को पुष्टि की कि नेपाल की भोटे कोसी बाढ़ के बाद 290 भारतीय लापता हैं।
रसुवा जिले की त्रिशुली-वन परियोजना में काम कर रहे 63 भारतीय श्रमिक और तमिलनाडु के 21 कैलाश मानसरोवर यात्री भी प्रभावित।
नेपाल पुलिस के अनुसार कुल 644 लोग लापता, जिनमें 517 विदेशी नागरिक शामिल।
लापता विदेशियों में 100 चीनी , 53 यूक्रेनी , 51 मलेशियाई , 35 ऑस्ट्रेलियाई , 33 ब्रिटिश और 25 कनाडाई नागरिक।
अमेरिकी विदेश विभाग ने 3 अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित बचाए जाने की पुष्टि की; लगभग 90 अमेरिकी प्रभावित हो सकते हैं।
बाढ़ का कारण नेपाल-चीन सीमावर्ती क्षेत्र में हिमस्खलन ; रसुवा और नुवाकोट सर्वाधिक प्रभावित।

भारत के विदेश मंत्रालय ने 27 अगस्त 2026 को पुष्टि की कि नेपाल में भोटे कोसी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद 290 भारतीय नागरिक लापता हैं। हिमालयी देश में यह आपदा उस समय आई जब नदी के ऊपरी हिस्से में हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आ गई, जिसने रसुवा और नुवाकोट जिलों में भारी तबाही मचाई।

कौन हैं प्रभावित भारतीय नागरिक

विदेश मंत्रालय के अनुसार, लापता भारतीयों में रसुवा जिले की त्रिशुली-वन परियोजना में कार्यरत 63 भारतीय श्रमिक शामिल हैं। इसके अलावा, तमिलनाडु के 21 भारतीय तीर्थयात्री भी इस आपदा से प्रभावित हुए हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे।

यह ऐसे समय में आया है जब मानसरोवर यात्रा के मौसम में हर वर्ष हजारों भारतीय तीर्थयात्री नेपाल के रास्ते इस मार्ग से गुजरते हैं, जिससे इस क्षेत्र में भारतीय नागरिकों की उपस्थिति विशेष रूप से अधिक रहती है।

बचाए गए भारतीय नागरिकों की सूची

विदेश मंत्रालय ने बचाए गए नागरिकों की सूची भी जारी की। इनमें सुमित कुमार खरे, मुकेश कुमार, सचिन कुमार, जसमंत सिंह, चंदन तिवारी, देवन कुमार शाह, अमरेंद्र कुमार यादव, ओम प्रकाश यादव, संपत कुमार, नीरज कुमार ठाकुर, जय हांसदा, सुनील कुमार सिंह, उपेंद्र बरनमल, राहुल कुमार गुप्ता, नीरज कुमार पटेल, सनोवर आलम, उपेंद्र भासिन, योगेश कुमार, मोहम्मद अकरम आलम, एमडी इंजमामुल हक, अभिषेक कुमार, अभिषेक यादव, मंगल सिंह, पंकज कुमार शाह, नीलेश कुमार, आशुतोष मनकोपाध्याय, लक्ष्मण तिवारी और गांगुली पटेल शामिल हैं।

बचाए गए अन्य नागरिकों में इंद्रजीत कुमार, ज्ञान सिंह, जय कृष्ण, शाहरुख, निपिंदर मंडल, सद्दाम हुसैन, राज कुमार तिवारी, आलोक कुमार शाह, अरुण कुमार शाह, सत्येन्द्र कुमार सिंह, बिट्टू कुमार, आदि अबेद बसुमतारी, केके पांडे, अभिषेक तिवारी, आकाश, प्रदीप, रंजन कुमार, पवन लोधी, अनिल, विजय प्रसाद, नारायण बहादुर, जन्मेजय सिंह, सुनील गिरी, रोशन कुमार, विशमर सिंह, सुहैल मुस्तफा, नीलेश, प्रमोद गुप्ता, जीतेन्द्र राम, नितेश कुमार सिंह, निजाउदीन, कवि कुमार और रोहित वर्मा के नाम शामिल हैं।

आपदा का व्यापक स्वरूप: अंतरराष्ट्रीय नागरिक भी लापता

नेपाल पुलिस के आँकड़ों के अनुसार, 27 अगस्त की दोपहर तक कुल 644 लोग लापता थे, जिनमें 517 विदेशी नागरिक शामिल हैं। लापता विदेशियों में 100 चीनी नागरिक (चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान के अनुसार), 53 यूक्रेनी, 51 मलेशियाई, 35 ऑस्ट्रेलियाई, 33 ब्रिटिश और 25 कनाडाई नागरिक शामिल हैं। 127 नेपाली नागरिक भी अभी तक लापता बताए जा रहे हैं।

अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया कि लगभग 90 अमेरिकी नागरिक इस बाढ़ से प्रभावित हो सकते हैं, हालाँकि 3 अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है और किसी अमेरिकी की मृत्यु की पुष्टि नहीं हुई है।

आपदा का कारण और सबसे प्रभावित क्षेत्र

अधिकारियों के अनुसार, यह बाढ़ नेपाल और चीन के बीच सीमावर्ती भोटे कोसी नदी के ऊपरी हिस्से में हिमस्खलन के कारण आई। रसुवा और नुवाकोट जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। गौरतलब है कि भोटे कोसी नदी का यह क्षेत्र भूगर्भीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है और अतीत में भी यहाँ कई बार अचानक बाढ़ की घटनाएँ दर्ज हो चुकी हैं।

आगे क्या होगा

विदेश मंत्रालय स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए है और नेपाल में भारतीय दूतावास राहत व बचाव कार्यों में सहयोग कर रहा है। बचाव अभियान जारी है और लापता नागरिकों की तलाश के लिए नेपाली अधिकारियों के साथ समन्वय किया जा रहा है। आने वाले दिनों में लापता नागरिकों की संख्या में बदलाव संभव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रायः बिना पर्याप्त आपातकालीन तंत्र के। भोटे कोसी में यह पहली बार नहीं है कि अचानक बाढ़ ने तबाही मचाई हो — 2016 में भी इसी नदी पर इसी तरह की घटना हुई थी। सवाल यह है कि क्या भारत सरकार के पास नेपाल में कार्यरत अपने नागरिकों का वास्तविक समय में पंजीकरण और आपातकालीन संपर्क प्रणाली है, या हर बार आपदा के बाद ही सूचियाँ जारी होती हैं।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल बाढ़ में कितने भारतीय लापता हैं?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भोटे कोसी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद 290 भारतीय नागरिक लापता हैं। इनमें रसुवा जिले में काम कर रहे 63 श्रमिक और तमिलनाडु के 21 कैलाश मानसरोवर यात्री भी शामिल हैं।
नेपाल में भोटे कोसी बाढ़ क्यों आई?
अधिकारियों के अनुसार, यह बाढ़ नेपाल और चीन की सीमा पर स्थित भोटे कोसी नदी के ऊपरी हिस्से में हिमस्खलन के कारण आई। रसुवा और नुवाकोट जिले इस आपदा से सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं।
नेपाल बाढ़ में कुल कितने लोग लापता हैं?
नेपाल पुलिस के अनुसार, 27 अगस्त की दोपहर तक कुल 644 लोग लापता थे, जिनमें 517 विदेशी नागरिक और 127 नेपाली नागरिक शामिल हैं। लापता विदेशियों में भारतीयों के अलावा चीनी, यूक्रेनी, मलेशियाई, ऑस्ट्रेलियाई, ब्रिटिश और कनाडाई नागरिक भी हैं।
क्या कैलाश मानसरोवर यात्री भी इस बाढ़ से प्रभावित हुए हैं?
हाँ, तमिलनाडु के 21 भारतीय तीर्थयात्री जो कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे, इस बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने उनके बारे में जानकारी जुटाने और बचाव कार्यों में सहयोग के लिए नेपाल स्थित भारतीय दूतावास को सक्रिय किया है।
भारत सरकार नेपाल बाढ़ में फँसे नागरिकों की मदद के लिए क्या कर रही है?
विदेश मंत्रालय स्थिति पर नज़र बनाए हुए है और बचाए गए नागरिकों की सूची जारी कर चुका है। नेपाल में भारतीय दूतावास नेपाली अधिकारियों के साथ समन्वय कर राहत व बचाव अभियान में सहयोग कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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