11 अगस्त 2026
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पीओके में पाकिस्तानी बलों की गोलीबारी में ब्रिटिश नागरिक की मौत, दूसरा दो माह से जेल में

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पीओके में पाकिस्तानी बलों की गोलीबारी में ब्रिटिश नागरिक की मौत, दूसरा दो माह से जेल में

सारांश

पीओके में आर्थिक सुधारों की माँग पर हुए प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तानी बलों की कथित गोलीबारी में ब्रिटिश नागरिक मोहम्मद अख्तर की जान गई, जबकि एक अन्य ब्रिटिश नागरिक वकास आरिफ दो माह से मीरपुर जेल में बंद हैं। यह मामला पीओके संकट को अब ब्रिटेन-पाकिस्तान कूटनीतिक दायरे में ले जाता है।

मुख्य बातें

मोहम्मद अख्तर (50 वर्ष, पीटरबरो) की 9 जून को पीओके के कोटली में पाकिस्तानी बलों की कथित गोलीबारी में मौत हुई।
परिवार के अनुसार अख्तर प्रदर्शन में शामिल नहीं थे, घर के पास चल रहे प्रदर्शनों के दौरान गोली लगी।
वकास आरिफ (38 वर्ष, नॉटिंघम) 5 जून के बाद से मीरपुर जेल में हैं; परिवार का कहना है वे प्रदर्शन में नहीं थे।
वकास के खिलाफ अब तक कोई औपचारिक आरोप नहीं, न ही अदालत में पेशी हुई।
ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय से संपर्क के बावजूद वकास की रिहाई नहीं हुई।
अख्तर के परिवार ने सुरक्षा के डर से ब्रिटिश अधिकारियों या पीओके पुलिस को मामले की जानकारी नहीं दी।

पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (पीओके) में आर्थिक एवं चुनाव सुधारों की माँग को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित गोलीबारी में एक ब्रिटिश नागरिक की मौत हो गई। द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, पीटरबरो निवासी 50 वर्षीय मोहम्मद अख्तर को 9 जून को गोली लगी और उनकी मृत्यु हो गई। यह मामला पीओके में हुई हिंसा के अंतरराष्ट्रीय आयाम को उजागर करता है।

मुख्य घटनाक्रम

मोहम्मद अख्तर पीओके के कोटली शहर में रह रहे थे, जो उस क्षेत्र के निकट है जहाँ झड़पें हुईं। उनके परिजनों के अनुसार वे प्रदर्शन में सीधे तौर पर शामिल नहीं थे, किंतु उनके घर के समीप प्रदर्शन चल रहे थे। उनके चचेरे भाई मोहम्मद साद ने द गार्डियन को बताया, 'वह प्रदर्शन में शामिल नहीं थे, लेकिन उनके घर के पास प्रदर्शन चल रहे थे। उस दिन सुरक्षा बलों की ओर से गोलीबारी हुई थी और उन्हें एक गोली लग गई। उनके सीने के एक तरफ गोली का घाव था।'

साद ने यह भी बताया कि अख्तर के बच्चों ने इस मामले को ब्रिटिश अधिकारियों के समक्ष उठाने से परहेज़ किया। परिवार पीओके में पुलिस शिकायत भी दर्ज नहीं करा सका, क्योंकि उन्हें आशंका थी कि मामला उछालने से परिवार की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

दूसरे ब्रिटिश नागरिक की हिरासत

इसी कड़ी में, नॉटिंघम के रहने वाले 38 वर्षीय वकास आरिफ को 5 जून के प्रदर्शनों के बाद पीओके के मीरपुर शहर में हिरासत में लिया गया। उनके परिवार का कहना है कि वे प्रदर्शनों में शामिल नहीं थे। रिपोर्टों के अनुसार वे दो माह से अधिक समय से जेल में बंद हैं।

उनकी बहन सुमेरा ने द गार्डियन को बताया, 'वकास किसी भी तरह के प्रदर्शन में शामिल नहीं था। लेकिन मेरे दूसरे दो भाई प्रदर्शन में गए थे। इसके बाद पाकिस्तानी बल और रेंजर्स हमारे घर आए और मेरे भाइयों को अपने साथ ले गए।' सुमेरा ने आगे कहा, 'उसके खिलाफ कोई आरोप नहीं है। उसने कुछ भी गलत नहीं किया। उन्हें अदालत में भी पेश नहीं किया गया है।'

ब्रिटेन सरकार की प्रतिक्रिया

रिपोर्टों के अनुसार, वकास आरिफ के परिवार ने ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय से संपर्क कर उनकी रिहाई की माँग की है, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ब्रिटिश अधिकारियों की भूमिका और पाकिस्तान के साथ राजनयिक संवाद पर सवाल उठ रहे हैं।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब पीओके में आर्थिक असंतोष और चुनाव सुधारों को लेकर व्यापक जन-आक्रोश देखा जा रहा है। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में पीओके में हुई इस हिंसा को पाकिस्तानी अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक माना जा रहा है, और इसमें कई लोगों की जान जा चुकी है। ब्रिटिश नागरिकों के प्रभावित होने से यह मामला अब द्विपक्षीय कूटनीतिक दायरे में भी आ गया है।

क्या होगा आगे

परिवारों की ओर से ब्रिटिश संसद में भी इस मुद्दे को उठाए जाने की संभावना जताई जा रही है। वकास आरिफ की रिहाई और मोहम्मद अख्तर की मौत की स्वतंत्र जाँच की माँग तेज़ होती दिख रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह मामला दिखाता है कि पीओके का संकट अब ब्रिटेन के घरों तक पहुँच चुका है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीओके में मारे गए ब्रिटिश नागरिक कौन थे?
ब्रिटेन के पीटरबरो शहर के रहने वाले 50 वर्षीय मोहम्मद अख्तर की 9 जून को पीओके के कोटली में पाकिस्तानी बलों की कथित गोलीबारी में मौत हुई। द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार उनके परिजनों का कहना है कि वे प्रदर्शन में शामिल नहीं थे।
वकास आरिफ को क्यों हिरासत में लिया गया?
नॉटिंघम के 38 वर्षीय वकास आरिफ को 5 जून के प्रदर्शनों के बाद पीओके के मीरपुर में हिरासत में लिया गया। उनके परिवार और बहन सुमेरा का कहना है कि वे प्रदर्शनों में शामिल नहीं थे और उन पर कोई औपचारिक आरोप भी नहीं लगाया गया है।
ब्रिटेन सरकार ने इस मामले में क्या किया?
वकास आरिफ के परिवार ने ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय से संपर्क कर उनकी रिहाई की माँग की है, लेकिन दो माह से अधिक समय बाद भी वे जेल में हैं। मोहम्मद अख्तर के मामले में उनके परिवार ने सुरक्षा की आशंका से ब्रिटिश अधिकारियों को सूचित नहीं किया।
पीओके में प्रदर्शन किस बात को लेकर हो रहे थे?
पीओके में आर्थिक सुधारों और चुनाव प्रक्रिया में बदलाव की माँग को लेकर व्यापक प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियाँ हुईं।
क्या पीओके में हिरासत में लिए गए लोगों पर मुकदमा चलाया गया?
सुमेरा के अनुसार वकास आरिफ को अदालत में पेश नहीं किया गया और उन पर कोई आरोप नहीं लगाया गया। उनका कहना है कि हज़ारों लोगों को बिना कानूनी प्रक्रिया के जेल में डाला गया है ताकि प्रदर्शनों की ताकत कम की जा सके।
राष्ट्र प्रेस
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