डीआरसी के इतुरी में इबोला का कहर: 10 लाख विस्थापितों में 80% महिलाएं व बच्चे — संयुक्त राष्ट्र
सारांश
मुख्य बातें
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) के पूर्वी प्रांत इतुरी में फैले इबोला के प्रकोप की सबसे बड़ी मार महिलाओं और बच्चों पर पड़ रही है — यह चेतावनी संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता कर्मियों ने 8 अगस्त 2026 को दी। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) के अनुसार, इतुरी में लगभग 10 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं, जिनमें से करीब 80 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे हैं।
बच्चों पर असंगत बोझ
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के आँकड़ों के अनुसार, इबोला से हुई कुल मौतों में बच्चों की हिस्सेदारी लगभग एक तिहाई है, जबकि पुष्ट मामलों में उनकी संख्या करीब एक चौथाई है। यह अनुपात इस बात का संकेत है कि बच्चों में संक्रमण के बाद मृत्यु-दर वयस्कों की तुलना में कहीं अधिक है। यह ऐसे समय में आया है जब इतुरी पहले से ही सशस्त्र संघर्ष और लंबे समय से चली आ रही मानवीय आपातस्थिति से जूझ रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा असर
यूनिसेफ ने बताया कि इतुरी के सबसे प्रभावित इलाकों में हाल के महीनों में स्वास्थ्य सेवाओं के उपयोग में 40 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है, क्योंकि संक्रमण के भय से लोग अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों से दूरी बना रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) ने चेतावनी दी है कि इबोला के डर और स्वास्थ्य तंत्र पर बढ़ते दबाव के कारण अनेक गर्भवती महिलाएं आवश्यक चिकित्सा सहायता से वंचित हो रही हैं।
गौरतलब है कि इतुरी में प्रकोप शुरू होने के बाद से प्रसव के दौरान होने वाली मौतों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। औसतन हर हफ्ते छह महिलाएं प्रसव-संबंधी जटिलताओं के कारण जीवन खो रही हैं। इसके अलावा, गर्भावस्था के दौरान इबोला संक्रमण होने पर लगभग हर मामले में भ्रूण की मृत्यु हो जाती है — यह तथ्य इस संकट की भयावहता को और उजागर करता है।
समुदाय तक पहुँचने की कोशिश
ओसीएचए ने ज़ोर देकर कहा कि समुदाय का भरोसा बहाल करना इस संकट से निपटने की पहली शर्त है। यूनिसेफ और उसके सहयोगी संगठनों ने डीआरसी के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अफ्रीका सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Africa CDC) के साथ मिलकर 13,000 से अधिक सामुदायिक कार्यकर्ताओं को तैनात किया है। ये कार्यकर्ता इबोला से बचाव और शुरुआती पहचान के संदेश लेकर 24 लाख से अधिक लोगों तक पहुँचे हैं और 5 लाख से ज़्यादा घरों का दौरा कर चुके हैं।
पड़ोसी दक्षिण सूडान में सतर्कता
पड़ोसी देश दक्षिण सूडान में अभी तक इबोला का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है, लेकिन डीआरसी से सटी सीमाओं के आर-पार लोगों की आवाजाही के कारण खतरा बना हुआ है। स्वास्थ्य सहयोगी संगठनों ने इस महीने दक्षिण सूडान के प्रवेश बिंदुओं पर 1,35,300 से अधिक यात्रियों की स्क्रीनिंग की है। इसके साथ ही स्क्रीनिंग, ट्राइएज, संक्रमण नियंत्रण, रेफरल और सुरक्षित अंतिम संस्कार के लिए 300 से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। डीआरसी की सीमा के निकट याम्बियो में 7 टन से अधिक आपातकालीन आपूर्ति पहले से संग्रहीत की जा चुकी है।
हालाँकि, सुरक्षा की बिगड़ती स्थिति राहत कार्यों में बड़ी बाधा बनी हुई है। जनवरी से जुलाई 2026 के बीच दक्षिण सूडान में मानवीय कार्यों में बाधा डालने वाली 451 घटनाएं दर्ज की गईं। येई-मोरोबो कॉरिडोर में पिछले साल जनवरी से मानवीय सहायता कर्मियों के 32 अपहरण की घटनाएं सामने आई हैं — जो इस क्षेत्र में काम करने की विकट चुनौतियों को रेखांकित करती हैं। आने वाले हफ्तों में प्रकोप की दिशा और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया की गति, इस मानवीय संकट की गहराई तय करेगी।