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पूर्वी डीआरसी में हिंसा और इबोला का दोहरा संकट: 2,950 मौतें, 15,000 विस्थापित — संयुक्त राष्ट्र

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पूर्वी डीआरसी में हिंसा और इबोला का दोहरा संकट: 2,950 मौतें, 15,000 विस्थापित — संयुक्त राष्ट्र

सारांश

डीआरसी दोहरी आपदा में फँसा है — इबोला से 2,950 मौतें और 6,100 संक्रमित, साथ ही सशस्त्र हिंसा से 15,000 से अधिक विस्थापित। संयुक्त राष्ट्र ने चेताया है कि पलायन की लहर बीमारी की निगरानी को असंभव बना रही है और राजनीतिक इच्छाशक्ति के बिना यह संकट और गहरा होगा।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार डीआरसी में इबोला से 2,950 मौतें और 6,100 से अधिक संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है।
इतूरी प्रांत के मंबासा में शनिवार को हुए सशस्त्र हमलों में 37 नागरिक मारे गए और 35 से अधिक का अपहरण हुआ।
साउथ किवु प्रांत के वालुंगु में 23 अगस्त से अब तक करीब 15,000 लोग विस्थापित हुए हैं।
IOM ने डीआरसी और पड़ोसी देशों में लगभग 2.3 करोड़ लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया।
UN के टॉम फ्लेचर ने WHO ब्रीफिंग में तत्काल राजनीतिक इच्छाशक्ति, पहुँच और संसाधनों की माँग की।

पूर्वी डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) इस समय दोहरी आपदा की चपेट में है — एक ओर सशस्त्र हिंसा के कारण बड़े पैमाने पर विस्थापन हो रहा है, तो दूसरी ओर इबोला वायरस का प्रकोप तेज़ी से फैल रहा है। संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) ने 2 सितंबर को चेतावनी दी कि लोगों की लगातार आवाजाही से बीमारी की निगरानी और राहत कार्य दोनों गंभीर रूप से बाधित हो रहे हैं।

मौतों और संक्रमण का भयावह आँकड़ा

राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, रविवार तक 2,950 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और 6,100 से अधिक लोग इबोला से संक्रमित पाए गए हैं। यह आँकड़े इस प्रकोप की गंभीरता को रेखांकित करते हैं, जो पहले से ही संघर्षग्रस्त क्षेत्र में और भी विकराल रूप ले रहा है।

OCHA के अनुसार, हिंसा के कारण लोग एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में पलायन कर रहे हैं, जिससे संक्रमित व्यक्तियों की पहचान और उनकी संपर्क-श्रृंखला को ट्रेस करना अत्यंत कठिन हो गया है।

मुख्य घटनाक्रम: हमले और विस्थापन

स्थानीय नागरिक समाज के सूत्रों के अनुसार, इतूरी प्रांत के मंबासा इलाके में शनिवार को हुए सशस्त्र हमलों में 37 नागरिक मारे गए और 35 से अधिक लोगों का अपहरण कर लिया गया। इससे पहले पिछले महीने हुई हिंसक घटनाओं में 86 आम नागरिकों की जान जा चुकी थी।

पड़ोसी साउथ किवु प्रांत के वालुंगु इलाके में 23 अगस्त से शुरू हुई हिंसक झड़पों के बाद अब तक करीब 15,000 लोग विस्थापित हो चुके हैं। इनमें से अधिकतर रिश्तेदारों या परिचितों के यहाँ शरण लिए हुए हैं, लेकिन उन्हें भोजन, आश्रय और स्वास्थ्य सेवाओं की सख्त ज़रूरत है। नॉर्थ किवु प्रांत के कुछ हिस्सों में भी सशस्त्र संघर्ष के कारण पलायन जारी है।

संयुक्त राष्ट्र की अपील और राहत प्रयास

OCHA ने स्पष्ट किया कि इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगी संगठन राहत कार्य जारी रखे हुए हैं। इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) ने बताया कि उसने डीआरसी और पड़ोसी देशों में लगभग 2.3 करोड़ लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया है, जिससे सीमा-पार संक्रमण के जोखिम को नियंत्रित करने में मदद मिली है।

संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और मानवीय सहायता पहुँचाने में बाधा न डालने की अपील दोहराई है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों और आपातकालीन राहत समन्वय के अवर-महासचिव टॉम फ्लेचर ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा आयोजित एक वर्चुअल ब्रीफिंग में कहा, 'हम ऐसी महामारी का धीरे-धीरे या टुकड़ों में जवाब नहीं दे सकते जो तेज़ी से फैल रही है।'

फ्लेचर ने ज़ोर देकर कहा कि प्रभावित लोगों को कार्यशील स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छ जल, साफ-सफाई, भोजन और सुरक्षा की आवश्यकता है — और सबसे बढ़कर, उन्हें भरोसे की ज़रूरत है। उन्होंने कहा, 'समय हमारे पक्ष में नहीं है। हमारे पास अनुभव, साधन और ऐसे असाधारण लोग हैं जो इस महामारी को रोकने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। अब हमें राजनीतिक इच्छाशक्ति, पहुँच और संसाधनों की ज़रूरत है। हमने पहले भी इबोला को हराया है और हम ऐसा फिर से कर सकते हैं।'

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब डीआरसी में सशस्त्र समूहों और सरकारी बलों के बीच संघर्ष वर्षों से जारी है, जिसने पहले भी इबोला-रोधी अभियानों को बाधित किया है। गौरतलब है कि डीआरसी ने अतीत में कई इबोला प्रकोपों का सामना किया है, लेकिन हिंसा और स्वास्थ्य संकट का यह एक साथ आना राहत एजेंसियों के लिए असाधारण चुनौती बन गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से निरंतर वित्तीय और राजनीतिक समर्थन के बिना स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब हिंसा ने टीकाकरण अभियानों को बाधित किया था। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया अब तक टुकड़ों में रही है, जबकि 2.3 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग जैसे आँकड़े प्रभावशाली लगते हैं पर ज़मीनी पहुँच के बिना अर्थहीन हैं। असली सवाल यह है कि क्या वैश्विक दानदाता इस बार वित्तपोषण को राजनीतिक समाधान से जोड़ेंगे — या फिर केवल स्वास्थ्य संकट को अलग-थलग देखकर हिंसा की जड़ों को अनदेखा करेंगे।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीआरसी में इबोला की मौजूदा स्थिति कितनी गंभीर है?
राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार रविवार तक 2,950 लोगों की मौत और 6,100 से अधिक संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। पूर्वी डीआरसी में जारी सशस्त्र हिंसा और विस्थापन के कारण बीमारी की निगरानी और नियंत्रण दोनों बेहद कठिन हो गए हैं।
इबोला प्रकोप से निपटने में हिंसा किस तरह बाधा बन रही है?
हिंसा के कारण लोग एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में पलायन कर रहे हैं, जिससे संक्रमितों की संपर्क-श्रृंखला ट्रेस करना और टीकाकरण अभियान चलाना दोनों मुश्किल हो गए हैं। OCHA के अनुसार इस आवाजाही से सीमा-पार संक्रमण का जोखिम भी बढ़ गया है।
इतूरी और साउथ किवु में क्या हुआ?
स्थानीय नागरिक समाज के सूत्रों के अनुसार इतूरी प्रांत के मंबासा इलाके में शनिवार को हुए सशस्त्र हमलों में 37 नागरिक मारे गए और 35 से अधिक का अपहरण हुआ। साउथ किवु के वालुंगु इलाके में 23 अगस्त से अब तक करीब 15,000 लोग विस्थापित हो चुके हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने इस संकट पर क्या कहा?
UN के अवर-महासचिव टॉम फ्लेचर ने WHO की वर्चुअल ब्रीफिंग में कहा कि तेज़ी से फैलती महामारी का धीमा या टुकड़ों में जवाब पर्याप्त नहीं है। उन्होंने राजनीतिक इच्छाशक्ति, पहुँच और संसाधनों की तत्काल ज़रूरत पर बल दिया।
IOM ने डीआरसी संकट में क्या भूमिका निभाई है?
इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) ने डीआरसी और पड़ोसी देशों में लगभग 2.3 करोड़ लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया है। इससे लोगों की आवाजाही पर नज़र रखने, संभावित मामलों की पहचान करने और सीमा-पार संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद मिली है।
राष्ट्र प्रेस
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