FSUI ने अमेरिकी हमलों में मारे गए भारतीय नाविकों के लिए ट्रंप और भारत सरकार से ₹1 करोड़ मुआवजे की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) के महासचिव मनोज यादव ने 15 जून 2026 को अमेरिकी हमलों में जान गंवाने वाले भारतीय नाविकों के परिवारों के लिए भारत सरकार और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ₹1 करोड़ प्रति परिवार मुआवजे की माँग की है। यह माँग ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का ऐलान किया गया है, लेकिन इस संघर्ष में तीन भारतीय नाविक अपनी जान गँवा चुके हैं।
मुआवजे की माँग और पृष्ठभूमि
मनोज यादव ने कहा, 'हम नाविकों की तरफ से इस शांति समझौते का स्वागत करते हैं। आज सुबह मीडिया में इसकी जानकारी दी गई और ईरान के उप विदेश मंत्री ने इसका समर्थन किया। अगर यह समझौता सच होता है तो हम बधाई देना चाहेंगे, क्योंकि अभी हजारों भारतीय नाविक वहाँ फँसे हुए हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि पिछले हफ्ते कई ऐसी घटनाएँ सामने आईं जिनमें भारतीय नाविकों और जहाजों पर हमला किया गया।
यादव ने स्पष्ट किया कि इन नाविकों की मौत युद्ध में भागीदारी के कारण नहीं, बल्कि उन हालात में हुई जिनके लिए कथित तौर पर अमेरिका जिम्मेदार है। उन्होंने कहा, 'इन नाविकों ने लड़ाई में शामिल न होने के बावजूद अपनी जान गँवा दी।' FSUI ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर यह भी अपील की है कि प्रत्येक प्रभावित परिवार को पाँच मिलियन डॉलर का मुआवजा दिया जाए।
MT सेलेस्टियल के अधिकारी निशांत उर्थनाथन की मौत
FSUI ने इससे पहले 35 वर्षीय निशांत उर्थनाथन की मौत की जानकारी साझा की थी। जहाज MT सेलेस्टियल के दूसरे अधिकारी की 11 जून को शाम 6 बजे समय पर चिकित्सा सहायता न मिल पाने के कारण मौत हो गई। यूनियन के अनुसार, मौत के दो दिन बाद भी पार्थिव शरीर जहाज पर ही था।
FSUI ने बताया कि ओमान के पोर्ट दुकम ने वाई-फाई और संचार सेवाएँ बंद कर दी थीं और अधिकारी कोई जवाब नहीं दे रहे थे। यूनियन ने सवाल उठाया कि जो नाविक दुनियाभर का व्यापार चलाते हैं, उन्हें उन संघर्षों में चिकित्सा देखभाल और वापसी से वंचित किया जा रहा है जिनसे उनका कोई लेना-देना नहीं।
होर्मुज स्ट्रेट संकट और भारतीय नाविकों पर असर
फरवरी 2026 से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का केंद्र होर्मुज स्ट्रेट रहा, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है। इस संघर्ष में हजारों भारतीय नाविक व्यावसायिक जहाजों पर तैनात थे और सीधे खतरे में आ गए। यह ऐसे समय में हुआ जब भारतीय मर्चेंट नेवी के लाखों नाविक वैश्विक समुद्री व्यापार में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
FSUI की भूमिका और माँगें
FSUI भारतीय नाविकों और मर्चेंट नेवी कर्मचारियों के अधिकारों के लिए काम करने वाला देश का सबसे बड़ा और पुराना व्यापार संघ है। यूनियन ने दोनों सरकारों — भारत और अमेरिका — से तीन मृत नाविकों के परिवारों को ₹1 करोड़ प्रति परिवार मुआवजा देने की माँग की है। साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से 5 मिलियन डॉलर प्रति परिवार की अपील भी की गई है।
आगे क्या होगा
अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद अब भारत सरकार पर दबाव है कि वह फँसे हुए नाविकों की सुरक्षित वापसी और मृत नाविकों के परिवारों को उचित मुआवजा सुनिश्चित करे। FSUI ने स्पष्ट किया है कि यदि माँगें नहीं मानी गईं तो वह आगे की कार्रवाई के लिए तैयार है।