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FSUI ने अमेरिकी हमलों में मारे गए भारतीय नाविकों के लिए ट्रंप और भारत सरकार से ₹1 करोड़ मुआवजे की मांग की

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FSUI ने अमेरिकी हमलों में मारे गए भारतीय नाविकों के लिए ट्रंप और भारत सरकार से ₹1 करोड़ मुआवजे की मांग की

सारांश

अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बावजूद तीन भारतीय नाविकों की जान जा चुकी है। FSUI ने ट्रंप और भारत सरकार से ₹1 करोड़ प्रति परिवार मुआवजे की माँग की है — यह उन नाविकों के लिए न्याय की लड़ाई है जो किसी और की जंग में मारे गए।

मुख्य बातें

FSUI महासचिव मनोज यादव ने भारत सरकार और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मारे गए नाविकों के परिवारों को ₹1 करोड़ मुआवजा देने की माँग की।
अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविक मारे गए; हजारों अभी भी प्रभावित क्षेत्र में फँसे हुए हैं।
MT सेलेस्टियल के दूसरे अधिकारी निशांत उर्थनाथन (35 वर्ष) की 11 जून को समय पर चिकित्सा न मिलने से मौत हुई।
ओमान के पोर्ट दुकम ने संचार सेवाएँ बंद कर दीं, पार्थिव शरीर दो दिन तक जहाज पर रहा।
FSUI ने एक्स पर पोस्ट कर प्रत्येक प्रभावित परिवार को 5 मिलियन डॉलर मुआवजे की अपील की।
FSUI भारत का सबसे बड़ा और पुराना मर्चेंट नेवी व्यापार संघ है।

फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) के महासचिव मनोज यादव ने 15 जून 2026 को अमेरिकी हमलों में जान गंवाने वाले भारतीय नाविकों के परिवारों के लिए भारत सरकार और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ₹1 करोड़ प्रति परिवार मुआवजे की माँग की है। यह माँग ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का ऐलान किया गया है, लेकिन इस संघर्ष में तीन भारतीय नाविक अपनी जान गँवा चुके हैं।

मुआवजे की माँग और पृष्ठभूमि

मनोज यादव ने कहा, 'हम नाविकों की तरफ से इस शांति समझौते का स्वागत करते हैं। आज सुबह मीडिया में इसकी जानकारी दी गई और ईरान के उप विदेश मंत्री ने इसका समर्थन किया। अगर यह समझौता सच होता है तो हम बधाई देना चाहेंगे, क्योंकि अभी हजारों भारतीय नाविक वहाँ फँसे हुए हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि पिछले हफ्ते कई ऐसी घटनाएँ सामने आईं जिनमें भारतीय नाविकों और जहाजों पर हमला किया गया।

यादव ने स्पष्ट किया कि इन नाविकों की मौत युद्ध में भागीदारी के कारण नहीं, बल्कि उन हालात में हुई जिनके लिए कथित तौर पर अमेरिका जिम्मेदार है। उन्होंने कहा, 'इन नाविकों ने लड़ाई में शामिल न होने के बावजूद अपनी जान गँवा दी।' FSUI ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर यह भी अपील की है कि प्रत्येक प्रभावित परिवार को पाँच मिलियन डॉलर का मुआवजा दिया जाए।

MT सेलेस्टियल के अधिकारी निशांत उर्थनाथन की मौत

FSUI ने इससे पहले 35 वर्षीय निशांत उर्थनाथन की मौत की जानकारी साझा की थी। जहाज MT सेलेस्टियल के दूसरे अधिकारी की 11 जून को शाम 6 बजे समय पर चिकित्सा सहायता न मिल पाने के कारण मौत हो गई। यूनियन के अनुसार, मौत के दो दिन बाद भी पार्थिव शरीर जहाज पर ही था।

FSUI ने बताया कि ओमान के पोर्ट दुकम ने वाई-फाई और संचार सेवाएँ बंद कर दी थीं और अधिकारी कोई जवाब नहीं दे रहे थे। यूनियन ने सवाल उठाया कि जो नाविक दुनियाभर का व्यापार चलाते हैं, उन्हें उन संघर्षों में चिकित्सा देखभाल और वापसी से वंचित किया जा रहा है जिनसे उनका कोई लेना-देना नहीं।

होर्मुज स्ट्रेट संकट और भारतीय नाविकों पर असर

फरवरी 2026 से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का केंद्र होर्मुज स्ट्रेट रहा, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है। इस संघर्ष में हजारों भारतीय नाविक व्यावसायिक जहाजों पर तैनात थे और सीधे खतरे में आ गए। यह ऐसे समय में हुआ जब भारतीय मर्चेंट नेवी के लाखों नाविक वैश्विक समुद्री व्यापार में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

FSUI की भूमिका और माँगें

FSUI भारतीय नाविकों और मर्चेंट नेवी कर्मचारियों के अधिकारों के लिए काम करने वाला देश का सबसे बड़ा और पुराना व्यापार संघ है। यूनियन ने दोनों सरकारों — भारत और अमेरिका — से तीन मृत नाविकों के परिवारों को ₹1 करोड़ प्रति परिवार मुआवजा देने की माँग की है। साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से 5 मिलियन डॉलर प्रति परिवार की अपील भी की गई है।

आगे क्या होगा

अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद अब भारत सरकार पर दबाव है कि वह फँसे हुए नाविकों की सुरक्षित वापसी और मृत नाविकों के परिवारों को उचित मुआवजा सुनिश्चित करे। FSUI ने स्पष्ट किया है कि यदि माँगें नहीं मानी गईं तो वह आगे की कार्रवाई के लिए तैयार है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब राजनयिक स्तर पर कोई ठोस हस्तक्षेप नहीं दिखा। FSUI की माँग न्यायसंगत है, लेकिन असली सवाल यह है कि भारत अपने समुद्री कार्यबल की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कब आवाज उठाएगा — मुआवजे के बाद नहीं, बल्कि संकट के दौरान।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

FSUI ने किसके लिए और कितने मुआवजे की माँग की है?
FSUI ने अमेरिकी हमलों में मारे गए तीन भारतीय नाविकों के परिवारों के लिए भारत सरकार और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से ₹1 करोड़ प्रति परिवार मुआवजे की माँग की है। इसके अलावा, एक्स पर पोस्ट कर 5 मिलियन डॉलर प्रति परिवार की अपील भी की गई है।
होर्मुज स्ट्रेट संकट में भारतीय नाविकों पर क्या असर पड़ा?
फरवरी 2026 से अमेरिका-ईरान तनाव के चलते होर्मुज स्ट्रेट में तैनात हजारों भारतीय नाविक खतरे में आ गए। पिछले हफ्ते कई घटनाओं में भारतीय जहाजों और नाविकों पर हमले हुए, जिनमें तीन नाविकों की मौत हुई।
MT सेलेस्टियल के अधिकारी निशांत उर्थनाथन की मौत कैसे हुई?
35 वर्षीय निशांत उर्थनाथन MT सेलेस्टियल जहाज के दूसरे अधिकारी थे, जिनकी 11 जून को शाम 6 बजे समय पर चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण मौत हो गई। ओमान के पोर्ट दुकम ने संचार सेवाएँ बंद कर दी थीं और मौत के दो दिन बाद भी पार्थिव शरीर जहाज पर ही था।
FSUI क्या है और इसकी क्या भूमिका है?
फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) भारत का सबसे बड़ा और पुराना व्यापार संघ है जो भारतीय नाविकों और मर्चेंट नेवी कर्मचारियों के अधिकारों के लिए काम करता है। इस संकट में FSUI ने मृत नाविकों के परिवारों के लिए मुआवजे और फँसे नाविकों की सुरक्षित वापसी की माँग उठाई है।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद भारतीय नाविकों की स्थिति क्या है?
शांति समझौते के ऐलान के बाद FSUI ने इसका स्वागत किया है, लेकिन मृत नाविकों के परिवारों के लिए मुआवजे की माँग जारी रखी है। हजारों भारतीय नाविक अभी भी प्रभावित क्षेत्र में हैं और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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