किरेन रिजिजू ने जेद्दा की 'अल-रहमा मस्जिद' का दौरा किया, हज 2027 समझौते के लिए सऊदी अरब में
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय संसदीय एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू 7 नवंबर 2026 को सऊदी अरब के दौरे पर हैं। इस यात्रा के दौरान उन्होंने जेद्दा स्थित ऐतिहासिक अल-रहमा मस्जिद का दौरा किया, जिसे 'फ्लोटिंग मस्जिद' यानी 'तैरती हुई मस्जिद' के नाम से भी जाना जाता है। यह मस्जिद लाल सागर (रेड सी) के तट पर स्थित है और सऊदी अरब की समृद्ध इस्लामी विरासत एवं वास्तुशिल्प का प्रतीक मानी जाती है।
मस्जिद दौरे की झलक
रिजिजू ने शनिवार को एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'मैंने जेद्दा में ऐतिहासिक अल-रहमा मस्जिद का दौरा किया, जिसे 'फ्लोटिंग मस्जिद' के नाम से भी जाना जाता है। यह खूबसूरत लाल सागर के तट पर स्थित है। यह आध्यात्मिक महत्व और वास्तुकला की सुंदरता का एक अद्भुत स्थान है, जो सऊदी अरब की समृद्ध इस्लामी विरासत को दर्शाता है।' यह दौरा उनकी व्यापक राजनयिक यात्रा का एक हिस्सा था।
हज सम्मेलन और द्विपक्षीय समझौता
रिजिजू शुक्रवार को 'छठे हज सम्मेलन और प्रदर्शनी 2027' में भाग लेने के लिए जेद्दा पहुँचे। उनके एजेंडे में सऊदी अरब के साथ द्विपक्षीय हज समझौते पर हस्ताक्षर करना और हज 2027 की तैयारियों की समीक्षा करना शामिल है, ताकि अगले साल भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए सुगम, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा सुनिश्चित की जा सके।
मंत्री ने पोस्ट में यह भी बताया कि जेद्दा में भारत के महावाणिज्य दूत (कॉन्सुल जनरल) फहद सूरी ने हवाई अड्डे पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। गौरतलब है कि यह यात्रा भारत-सऊदी अरब के बीच हज-समन्वय की एक सुस्थापित प्रक्रिया का हिस्सा है, जो हर साल औपचारिक समझौते के ज़रिए नवीनीकृत होती है।
पिछले महीने हुई समीक्षा बैठक
4 अक्टूबर 2026 को सऊदी अरब में भारत के राजदूत विपुल ने, कॉन्सुल जनरल फहद सूरी और कॉन्सुल (हज) सदफ चौधरी के साथ मिलकर, सऊदी अरब के हज और उमरा उप-मंत्री डॉ. अब्दुलफत्ताह बिन सुलेमान अल-मशात और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने हज 2027 की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की और भारतीय हज मिशन तथा सऊदी हज एवं उमराह मंत्रालय के बीच निरंतर समन्वय पर जोर दिया।
हज टर्मिनल और हाई-स्पीड रेल का निरीक्षण
तैयारियों के तहत राजदूत विपुल ने जेद्दा हवाई अड्डे के हज टर्मिनल और हरमैन हाई-स्पीड रेलवे स्टेशन का भी दौरा किया। हज कमेटी ऑफ इंडिया के माध्यम से यात्रा करने वाले 1 लाख से अधिक भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए ये दोनों स्थल हज के दौरान आगमन और आगे की यात्रा के प्रमुख केंद्र हैं। राजदूत ने सुविधाओं, बुनियादी ढाँचे और परिचालन व्यवस्थाओं का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा की।
आगे क्या होगा
रिजिजू की इस यात्रा के दौरान हज 2027 के लिए द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है, जो लाखों भारतीय तीर्थयात्रियों के हज कोटे, सेवाओं और लॉजिस्टिक्स को औपचारिक रूप देगा। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब हज 2027 की तैयारियाँ तेज़ी पकड़ रही हैं और दोनों देश प्रशासनिक ढाँचे को और मज़बूत बनाने पर काम कर रहे हैं।