पीओके हिंसा पर पाकिस्तानी नेता प्रतिपक्ष अचकजई की चेतावनी: '18 मौतें जलियांवाला बाग जैसी'
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में नेता प्रतिपक्ष महमूद खान अचकजई ने पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (पीओके) में सुरक्षाबलों की कार्रवाई में 18 लोगों की मौत को जलियांवाला बाग नरसंहार से तुलना करते हुए पाकिस्तान सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। 29 जून की रात हुई प्रेस ब्रीफिंग में उन्होंने कहा कि निहत्थे नागरिकों पर यह कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।
अचकजई का बयान और जलियांवाला बाग की तुलना
अचकजई ने 29 जून की प्रेस ब्रीफिंग में सरकार को सीधे संबोधित करते हुए कहा, 'आपने संवेदनशील क्षेत्र में 18 लोगों की जान ले ली। अगर अब और लोगों को मारना चाहते हैं, तो मार दीजिए। फिर यह एक और जलियांवाला बाग होगा। उसके बाद जनरल डायर का अंजाम भी याद रखिए।' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सौ साल बाद जब महारानी एलिजाबेथ भारत आई थीं, तब भारत सरकार ने जलियांवाला बाग हत्याकांड के लिए माफी माँगने को कहा था।
पीओके में हिंसा की पृष्ठभूमि
पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में महीनों से लोग अपने अधिकारों को लेकर आंदोलनरत हैं। अचकजई के अनुसार, 'यहाँ के लोग ऐसे नहीं थे जो चाकू, खंजर या बंदूक उठाते। आखिर उन्हें इस हद तक पहुँचने के लिए क्यों मजबूर किया गया?' उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाई गईं, जिसमें कम से कम 11 से अधिक लोगों की जान गई — हालाँकि उनके बयान में कुल मृतकों की संख्या 18 भी बताई गई है।
डॉ. यास्मीन राशिद को 280 साल की सजा
अचकजई ने कोट लखपत जेल (लाहौर) में बंद 70 वर्षीय राजनेता और पाकिस्तान की पूर्व पंजाब स्वास्थ्य मंत्री डॉ. यास्मीन राशिद का मामला भी उठाया। हिंसक प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में उन्हें 280 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। अचकजई ने कहा, 'अगर हिम्मत है तो हमें भी जेल भेज दीजिए।'
भ्रष्टाचार और लोकतंत्र पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने पाकिस्तान में व्याप्त भ्रष्टाचार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'जो लोग संसदों की खरीद-फरोख्त करते हैं, वे पाकिस्तान के नायक बन जाते हैं, जबकि जो लोकतांत्रिक पाकिस्तान चाहते हैं, आप उनके खिलाफ खड़े हो जाते हैं।' उन्होंने सरकार से सीधे पूछा, 'आप चुनावों और विधानसभा की खरीद-फरोख्त को गलत नहीं मानते, लेकिन जो लोग इसका विरोध करते हैं, उन्हें गद्दार करार देते हैं। क्या आपकी सोच पर पर्दा पड़ गया है?'
विभिन्न संगठनों की अपील
अचकजई ने दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विभिन्न संगठनों ने उनसे संपर्क कर कहा, 'भाई, हमारे और सरकार के बीच खड़े हो जाइए।' यह बयान दर्शाता है कि पाकिस्तान में विपक्षी खेमे के भीतर भी पीओके हिंसा को लेकर गहरी बेचैनी है। आने वाले दिनों में पाकिस्तानी संसद में इस मुद्दे पर और अधिक तीखी बहस की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।