22 जुलाई 2026
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शिक्षा मंत्री पर अखिलेश यादव का बड़ा हमला: 'क्या दबे राज हैं जो सरकार हटाने से डर रही है?'

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शिक्षा मंत्री पर अखिलेश यादव का बड़ा हमला: 'क्या दबे राज हैं जो सरकार हटाने से डर रही है?'

सारांश

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने खुलकर पूछा — शिक्षा मंत्री के पास आखिर कौन से 'दबे राज' हैं जो सरकार उन्हें हटाने से कतरा रही है? लोकसभा में काले कपड़ों में विरोध, जंतर-मंतर पर छात्रों पर कथित बल प्रयोग और 20 जुलाई को 'काला दिन' — विपक्ष ने सरकार को चौतरफा घेरा।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव ने 22 जुलाई को आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री के पास सरकार के 'दबे राज' हो सकते हैं, इसीलिए उन्हें नहीं हटाया जा रहा।
सपा सांसदों ने लोकसभा में काले कपड़े पहनकर छात्रों के समर्थन में प्रतीकात्मक विरोध किया।
सपा सांसद डिंपल यादव ने जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने 20 जुलाई को छात्रों पर कार्रवाई को 'काला दिन' कहा, हजारों छात्र प्रभावित बताए।
JMM सांसद महुआ माझी ने कहा कि छात्रों की समस्याएँ बातचीत से पहले ही सुलझाई जा सकती थीं।

समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 22 जुलाई को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए सवाल किया कि शिक्षा मंत्री को पद से क्यों नहीं हटाया जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसी दबाव में है और संभव है कि मंत्री के पास सरकार से जुड़े ऐसे रहस्य हों, जिनकी वजह से उन्हें हटाना संभव नहीं हो पा रहा। अखिलेश यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 'सरकार डरी हुई है।'

लोकसभा में काले कपड़े पहनकर सपा का विरोध

सपा सांसदों ने बुधवार, 22 जुलाई को लोकसभा में काले कपड़े पहनकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया। सांसदों का कहना था कि सरकार छात्रों की आवाज़ अनसुनी कर रही है और जिस तरह से छात्रों के साथ व्यवहार किया जा रहा है, वह देश के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

डिंपल यादव: लोकतंत्र में विरोध का अधिकार

सपा सांसद डिंपल यादव ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा कि छात्रों ने साहस के साथ अपनी बात रखी, लेकिन पुलिस की कार्रवाई चिंताजनक रही। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 'राम राज्य' के दावे पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और बल प्रयोग उसी व्यवस्था का हिस्सा है।

डिंपल यादव ने कहा कि लोकतंत्र की असली पहचान इसी में है कि नागरिक बिना भय के अपनी बात रख सकें और विरोध कर सकें। उनके अनुसार, छात्रों पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के सीधे विरुद्ध है।

धर्मेंद्र यादव: 20 जुलाई को 'काला दिन' बताया

सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने 20 जुलाई को छात्रों पर हुई कार्रवाई को 'काला दिन' करार दिया और कहा कि इस घटना में हजारों छात्र प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि विपक्ष छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक अलग-अलग मंचों पर उनकी आवाज़ उठाई जाती रहेगी।

धर्मेंद्र यादव ने किसान आंदोलन का उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि लंबे संघर्ष के बाद सरकार को तीनों कृषि कानून वापस लेने पड़े थे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का भरोसा सर्वोपरि है और सरकार को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।

जेएमएम सांसद महुआ माझी की प्रतिक्रिया

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) सांसद महुआ माझी ने कहा कि यदि उद्देश्य सही हो तो लोकतांत्रिक विरोध के तरीके को गलत नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों की समस्याओं को समय रहते बातचीत के ज़रिए सुलझाया जा सकता था।

आगे क्या होगा

विपक्षी दलों के इस संयुक्त विरोध के बाद संसद में शिक्षा मंत्री को हटाने की माँग और तेज़ होने के संकेत हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब छात्र आंदोलन को लेकर सत्तापक्ष पहले से ही दबाव में है। विपक्ष का कहना है कि जब तक छात्रों की ठोस माँगों पर सरकार कोई कदम नहीं उठाती, यह मुद्दा संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह गूँजता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे साबित करने का भार विपक्ष पर ही है — बिना ठोस साक्ष्य के यह आरोप महज़ अटकल बनकर रह सकता है। असली मुद्दा यह है कि छात्र आंदोलन पर सरकार की चुप्पी और कथित बल प्रयोग ने विपक्ष को एक मज़बूत नैतिक ज़मीन दे दी है। किसान आंदोलन का हवाला देना विपक्ष की रणनीति को उजागर करता है — वे इसे लंबा खींचकर सरकार को झुकाना चाहते हैं। लेकिन जब तक छात्रों की माँगें सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं होतीं और सरकार उन पर कोई ठोस जवाब नहीं देती, यह बहस संसद की सीमाओं से बाहर निकलकर व्यापक जनांदोलन का रूप ले सकती है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश यादव ने शिक्षा मंत्री पर क्या आरोप लगाए?
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री के पास सरकार से जुड़े कुछ 'दबे राज' हो सकते हैं, जिनकी वजह से सरकार उन्हें पद से हटाने में असमर्थ है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी दबाव में है और वह 'डरी हुई' नज़र आ रही है।
सपा सांसदों ने लोकसभा में काले कपड़े क्यों पहने?
सपा सांसदों ने 22 जुलाई को लोकसभा में काले कपड़े पहनकर छात्रों के समर्थन में प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि सरकार छात्रों की बात नहीं सुन रही और उनके साथ किया जा रहा व्यवहार देश के लिए उचित नहीं है।
20 जुलाई को छात्रों पर क्या हुआ जिसे 'काला दिन' कहा गया?
सपा सांसद धर्मेंद्र यादव के अनुसार, 20 जुलाई को छात्रों पर की गई कार्रवाई में हजारों छात्र प्रभावित हुए। डिंपल यादव ने जंतर-मंतर पर छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल का उल्लेख किया, जिसे विपक्ष ने लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताया।
JMM सांसद महुआ माझी ने इस मुद्दे पर क्या कहा?
महुआ माझी ने कहा कि यदि उद्देश्य सही हो तो लोकतांत्रिक विरोध को गलत नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों की समस्याओं को समय रहते बातचीत के ज़रिए पहले ही सुलझाया जा सकता था।
विपक्ष आगे क्या करने की योजना बना रहा है?
धर्मेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि जब तक छात्रों की माँगों का समाधान नहीं होता, विपक्ष अलग-अलग मंचों पर उनकी आवाज़ उठाता रहेगा। उन्होंने किसान आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि लंबे संघर्ष के बाद सरकार को कृषि कानून वापस लेने पड़े थे।
राष्ट्र प्रेस
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