शिक्षा मंत्री पर अखिलेश यादव का बड़ा हमला: 'क्या दबे राज हैं जो सरकार हटाने से डर रही है?'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 22 जुलाई को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए सवाल किया कि शिक्षा मंत्री को पद से क्यों नहीं हटाया जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसी दबाव में है और संभव है कि मंत्री के पास सरकार से जुड़े ऐसे रहस्य हों, जिनकी वजह से उन्हें हटाना संभव नहीं हो पा रहा। अखिलेश यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 'सरकार डरी हुई है।'
लोकसभा में काले कपड़े पहनकर सपा का विरोध
सपा सांसदों ने बुधवार, 22 जुलाई को लोकसभा में काले कपड़े पहनकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया। सांसदों का कहना था कि सरकार छात्रों की आवाज़ अनसुनी कर रही है और जिस तरह से छात्रों के साथ व्यवहार किया जा रहा है, वह देश के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
डिंपल यादव: लोकतंत्र में विरोध का अधिकार
सपा सांसद डिंपल यादव ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा कि छात्रों ने साहस के साथ अपनी बात रखी, लेकिन पुलिस की कार्रवाई चिंताजनक रही। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 'राम राज्य' के दावे पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और बल प्रयोग उसी व्यवस्था का हिस्सा है।
डिंपल यादव ने कहा कि लोकतंत्र की असली पहचान इसी में है कि नागरिक बिना भय के अपनी बात रख सकें और विरोध कर सकें। उनके अनुसार, छात्रों पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के सीधे विरुद्ध है।
धर्मेंद्र यादव: 20 जुलाई को 'काला दिन' बताया
सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने 20 जुलाई को छात्रों पर हुई कार्रवाई को 'काला दिन' करार दिया और कहा कि इस घटना में हजारों छात्र प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि विपक्ष छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक अलग-अलग मंचों पर उनकी आवाज़ उठाई जाती रहेगी।
धर्मेंद्र यादव ने किसान आंदोलन का उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि लंबे संघर्ष के बाद सरकार को तीनों कृषि कानून वापस लेने पड़े थे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का भरोसा सर्वोपरि है और सरकार को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
जेएमएम सांसद महुआ माझी की प्रतिक्रिया
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) सांसद महुआ माझी ने कहा कि यदि उद्देश्य सही हो तो लोकतांत्रिक विरोध के तरीके को गलत नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों की समस्याओं को समय रहते बातचीत के ज़रिए सुलझाया जा सकता था।
आगे क्या होगा
विपक्षी दलों के इस संयुक्त विरोध के बाद संसद में शिक्षा मंत्री को हटाने की माँग और तेज़ होने के संकेत हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब छात्र आंदोलन को लेकर सत्तापक्ष पहले से ही दबाव में है। विपक्ष का कहना है कि जब तक छात्रों की ठोस माँगों पर सरकार कोई कदम नहीं उठाती, यह मुद्दा संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह गूँजता रहेगा।