बिस्मिल्लाह खान के पैतृक मकान पर विवाद: परिवार बोला — उस्ताद का कमरा बनेगा संग्रहालय, आरोप निराधार
सारांश
मुख्य बातें
वाराणसी में भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के पैतृक मकान के पुनर्निर्माण को लेकर उठे विवाद पर परिवार ने 7 नवंबर 2026 को स्पष्ट रुख अपनाते हुए विपक्षी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। परिवार के सदस्यों ने कहा कि लगभग 100 साल पुराना जर्जर ढाँचा परिवार की सहमति और प्रशासनिक अनुमतियों के साथ दोबारा बनाया जा रहा है, तथा जिस कमरे में शहनाई के उस्ताद निवास करते थे, उसे संग्रहालय के रूप में संरक्षित किया जाएगा।
परिवार का पक्ष: जबरदस्ती का कोई सवाल नहीं
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के परपोते ने आरोपों पर सीधी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'ऐसा कुछ नहीं है। कोई जबरदस्ती नहीं हुई है। यह सब गलत बातें फैलाई जा रही हैं। हमने देखा है कि लोग बढ़-चढ़कर पोस्ट कर रहे हैं लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। यह पारिवारिक मामला है। पूरा परिवार मिलकर इसका निर्माण करा रहा है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन की निगरानी में यह निर्माण कार्य हो रहा है और सभी आवश्यक अनुमतियाँ प्राप्त हो चुकी हैं।
क्यों हो रहा है पुनर्निर्माण
उस्ताद के पोते मोहम्मद सिब्तैन ने बताया कि यह मकान लगभग 1920 के आसपास बना था और काफी जर्जर हालत में आ चुका था। उन्होंने कहा, 'यह मकान काफी जर्जर हालत में था। कभी भी कोई हादसा हो सकता था। इसलिए परिवार के सभी सदस्यों ने मिलकर इसके पुनर्निर्माण का फैसला किया है।' उन्होंने पुलिस और सरकार पर किसी भी प्रकार के दबाव से साफ इनकार किया।
संग्रहालय का स्वरूप: उस्ताद का कमरा होगा केंद्रबिंदु
परिवार ने बताया कि पूरे घर को संग्रहालय नहीं बनाया जा रहा है, बल्कि उस्ताद का जो कमरा था, उसका पुनर्निर्माण कर उसे संग्रहालय का रूप दिया जाएगा। इस कमरे में उनके उपयोग की वस्तुएँ, दुर्लभ तस्वीरें और अन्य स्मृतियाँ सुरक्षित रखी जाएंगी, ताकि दूर-दूर से आने वाले पर्यटक और संगीत-प्रेमी उन्हें देख सकें। मोहम्मद सिब्तैन ने कहा, 'अपनी श्रद्धा और स्मृति के रूप में हम इसे संग्रहालय के रूप में स्थापित करना चाहते हैं, ताकि उनकी याद हमेशा बनी रहे और आने वाली पीढ़ियाँ भी उन्हें याद रख सकें।'
विरोधियों के आरोप और परिवार की सफाई
गौरतलब है कि विपक्ष के कुछ नेताओं और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इस निर्माण कार्य को लेकर आरोप लगाए थे कि पैतृक मकान को बिना परिवार की सहमति के तोड़ा जा रहा है। परिवार ने इन सभी दावों को 'पूरी तरह गलत' बताया। परपोते ने कहा, 'कुछ लोग इसे बेवजह मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं जबकि ऐसी कोई बात नहीं है। इससे हमें कोई दिक्कत नहीं है।' यह ऐसे समय में आया है जब विरासत-संरक्षण और पुनर्निर्माण के बीच की रेखा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है।
आगे की राह
परिवार के अनुसार संग्रहालय का पूरा स्वरूप अभी तय नहीं हुआ है। मोहम्मद सिब्तैन ने बताया कि काम शुरू हो चुका है और धीरे-धीरे आगे की जानकारी सामने आएगी। संग्रहालय के साथ-साथ परिवार के रहने की व्यवस्था भी उसी परिसर में होगी। उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की विरासत को जीवित रखने का यह प्रयास वाराणसी के सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई दिशा दे सकता है।