दिल्ली पैलेट गन ऑर्डर पर सुप्रिया सुले का सवाल: SIT गठन और PM केयर्स पारदर्शिता की मांग
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने 21 अगस्त को मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए केंद्र सरकार और महाराष्ट्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर एक साथ कई मोर्चों पर सवाल दागे। उन्होंने दिल्ली में 20 जुलाई को हुए लाठीचार्ज की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की माँग एक बार फिर दोहराई और सरकार से पूछा कि पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया।
पैलेट गन और SIT जांच की मांग
सुप्रिया सुले ने कहा कि इंडिया अलायंस पहले दिन से ही SIT गठन की माँग करता आ रहा है। उनके अनुसार, यदि सरकार ने यह माँग समय रहते मान ली होती, तो संसद में इस विषय पर सार्थक बहस संभव होती। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश को यह जानने का अधिकार है कि पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया और सरकार को इस सवाल का जवाब देना होगा।
गौरतलब है कि 20 जुलाई को दिल्ली में हुई लाठीचार्ज की घटना ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया था, जिसके बाद विपक्ष सरकार पर जवाबदेही तय करने का दबाव बनाता आ रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब संसद सत्र में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
PM केयर्स फंड पर पारदर्शिता की माँग
सुले ने पीएम केयर्स फंड की स्थापना के समय से ही इसके वित्तीय स्रोतों को सार्वजनिक करने की माँग की है। उन्होंने सवाल किया कि इस फंड में आए धन के बारे में छिपाने जैसा क्या है और सरकार को पूरी जानकारी जनता के सामने रखनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने एक मंदिर में हुई कथित चोरी का उल्लेख करते हुए कहा कि जब घटना के वीडियो कई चैनलों पर प्रसारित हुए, तो संबंधित लोगों को क्लीन चिट कैसे दी गई — यह सवाल अनुत्तरित है।
जेनजी और केंद्रीय एजेंसियों पर BJP को घेरा
भाजपा नेताओं द्वारा युवा पीढ़ी (Gen Z) पर की गई टिप्पणियों पर सुले ने आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने Gen Z को ईमानदार पीढ़ी बताया था। सुले ने कहा कि एक तरफ इस पीढ़ी को ईमानदार कहा जाता है और दूसरी तरफ BJP उन्हें भ्रष्ट बताने की कोशिश करती है — यह विरोधाभास चिंताजनक है।
उन्होंने आयकर विभाग, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के कथित दुरुपयोग पर भी BJP की आलोचना की। उनका आरोप था कि पिछले कई दशकों में इन एजेंसियों का इस तरह राजनीतिक इस्तेमाल नहीं हुआ जैसा अभी हो रहा है।
पुणे पुलिस की सक्रियता पर सवाल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुणे दौरे से जुड़े मामले में पुलिस की सक्रियता को लेकर सुले ने तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पुणे में महिलाओं के साथ छेड़छाड़, कोयता गैंग की घटनाएं, हत्या और बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों पर पुलिस उतनी मुस्तैद नज़र नहीं आती, जितनी राहुल गांधी के बच्चों से मुलाकात के कार्यक्रम को लेकर दिखी।
NCP विवाद और मराठी भाषा नीति
अजित पवार और शरद पवार गुट के बीच चल रहे कानूनी विवाद पर सुले ने कहा कि यह कोई आंतरिक पारिवारिक झगड़ा नहीं, बल्कि पार्टी की संवैधानिक लड़ाई है जो सर्वोच्च न्यायालय में पूरी ताकत से लड़ी जा रही है। उनके अनुसार, शरद पवार पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष हैं और पार्टी का नाम व चुनाव चिह्न उन्हें ही मिलना चाहिए — यह लड़ाई लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए है।
महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर फ्लाइंग स्क्वाड की कार्रवाई पर सुले ने कहा कि भाषा प्रेम और विश्वास से सीखी जाती है, डर और दबाव से नहीं। जिन लोगों को मराठी नहीं आती, उनके लिए अच्छे ऐप और प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाए जाने चाहिए।
सुले के इन बयानों ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि विपक्ष सरकार से जवाबदेही के मामले में दबाव बनाए रखेगा — चाहे वह दिल्ली की घटना हो, PM केयर्स हो या एजेंसियों का कथित दुरुपयोग।