कनाडा वीजा फ्रॉड: दिल्ली पुलिस साइबर सेल ने ₹1.83 करोड़ की ठगी करने वाले इमिग्रेशन कंसल्टेंट को गिरफ्तार किया

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कनाडा वीजा फ्रॉड: दिल्ली पुलिस साइबर सेल ने ₹1.83 करोड़ की ठगी करने वाले इमिग्रेशन कंसल्टेंट को गिरफ्तार किया

सारांश

नौकरी और बेहतर भविष्य के सपने दिखाकर एक महिला से ₹1.83 करोड़ ठगने वाला कथित इमिग्रेशन कंसल्टेंट धर्मिंदर शर्मा दिल्ली पुलिस की साइबर सेल के हत्थे चढ़ा। कनाडा में कंपनी का डायरेक्टर बनाने का वादा, फर्जी दस्तावेज और बार-बार खारिज हुए वीजा — यह मामला बढ़ते इमिग्रेशन फर्जीवाड़े की गंभीर तस्वीर पेश करता है।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने 17 मई 2026 को कनाडा वीजा फ्रॉड मामले में धर्मिंदर शर्मा को गिरफ्तार किया।
आरोपी ने एक महिला से कनाडा इमिग्रेशन और बिजनेस निवेश के नाम पर ₹1.83 करोड़ (सीएडी 2,95,000 ) की ठगी की।
महिला को कनाडाई हॉस्पिटैलिटी कंपनी में डायरेक्टर/शेयरहोल्डर बनाने का झूठा वादा किया गया; उसका नाम कभी दस्तावेजों में शामिल नहीं हुआ।
कनाडाई अधिकारियों द्वारा वीजा आवेदन कई बार खारिज होने के बावजूद आरोपी झूठे आश्वासन देता रहा।
पुलिस ने आरोपी के पास से एक लैपटॉप बरामद किया; फॉरेंसिक जाँच जारी है।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने 17 मई 2026 को एक बड़े कनाडा वीजा फ्रॉड मामले का पर्दाफाश करते हुए आरोपी धर्मिंदर शर्मा को गिरफ्तार किया। शर्मा पर एक महिला से कनाडा इमिग्रेशन और बिजनेस निवेश कार्यक्रम का झाँसा देकर कुल सीएडी 2,95,000 यानी करीब ₹1.83 करोड़ की ठगी करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार यह मामला कोविड-19 की पहली लहर के बाद का है।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस जाँच के मुताबिक, पंजाब के डेराबस्सी निवासी धर्मिंदर शर्मा ने खुद को एक इमिग्रेशन कंसल्टेंसी फर्म का डायरेक्टर (ऑपरेशंस) बताया और कनाडा इमिग्रेशन व विदेशी निवेश कार्यक्रमों का विशेषज्ञ होने का दावा कर पीड़ित महिला का विश्वास जीता। शर्मा एमबीए है और खुद को कनाडा आधारित इमिग्रेशन प्रोग्राम का वरिष्ठ सलाहकार बताता था।

आरोप है कि उसने महिला को कनाडा की एक हॉस्पिटैलिटी कंपनी में डायरेक्टर या शेयरहोल्डर बनाने का वादा किया और इसके लिए बिजनेस निवेश योजना के नाम पर सीएडी 2,50,000 तथा प्रोफेशनल फीस के रूप में सीएडी 45,000 अलग से वसूले।

धोखाधड़ी का तरीका

पुलिस जाँच में सामने आया कि आरोपी ने महिला का भरोसा बनाए रखने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए, जिनमें दर्शाया गया था कि वह कनाडाई कंपनी में शेयरहोल्डर बनने वाली है। हालाँकि, जाँच में पाया गया कि महिला का नाम कभी भी कंपनी के आधिकारिक दस्तावेजों में शामिल नहीं किया गया और कंपनी की मालिकाना हक दूसरे लोगों के पास ही रही।

कनाडाई अधिकारियों द्वारा महिला का वीजा आवेदन कई बार खारिज किए जाने के बावजूद आरोपी उसे लगातार झूठे आश्वासन देता रहा — कभी री-कंसिडरेशन की बात करता, तो कभी प्रक्रिया जानबूझकर लंबी खींचता ताकि पैसे वापस न करने पड़ें।

पैसों का दुरुपयोग

पुलिस के अनुसार, विदेशी बैंक खातों में रकम आने के बाद आरोपी ने उसे बिजनेस में लगाने के बजाय कैश निकासी, डेबिट ट्रांजैक्शन और कई खातों के ज़रिए इधर-उधर ट्रांसफर कर दिया। यह ऐसे समय में आया है जब देश में कनाडा इमिग्रेशन के नाम पर फर्जीवाड़े के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं।

पुलिस की कार्रवाई और डिजिटल साक्ष्य

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से एक लैपटॉप बरामद किया है। अधिकारियों के अनुसार इसमें ईमेल, वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड, इमिग्रेशन दस्तावेज, सोशल मीडिया चैट और अन्य अहम डिजिटल साक्ष्य मिलने की संभावना है। फिलहाल लैपटॉप की फॉरेंसिक जाँच जारी है।

आगे क्या होगा

पुलिस मामले में अन्य संभावित पीड़ितों और आरोपी के सहयोगियों की पहचान के लिए जाँच जारी रखे हुए है। गौरतलब है कि इस तरह के इमिग्रेशन फ्रॉड मामलों में अक्सर संगठित नेटवर्क की भूमिका सामने आती है। जाँच एजेंसियाँ यह भी देख रही हैं कि क्या विदेशी बैंक खातों से जुड़े अन्य लोग भी इस मामले में शामिल हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

खुद को 'विशेषज्ञ' बताने वाले और फर्जी दस्तावेज तैयार करने में सक्षम ऐसे ऑपरेटर इतने लंबे समय तक बिना जाँच के कैसे काम करते रहे। वीजा बार-बार खारिज होने के बाद भी पैसे वापस न करना और प्रक्रिया जानबूझकर लंबी खींचना — यह संगठित ठगी की पहचान है, इकलौते अपराधी की नहीं। जब तक इमिग्रेशन कंसल्टेंसी उद्योग के लिए कड़ा नियामक ढाँचा नहीं बनता, ऐसे मामले बढ़ते रहेंगे।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली पुलिस साइबर सेल ने किसे और किस आरोप में गिरफ्तार किया?
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने पंजाब के डेराबस्सी निवासी धर्मिंदर शर्मा को गिरफ्तार किया। उस पर एक महिला से कनाडा इमिग्रेशन और बिजनेस निवेश कार्यक्रम का झाँसा देकर ₹1.83 करोड़ (सीएडी 2,95,000) की ठगी करने का आरोप है।
आरोपी ने महिला से ठगी किस तरह की?
आरोपी ने खुद को इमिग्रेशन कंसल्टेंसी फर्म का डायरेक्टर और कनाडा इमिग्रेशन विशेषज्ञ बताकर महिला का विश्वास जीता। उसने बिजनेस निवेश योजना के नाम पर सीएडी 2,50,000 और प्रोफेशनल फीस के रूप में सीएडी 45,000 वसूले, फर्जी दस्तावेज तैयार किए और कनाडाई कंपनी में डायरेक्टर बनाने का झूठा वादा किया।
पीड़ित महिला का वीजा क्यों नहीं मिला?
कनाडाई अधिकारियों ने महिला का वीजा आवेदन कई बार खारिज किया। पुलिस जाँच में पता चला कि महिला का नाम कभी भी कंपनी के आधिकारिक दस्तावेजों में शामिल नहीं किया गया था और कंपनी की मालिकाना हक दूसरे लोगों के पास ही रही।
ठगी की रकम का क्या हुआ?
पुलिस जाँच के अनुसार, विदेशी बैंक खातों में रकम आने के बाद आरोपी ने उसे बिजनेस में लगाने के बजाय कैश निकासी, डेबिट ट्रांजैक्शन और कई खातों के ज़रिए इधर-उधर ट्रांसफर कर दिया।
इस मामले में आगे क्या जाँच होगी?
पुलिस ने आरोपी के पास से एक लैपटॉप बरामद किया है जिसकी फॉरेंसिक जाँच जारी है। साथ ही जाँच एजेंसियाँ अन्य संभावित पीड़ितों, सहयोगियों और विदेशी बैंक खातों से जुड़े लोगों की पहचान करने में लगी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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