दिल्ली पुलिस ने ₹1.20 लाख की UPI धोखाधड़ी का भंडाफोड़ किया, मुख्य आरोपी कुशाग्र आहूजा गिरफ्तार

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दिल्ली पुलिस ने ₹1.20 लाख की UPI धोखाधड़ी का भंडाफोड़ किया, मुख्य आरोपी कुशाग्र आहूजा गिरफ्तार

सारांश

दिल्ली पुलिस मेट्रो यूनिट ने साइबर फॉरेंसिक और तकनीकी निगरानी के ज़रिए ₹1,20,390 की UPI धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया और मुख्य आरोपी कुशाग्र आहूजा को कश्मीरी गेट से गिरफ्तार किया। 11 संदिग्ध लेनदेन की ट्रेल मैपिंग और लाभार्थी नीतू की पूछताछ से यह सफलता मिली।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस मेट्रो यूनिट ने 1 मई 2026 को मुख्य आरोपी कुशाग्र आहूजा (32 वर्ष) को कश्मीरी गेट आईएसबीटी से गिरफ्तार किया।
आरोपी ने चोरी किए गए मोबाइल फोन से ₹1,20,390 की UPI धोखाधड़ी की — 11 संदिग्ध लेनदेन के ज़रिए।
फॉरेंसिक विश्लेषण से सफीदों निवासी नीतू को मुख्य लाभार्थी के रूप में पहचाना गया, जिसकी पूछताछ से आरोपी तक पहुँचा गया।
मामला आईजीआईए मेट्रो पुलिस स्टेशन में ई-एफआईआर संख्या 80019309/2026 (धारा 303(2) बीएनएस) के तहत दर्ज है।
पुलिस अब चोरी हुए मोबाइल की बरामदगी और पूरे धोखाधड़ी नेटवर्क की जांच कर रही है।

दिल्ली पुलिस की मेट्रो यूनिट ने साइबर फॉरेंसिक और तकनीकी निगरानी के ज़रिए एक संगठित UPI धोखाधड़ी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए मुख्य आरोपी कुशाग्र आहूजा (32 वर्ष) को 1 मई 2026 को कश्मीरी गेट आईएसबीटी क्षेत्र से गिरफ्तार किया। आरोपी ने एक चोरी किए गए मोबाइल फोन के ज़रिए पीड़ित के UPI ऐप से ₹1,20,390 के फर्जी लेनदेन किए थे।

मामले का घटनाक्रम

यह मामला आईजीआईए मेट्रो पुलिस स्टेशन में दर्ज ई-एफआईआर संख्या 80019309/2026 (धारा 303(2) बीएनएस) से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, एक व्यक्ति का मोबाइल फोन चोरी होने के बाद उसके UPI ऐप से 11 संदिग्ध लेनदेन के माध्यम से ₹1,20,390 की राशि हड़प ली गई। जांच टीम ने उन्नत साइबर फॉरेंसिक टूल्स की सहायता से इन सभी ट्रांजेक्शन की पूरी ट्रेल मैप की।

पुलिस के अनुसार, धनराशि को तेजी से कई स्थानीय व्यापारियों के खातों में स्थानांतरित किया गया, जो एक सुनियोजित धोखाधड़ी नेटवर्क की ओर स्पष्ट संकेत था। फॉरेंसिक विश्लेषण और जमीनी खुफिया जानकारी के आधार पर सफीदों निवासी नीतू को मुख्य लाभार्थी के रूप में चिह्नित किया गया। नीतू की पूछताछ से आगे मुख्य आरोपी कुशाग्र आहूजा का नाम उजागर हुआ।

आरोपी की गिरफ्तारी कैसे हुई

आरोपी कुशाग्र आहूजा का कोई स्थायी ठिकाना नहीं था और वह गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपना स्थान बदलता रहता था। पुलिस की विशेष टीम ने तकनीकी निगरानी और फील्ड इंटेलिजेंस के सहारे उसकी आवाजाही पर नज़र बनाए रखी। 1 मई 2026 को प्राप्त सूचना के आधार पर कश्मीरी गेट आईएसबीटी क्षेत्र में गहन तलाशी अभियान चलाया गया और आरोपी को सफलतापूर्वक दबोच लिया गया। पूछताछ में कुशाग्र ने चोरी के मोबाइल से UPI धोखाधड़ी करने की बात स्वीकार की है।

वरिष्ठ अधिकारी की प्रतिक्रिया

बी. भरत रेड्डी, आईपीएस, उप पुलिस आयुक्त (मेट्रो) ने कहा कि यह सफलता साइबर खुफिया, तकनीकी निगरानी और जमीनी अभियानों के प्रभावी समन्वय का नतीजा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस डिजिटल अपराधों से निपटने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पुलिस अब चोरी हुए मोबाइल फोन की बरामदगी और पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है।

आम जनता के लिए सावधानियाँ

दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि मोबाइल चोरी होने पर तुरंत UPI ऐप्स, बैंक खातों और सिम को ब्लॉक कराएं तथा बिना देर किए पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस ने यह भी कहा कि संदिग्ध लिंक या अनजान नंबरों से आए संदेशों पर कभी भी OTP या बैंक विवरण साझा न करें। गौरतलब है कि देश में मोबाइल-आधारित UPI धोखाधड़ी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और यह गिरफ्तारी साइबर अपराध के विरुद्ध पुलिस की बढ़ती सक्रियता का संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इतने त्वरित लेनदेन पर बैंकों और UPI प्लेटफॉर्म्स की रियल-टाइम निगरानी प्रणाली क्यों सक्रिय नहीं हुई। जब तक UPI ऐप्स में डिवाइस-बाइंडिंग और चोरी-सूचना के आधार पर स्वचालित ब्लॉकिंग की व्यवस्था मज़बूत नहीं होती, ऐसे मामले बार-बार सामने आते रहेंगे।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुशाग्र आहूजा को किस आरोप में गिरफ्तार किया गया?
कुशाग्र आहूजा को एक चोरी किए गए मोबाइल फोन से ₹1,20,390 की UPI धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया। यह मामला आईजीआईए मेट्रो पुलिस स्टेशन में धारा 303(2) बीएनएस के तहत दर्ज है।
दिल्ली पुलिस ने आरोपी तक कैसे पहुँची?
जांच टीम ने साइबर फॉरेंसिक टूल्स से 11 संदिग्ध UPI लेनदेन की ट्रेल मैप की और मुख्य लाभार्थी सफीदों निवासी नीतू की पहचान की। नीतू की पूछताछ से कुशाग्र आहूजा का नाम सामने आया और तकनीकी निगरानी से उसे कश्मीरी गेट आईएसबीटी से गिरफ्तार किया गया।
UPI धोखाधड़ी से बचने के लिए क्या करें?
मोबाइल चोरी होने पर तुरंत UPI ऐप्स, बैंक खाते और सिम ब्लॉक कराएं और पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं। किसी भी अनजान नंबर या संदिग्ध लिंक से आए संदेश पर OTP या बैंक विवरण कभी साझा न करें।
इस मामले में धनराशि किस तरह ट्रांसफर की गई?
चोरी किए गए मोबाइल से UPI ऐप के ज़रिए 11 लेनदेन में ₹1,20,390 को कई स्थानीय व्यापारियों के खातों में तेज़ी से स्थानांतरित किया गया। पुलिस के अनुसार यह एक संगठित धोखाधड़ी नेटवर्क की कार्यशैली को दर्शाता है।
क्या पूरे नेटवर्क की जांच हो रही है?
हाँ, दिल्ली पुलिस अब चोरी हुए मोबाइल फोन की बरामदगी और इस धोखाधड़ी नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान में जुटी है। उप पुलिस आयुक्त बी. भरत रेड्डी ने पुष्टि की है कि जांच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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