धर्मांतरण नहीं, धर्मों का सम्मान हो — रायपुर में बोले आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने सोमवार, 29 जून 2026 को रायपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान धर्मांतरण के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि एक मज़बूत और शांतिपूर्ण भारत के निर्माण के लिए धर्मांतरण नहीं, बल्कि सभी धर्मों का परस्पर सम्मान ज़रूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समान नागरिक संहिता (UCC) किसी की मौलिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं करती।
धर्मांतरण पर इंद्रेश कुमार का रुख
इंद्रेश कुमार ने कहा कि किसी भी देश में धर्मांतरण नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, धर्मों का सम्मान एक बुनियादी संवैधानिक मूल्य और मौलिक अधिकार है। उन्होंने तर्क दिया कि भारत विश्व का एकमात्र ऐसा देश है जहाँ न केवल भारत की धरती पर उपजे सभी धर्म, जातियाँ और उपधर्म विद्यमान हैं, बल्कि बाहर से आए धर्म — जैसे यहूदी, पारसी, मुस्लिम और ईसाई — भी पूरी तरह स्वीकार किए गए हैं।
उन्होंने कहा, 'देश के अंदर धर्मांतरण नहीं, बल्कि धर्मों का सम्मान होना चाहिए। यही सच्चा लोकतंत्र है। अगर हम इस पर चलें तो मज़बूत भारत बनेगा, शांति और सद्भाव का रास्ता खुलेगा।'
UCC पर इंद्रेश कुमार का स्पष्टीकरण
पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की तैयारियों के बीच इंद्रेश कुमार ने कहा कि यूसीसी जातिगत या पंथगत स्वतंत्रताओं में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करती। उन्होंने कहा, 'हम एक देश हैं, एक जन हैं और एक ही झंडा है।' उनके अनुसार, जैन, बौद्ध, सिख, अंबेडकरवादी, आर्यसमाजी, सनातनी, कबीरपंथी, रविदासिया, जनजातियाँ और अनुसूचित समाज ने UCC का विरोध इसलिए नहीं किया, क्योंकि उन्होंने इसका गहन अध्ययन किया है।
उन्होंने कहा कि समस्या केवल उन राजनीतिक समूहों के साथ है जो वोट-बैंक की राजनीति के लिए अल्पसंख्यकों को भड़काने की कोशिश करते हैं।
मुसलमानों से इंद्रेश कुमार की अपील
इंद्रेश कुमार ने मुसलमानों से भारतीय के रूप में सोचने की अपील की। उन्होंने उदाहरण दिया कि दुनिया के किसी भी देश में नागरिक की पहचान केवल उसके धर्म से नहीं, बल्कि उसकी राष्ट्रीयता से होती है — अरब के व्यक्ति को अरब, तुर्की के व्यक्ति को तुर्क, ब्रिटेन के व्यक्ति को ब्रिटिश कहा जाता है। उसी प्रकार भारत में सभी धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र के लोग सबसे पहले भारतीय हैं।
उन्होंने कहा, 'हम भारतीय थे, भारतीय हैं और भारतीय ही रहेंगे। कोई भी हमसे यह अधिकार नहीं छीन सकता।' साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आज़ादी के बाद राजनीतिक दलों ने मुसलमानों को विकास की मुख्यधारा से वंचित रखा और अब समय आ गया है कि वे मुख्यधारा में आकर जीएँ।
आगे क्या
इंद्रेश कुमार के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब देश में UCC को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में इसके क्रियान्वयन की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। आरएसएस के एक वरिष्ठ नेता का यह सुस्पष्ट बयान आने वाले दिनों में धर्मांतरण-विरोधी और UCC समर्थक विमर्श को और धार दे सकता है।