दिलीप घोष का TMC नेता की कस्टडी मौत पर बयान — 'FIR और जांच ज़रूरी', अभिषेक बनर्जी पर भी हमला
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने 9 अगस्त 2026 को कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक नेता की पुलिस हिरासत में हुई मौत पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पुलिस कस्टडी में किसी की भी मौत 'गलत' है और ऐसे मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही घोष ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता अभिषेक बनर्जी की सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका और उनके व्यक्तिगत सहायक (पीए) से सीआईडी की पूछताछ पर भी निशाना साधा।
पुलिस कस्टडी मौत पर घोष का रुख
दिलीप घोष ने कहा, 'अगर पुलिस कस्टडी में किसी की मौत होती है, तो यह गलत है और ऐसे मामले में FIR भी दर्ज होनी चाहिए।' उन्होंने आगे कहा कि अगर TMC नेता लोगों को मार-पीटकर मौत के घाट उतार देते हैं और फिर इसका दोष पुलिस या दूसरों पर थोपते हैं, तो यह स्वीकार्य नहीं है। ऐसे मामले में निश्चित रूप से जांच होनी चाहिए।
अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा याचिका पर टिप्पणी
TMC नेता अभिषेक बनर्जी की सर्वोच्च न्यायालय में आँख के ऑपरेशन के लिए विदेश जाने की अनुमति माँगने वाली याचिका पर घोष ने कहा कि अगर किसी चिकित्सक ने वास्तव में यह सलाह दी है कि ऐसी सुविधा भारत में उपलब्ध नहीं है, तो उन्हें जाने की अनुमति मिलनी चाहिए। हालाँकि उन्होंने जोड़ा कि जब किसी के विरुद्ध शिकायत हो, तो न्यायालय सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही निर्णय लेता है।
पीए सुमित रॉय से CID पूछताछ पर प्रतिक्रिया
अभिषेक बनर्जी के सहयोगी सुमित रॉय से CID की पूछताछ पर घोष ने कहा कि उनके पीए के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज हैं और CBI इस मामले की जांच कर रही है, इसीलिए उन्हें समन भेजा गया। घोष ने यह भी कहा कि वह काफी समय तक पूछताछ से बचते रहे और अभी भी पार्टी के वाहन में आ-जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने पर नतीजे सामने आ जाएँगे।
महुआ मोइत्रा की याचिका वापसी और अन्य मुद्दे
TMC सांसद महुआ मोइत्रा की याचिका वापस लिए जाने पर घोष ने कहा कि लोकतंत्र में बोलने और सवाल पूछने का अधिकार है, लेकिन समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी भी उतनी ही ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि हर मामले के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाना उचित नहीं है।
अलीगढ़ का नाम बदलने की प्रक्रिया पर घोष ने कहा कि मुगल और ब्रिटिश काल में कई स्थानों के नाम बदले गए थे, और अब स्थानीय निकाय व जिला परिषद जनभावना के आधार पर ऐसे फैसले ले सकते हैं। रूसी तेल पर अमेरिकी दबाव के सवाल पर उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच यह द्विपक्षीय व्यापार है और इसमें किसी तीसरे पक्ष का दखल उचित नहीं है।
आगे क्या होगा
TMC नेता की पुलिस कस्टडी में मौत का मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है। CBI और CID की जांच समानांतर चल रही है, और सर्वोच्च न्यायालय अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा याचिका पर अपना फैसला सुनाएगा। यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीतिक गतिशीलता और कानून-व्यवस्था के सवालों को और तेज़ कर सकता है।