केरल विधानसभा में हंगामा: वॉटर कैनन में दूषित पानी के आरोप, गृह मंत्री ने सैंपल जांच का दिया आश्वासन
सारांश
मुख्य बातें
केरल विधानसभा में 22 जून 2026 को उस समय तीखा राजनीतिक विवाद उभरा, जब विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने एआईवाईएफ-एआईएसएफ के विरोध मार्च के दौरान तिरुवनंतपुरम में पुलिस द्वारा वॉटर कैनन में दूषित पानी इस्तेमाल किए जाने का गंभीर आरोप लगाया। विजयन ने सदन के पटल पर उस पानी की एक बोतल पेश की जिसे उन्होंने दूषित बताया और गृह मंत्री से विस्तृत जवाब की माँग की।
मुख्य घटनाक्रम
पीएम श्री स्कीम पर सरकार के रुख के विरोध में निकाले गए मार्च में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के नेता और विधायक के. राजन सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल थे। जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने का प्रयास किया, तो पुलिस ने चंद्रशेखरन नायर स्टेडियम के निकट वॉटर कैनन का उपयोग किया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि पानी के संपर्क में आने के बाद उन्हें खुजली हुई और कुछ महिला प्रदर्शनकारियों के कपड़ों का रंग भी बदल गया।
विपक्ष के आरोप
विधानसभा में विजयन ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर इस्तेमाल किया गया पानी अत्यधिक दूषित था और इससे अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने कहा, 'वॉटर कैनन का इस्तेमाल करने का यह सामान्य तरीका नहीं है। ऐसे समय में जब केरल स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं पर चर्चा कर रहा है, इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।' गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब राज्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर पहले से ही संवेदनशीलता बनी हुई है।
सरकार की प्रतिक्रिया
गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने स्पष्ट किया कि दूषित पानी इस्तेमाल करने की कोई जानबूझकर कोशिश नहीं की गई थी। उन्होंने बताया कि वॉटर कैनन में जल प्राधिकरण की आपूर्ति से पानी भरा जाता है, और पुराने टैंकर में जमा गंदगी या जंग के कारण पानी का रंग बदल सकता है। चेन्निथला ने कहा, 'पानी का सैंपल प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा जाएगा। कमिश्नर को मामले की जांच करने का निर्देश दिया गया है।' उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि यदि कोई कमी सामने आई तो सुधारात्मक कदम उठाए जाएँगे।
विधायक के. राजन का बयान
CPI नेता और मार्च के आयोजक के. राजन ने कहा कि प्रदर्शनकारी वॉटर कैनन से नहीं डरते, परंतु उनके अनुसार इस बार इस्तेमाल किया गया पानी किसी भी मानक पर स्वीकार्य नहीं था। उन्होंने महिला प्रदर्शनकारियों के कपड़ों के रंग बदलने का हवाला देते हुए जाँच की माँग दोहराई।
आगे क्या होगा
विधानसभा अध्यक्ष ने संकेत दिया कि प्रयोगशाला परीक्षण के परिणाम आने के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई की जा सकती है। इस विवाद ने राजनीतिक बहस का केंद्र पीएम श्री स्कीम के विरोध से हटाकर प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा अपनाए गए तरीकों पर आरोपों की ओर मोड़ दिया है। जाँच रिपोर्ट आने तक यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना रहेगा।