डंकी रूट केस: ईडी ने दिल्ली टिकट एजेंट तरुण खोसला को पीएमएलए के तहत किया गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 23 अक्टूबर 2026 को दिल्ली स्थित टिकट एजेंट तरुण खोसला को 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए), 2002 के तहत गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई डंकी रूट केस के सिलसिले में की गई है, जिसमें फरवरी 2025 में 300 से अधिक भारतीय नागरिकों को अमेरिका से डिपोर्ट किया गया था। एक विशेष पीएमएलए अदालत ने खोसला को 30 अक्टूबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है।
कौन है तरुण खोसला और क्या है उसकी भूमिका
ईडी की जांच के अनुसार, तरुण खोसला डंकी रूट नेटवर्क का एक मुख्य सूत्रधार था। वह पंजाब और हरियाणा के कई एजेंटों के साथ मिलकर काम करता था, जो अमेरिका जाने के इच्छुक लोगों से पासपोर्ट और पैसे एकत्र कर उन्हें खोसला के पास दिल्ली भेजते थे।
खोसला इसके बाद गुयाना, सूरीनाम, इक्वाडोर और अल साल्वाडोर जैसे दक्षिण अमेरिकी देशों के लिए वीजा और हवाई टिकट की व्यवस्था करता था। वह इन लोगों को अवैध और खतरनाक रास्तों से अमेरिका की सीमा तक पहुँचाने में मुख्य भूमिका निभाता था। ईडी के अनुसार, उसके मोबाइल फोन की चैट से पता चलता है कि वह एक 'इमिग्रेशन-क्लियरेंस फिक्सर' के तौर पर काम करता था।
तलाशी में क्या-क्या बरामद हुआ
18 और 19 दिसंबर 2025 को पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में खोसला के ठिकानों पर छापेमारी में ₹4.62 करोड़ नकद, लगभग 5.9 किलोग्राम सोना (बार और सिक्के) तथा लगभग 313 किलोग्राम चांदी (बार) जब्त की गई, जिनकी कुल कीमत ₹19.14 करोड़ बताई गई है।
इससे पहले 9 और 11 जुलाई 2025 को 19 ठिकानों पर छापेमारी में निकारागुआ और इथियोपिया के फर्जी इमिग्रेशन एवं वीजा स्टैम्प, आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और 50 से अधिक लोगों के असली पासपोर्ट बरामद हुए थे। 15 दिसंबर 2025 को ईडी ने ₹5.41 करोड़ की चल और अचल संपत्तियाँ — जिनमें कृषि भूमि, आवासीय-व्यावसायिक परिसर और बैंक खाते शामिल हैं — अस्थायी रूप से जब्त की थीं।
वित्तीय लेन-देन का पर्दाफाश
ईडी के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान खोसला की प्रोप्राइटरशिप फर्म 'बीजे इंटरनेशनल' के बैंक खाते में 414 नकद-क्रेडिट लेन-देन के जरिए कुल ₹30.38 करोड़ जमा किए गए थे। यह राशि अवैध प्रवासन से कमाई गई अपराध की रकम मानी जा रही है।
जांच में यह भी सामने आया कि खोसला ने मेक्सिको में 'माइक', ब्राजील में 'अली' और मेक्सिको में 'क्रिस्टी' जैसे विदेशी 'डोंकर्स' से संपर्क बनाए हुए था, जो सीमा पार कराने और भुगतान का काम संभालते थे।
पीड़ितों से कितनी ठगी हुई
ईडी की जांच से पता चला है कि एजेंटों और बिचौलियों ने अमेरिका जाने के इच्छुक लोगों को झूठा वादा किया कि उन्हें कानूनी तरीके से भेजा जाएगा। इसके बदले में उनसे ₹30 लाख से ₹60 लाख तक की रकम ली गई और फिर उन्हें डंकी रूट के जरिए खतरनाक रास्तों से भेज दिया गया। गौरतलब है कि यह जांच पंजाब पुलिस और हरियाणा पुलिस द्वारा बीएनएस, 2023 और 'इमिग्रेशन एक्ट', 1983 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी।
आगे क्या होगा
खोसला 30 अक्टूबर 2026 तक ईडी की हिरासत में है, जिसके बाद उसे फिर अदालत के सामने पेश किया जाएगा। यह मामला ऐसे समय में और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध प्रवासन नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाइयाँ तेज हो रही हैं। ईडी की जांच में पंजाब और हरियाणा में सक्रिय एजेंटों के खिलाफ भी कार्रवाई आगे बढ़ने की संभावना है।