मतदाता सूची शुद्धिकरण: संजय निरुपम ने एसआईआर अभियान का स्वागत किया, उद्धव पर साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना नेता संजय निरुपम ने 30 जून 2025 को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा शुरू की गई विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया का खुले दिल से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूचियों को फर्जी, दोहरे और मृत मतदाताओं के नामों से मुक्त कर पूरी तरह पारदर्शी बनाना है। इसके साथ ही निरुपम ने उद्धव ठाकरे के महाराष्ट्र दौरे और सचिन अहीर के शिवसेना में शामिल होने को लेकर विपक्ष पर तीखे प्रहार किए।
मुख्य घटनाक्रम: एसआईआर प्रक्रिया क्या है
निरुपम के अनुसार, 30 जून से देश के कई राज्यों में ECI के निर्देश पर एसआईआर की प्रक्रिया लागू हो गई है। इस अभियान के अंतर्गत नियुक्त अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करेंगे और उन्हें एक निर्धारित फॉर्म (ईएफ) उपलब्ध कराएंगे। मतदाताओं से अपेक्षा है कि वे सात दिनों के भीतर यह फॉर्म भरकर जमा करें, जिसके बाद अधिकारी यह सत्यापित करेंगे कि संबंधित व्यक्ति वास्तविक और वैध भारतीय नागरिक है या नहीं।
शुद्धिकरण का तीसरा चरण: क्या हटेगा सूची से
निरुपम ने स्पष्ट किया कि यह मतदाता सूची शुद्धिकरण का तीसरा चरण है। इस प्रक्रिया के माध्यम से फर्जी मतदाताओं, एक से अधिक स्थानों पर नाम दर्ज कराने वाले मतदाताओं और मृत व्यक्तियों के नाम सूची से हटाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस अभियान के पूरा होने के बाद केवल वैध नागरिक ही मतदाता सूची में बने रहेंगे और आगामी चुनावों में अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग कर सकेंगे।
उद्धव ठाकरे के दौरे पर निरुपम की प्रतिक्रिया
उद्धव ठाकरे के महाराष्ट्र दौरे पर टिप्पणी करते हुए निरुपम ने कहा कि ठाकरे परिवार के साथ उन छह लोकसभा क्षेत्रों के दौरे से लौटे हैं, जहाँ से उनके सांसद पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो चुके हैं। निरुपम ने दावा किया कि इस दौरे का पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे के यवतमाल दौरे के अगले ही दिन यूबीटी के 15 वरिष्ठ पदाधिकारियों ने पार्टी छोड़कर शिवसेना का दामन थाम लिया।
सचिन अहीर का शिवसेना में आना: यूबीटी को बड़ा झटका
निरुपम ने विधान परिषद सदस्य और पूर्व विधायक सचिन अहीर के शिवसेना में शामिल होने को यूबीटी के लिए बड़ा झटका करार दिया। उनके अनुसार, अहीर ने शिवसेना में उपसभापति पद के लिए नामांकन दाखिल किया है। निरुपम ने दावा किया कि अहीर को पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) से उद्धव ठाकरे की पार्टी में इसलिए लाया गया था ताकि आदित्य ठाकरे को वर्ली विधानसभा सीट पर जीत दिलाने में सहायता मिले, और उस समय उन्हें पुरस्कार स्वरूप विधान परिषद सदस्य बनाया गया था।
वर्ली में यूबीटी की स्थिति पर असर
निरुपम ने आगे दावा किया कि अहीर के जाने से वर्ली में यूबीटी की स्थिति कमजोर होगी और भविष्य में आदित्य ठाकरे के लिए वहाँ से चुनाव जीतना कठिन होगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के दोनों गुटों के बीच संगठनात्मक खींचतान जारी है। आने वाले दिनों में यूबीटी की प्रतिक्रिया और अहीर के इस कदम का राजनीतिक असर स्पष्ट होगा।