1 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मतदाता सूची शुद्धिकरण: संजय निरुपम ने एसआईआर अभियान का स्वागत किया, उद्धव पर साधा निशाना

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मतदाता सूची शुद्धिकरण: संजय निरुपम ने एसआईआर अभियान का स्वागत किया, उद्धव पर साधा निशाना

सारांश

भारत निर्वाचन आयोग की एसआईआर प्रक्रिया 30 जून से लागू — शिवसेना नेता संजय निरुपम ने स्वागत किया और कहा कि फर्जी व मृत मतदाताओं के नाम हटेंगे। साथ ही उन्होंने सचिन अहीर के शिवसेना में आने को यूबीटी के लिए बड़ा झटका और वर्ली में आदित्य ठाकरे के लिए चुनौती बताया।

मुख्य बातें

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 30 जून 2025 से कई राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान शुरू किया।
अभियान के तहत अधिकारी घर-घर जाकर फॉर्म ( ईएफ ) वितरित करेंगे; मतदाताओं को सात दिन में फॉर्म जमा करना होगा।
यह शुद्धिकरण का तीसरा चरण है — फर्जी, दोहरे और मृत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाएंगे।
विधान परिषद सदस्य सचिन अहीर ने यूबीटी छोड़कर शिवसेना में उपसभापति पद के लिए नामांकन दाखिल किया।
शिवसेना नेता संजय निरुपम के अनुसार, उद्धव ठाकरे के यवतमाल दौरे के अगले दिन यूबीटी के 15 वरिष्ठ पदाधिकारी पार्टी छोड़ गए।
निरुपम का दावा — अहीर के जाने से वर्ली में आदित्य ठाकरे की राजनीतिक स्थिति कमजोर होगी।

शिवसेना नेता संजय निरुपम ने 30 जून 2025 को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा शुरू की गई विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया का खुले दिल से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूचियों को फर्जी, दोहरे और मृत मतदाताओं के नामों से मुक्त कर पूरी तरह पारदर्शी बनाना है। इसके साथ ही निरुपम ने उद्धव ठाकरे के महाराष्ट्र दौरे और सचिन अहीर के शिवसेना में शामिल होने को लेकर विपक्ष पर तीखे प्रहार किए।

मुख्य घटनाक्रम: एसआईआर प्रक्रिया क्या है

निरुपम के अनुसार, 30 जून से देश के कई राज्यों में ECI के निर्देश पर एसआईआर की प्रक्रिया लागू हो गई है। इस अभियान के अंतर्गत नियुक्त अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करेंगे और उन्हें एक निर्धारित फॉर्म (ईएफ) उपलब्ध कराएंगे। मतदाताओं से अपेक्षा है कि वे सात दिनों के भीतर यह फॉर्म भरकर जमा करें, जिसके बाद अधिकारी यह सत्यापित करेंगे कि संबंधित व्यक्ति वास्तविक और वैध भारतीय नागरिक है या नहीं।

शुद्धिकरण का तीसरा चरण: क्या हटेगा सूची से

निरुपम ने स्पष्ट किया कि यह मतदाता सूची शुद्धिकरण का तीसरा चरण है। इस प्रक्रिया के माध्यम से फर्जी मतदाताओं, एक से अधिक स्थानों पर नाम दर्ज कराने वाले मतदाताओं और मृत व्यक्तियों के नाम सूची से हटाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस अभियान के पूरा होने के बाद केवल वैध नागरिक ही मतदाता सूची में बने रहेंगे और आगामी चुनावों में अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग कर सकेंगे।

उद्धव ठाकरे के दौरे पर निरुपम की प्रतिक्रिया

उद्धव ठाकरे के महाराष्ट्र दौरे पर टिप्पणी करते हुए निरुपम ने कहा कि ठाकरे परिवार के साथ उन छह लोकसभा क्षेत्रों के दौरे से लौटे हैं, जहाँ से उनके सांसद पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो चुके हैं। निरुपम ने दावा किया कि इस दौरे का पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे के यवतमाल दौरे के अगले ही दिन यूबीटी के 15 वरिष्ठ पदाधिकारियों ने पार्टी छोड़कर शिवसेना का दामन थाम लिया।

सचिन अहीर का शिवसेना में आना: यूबीटी को बड़ा झटका

निरुपम ने विधान परिषद सदस्य और पूर्व विधायक सचिन अहीर के शिवसेना में शामिल होने को यूबीटी के लिए बड़ा झटका करार दिया। उनके अनुसार, अहीर ने शिवसेना में उपसभापति पद के लिए नामांकन दाखिल किया है। निरुपम ने दावा किया कि अहीर को पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) से उद्धव ठाकरे की पार्टी में इसलिए लाया गया था ताकि आदित्य ठाकरे को वर्ली विधानसभा सीट पर जीत दिलाने में सहायता मिले, और उस समय उन्हें पुरस्कार स्वरूप विधान परिषद सदस्य बनाया गया था।

वर्ली में यूबीटी की स्थिति पर असर

निरुपम ने आगे दावा किया कि अहीर के जाने से वर्ली में यूबीटी की स्थिति कमजोर होगी और भविष्य में आदित्य ठाकरे के लिए वहाँ से चुनाव जीतना कठिन होगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के दोनों गुटों के बीच संगठनात्मक खींचतान जारी है। आने वाले दिनों में यूबीटी की प्रतिक्रिया और अहीर के इस कदम का राजनीतिक असर स्पष्ट होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

और एसआईआर जैसी प्रक्रियाएँ सैद्धांतिक रूप से लोकतंत्र को मजबूत करती हैं — लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है। घर-घर सत्यापन में अधिकारियों की मनमानी और वंचित वर्गों के वैध मतदाताओं के नाम कटने का जोखिम पहले भी सामने आ चुका है। निरुपम का यह बयान एक साथ दो मोर्चों पर है — एक नीतिगत समर्थन, दूसरा राजनीतिक आक्रमण। सचिन अहीर प्रकरण यह भी दिखाता है कि महाराष्ट्र में दलबदल की राजनीति अभी थमी नहीं है, और वर्ली जैसी सीटें आने वाले चुनावों में नई समीकरणों से तय होंगी।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया क्या है?
एसआईआर भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को शुद्ध करने के लिए चलाया जाने वाला विशेष अभियान है। इसके तहत अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं को फॉर्म (ईएफ) देते हैं और सात दिन में सत्यापन पूरा करते हैं।
एसआईआर अभियान से मतदाता सूची में क्या बदलाव होगा?
इस अभियान के तहत फर्जी, दोहरे और मृत व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे। केवल वैध और वास्तविक भारतीय नागरिक ही सूची में बने रहेंगे।
सचिन अहीर का शिवसेना में शामिल होना यूबीटी के लिए क्यों बड़ा झटका है?
सचिन अहीर विधान परिषद सदस्य और कामगार वर्ग के प्रभावशाली नेता हैं। संजय निरुपम के अनुसार उनके जाने से यूबीटी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ कमजोर हुआ है और वर्ली विधानसभा सीट पर आदित्य ठाकरे की स्थिति प्रभावित होगी।
उद्धव ठाकरे के महाराष्ट्र दौरे का क्या असर रहा?
शिवसेना नेता संजय निरुपम के अनुसार, उद्धव ठाकरे के दौरे का पार्टी संगठन पर कोई खास असर नहीं पड़ा। उनके यवतमाल दौरे के अगले ही दिन यूबीटी के 15 वरिष्ठ पदाधिकारियों ने पार्टी छोड़ दी।
एसआईआर अभियान किन राज्यों में लागू हो रहा है?
30 जून 2025 से यह अभियान देश के कई राज्यों में एक साथ लागू किया गया है। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार इन राज्यों में नियुक्त अधिकारी घर-घर सत्यापन कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले