असम: बाघ सेना नेता यूनुस तामुली पर महिलाओं के खिलाफ अश्लील टिप्पणी का आरोप, शिवसागर में FIR दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
असम के शिवसागर जिले में बाघ सेना संगठन के नेता यूनुस तामुली के खिलाफ 2 जुलाई को शिवसागर सदर पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। महिला संगठन जागृति नारी समाज की शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई, जिसमें तामुली पर फेसबुक पर कथित तौर पर अश्लील और अपमानजनक टिप्पणियाँ पोस्ट कर महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाने का आरोप लगाया गया है।
मामले का घटनाक्रम
जागृति नारी समाज के सदस्यों के अनुसार, तामुली ने फेसबुक पर ऐसी पोस्ट साझा कीं जिनमें महिलाओं को निशाना बनाकर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। संगठन का कहना है कि इन पोस्टों से व्यापक सामाजिक आक्रोश फैला और महिलाओं की भावनाएँ आहत हुईं। पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि FIR दर्ज कर ली गई है और जाँच जारी है।
महिला संगठन की माँग
जागृति नारी समाज ने तामुली की तत्काल गिरफ्तारी की माँग करते हुए पुलिस से कड़ी कानूनी कार्रवाई का आग्रह किया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार नहीं किया गया तो वह राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन आयोजित करेगा। इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी।
बाघ सेना और असम का राजनीतिक संदर्भ
हाल के वर्षों में यूनुस तामुली स्वघोषित बाघ सेना संगठन के प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे हैं, जो असम में बंगाली भाषी मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों के हितों के लिए आवाज़ उठाता रहा है। 'मिया' शब्द का प्रयोग सामान्यतः उन बंगाली भाषी मुसलमानों के लिए होता है जिनके पूर्वज औपनिवेशिक काल में ब्रह्मपुत्र घाटी में आकर बसे थे।
यह समुदाय वर्षों से असम के राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहा है। अवैध आप्रवासन, पहचान, भूमि अधिकार और नागरिकता जैसे मुद्दे प्रायः चुनावी बहसों पर हावी रहते हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्षी दलों पर इस समुदाय के प्रति तुष्टीकरण की राजनीति करने का बार-बार आरोप लगाया है, जबकि विपक्षी नेताओं ने इसका खंडन करते हुए कहा है कि बंगाली भाषी मुसलमानों को अक्सर रूढ़िवादिता और भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
पुलिस की स्थिति
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शिवसागर सदर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की जा चुकी है और मामले की जाँच की जा रही है। गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने के ऐसे मामलों में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाती है।
आगे की स्थिति
जाँच एजेंसियाँ फेसबुक पोस्ट की सामग्री की जाँच कर रही हैं। जागृति नारी समाज का कहना है कि वह तब तक दबाव बनाए रखेगा जब तक आरोपी के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती। यह मामला असम में सोशल मीडिया के दुरुपयोग और महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं की पृष्ठभूमि में सामने आया है।