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ग्रेट निकोबार में ₹13,000 करोड़ का ग्रीनफील्ड एयरबेस: मलक्का जलडमरूमध्य पर भारत की नई सामरिक पकड़

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ग्रेट निकोबार में ₹13,000 करोड़ का ग्रीनफील्ड एयरबेस: मलक्का जलडमरूमध्य पर भारत की नई सामरिक पकड़

सारांश

मलक्का जलडमरूमध्य से महज 40 किलोमीटर दूर, भारत ₹13,000 करोड़ से ग्रेट निकोबार में एक नया ग्रीनफील्ड एयरबेस बना रहा है — आईएनएस बाज के साथ मिलकर यह सुदूर दक्षिण में दोहरी सामरिक ताकत होगी, जो चीन के ऊर्जा आपूर्ति मार्ग की सीधी निगरानी करेगी।

मुख्य बातें

ग्रेट निकोबार द्वीप पर ₹13,000 करोड़ की लागत से संयुक्त उपयोग वाला ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा और नौसैनिक वायु स्टेशन बनाया जाएगा।
परियोजना रक्षा मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के संयुक्त वित्तपोषण से पाँच वर्षों में पूरी होने की उम्मीद है।
नया एयरबेस मलक्का जलडमरूमध्य से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगा — यह मार्ग चीन के 80% कच्चे तेल और 70% एलएनजी आपूर्ति का गलियारा है।
गलाथिया खाड़ी को पाँच वैकल्पिक स्थलों के मूल्यांकन के बाद सर्वाधिक उपयुक्त स्थान चुना गया।
आईएनएस बाज ( 2012 से सक्रिय) से लगभग 30 किलोमीटर दूर नया एयरपोर्ट बनेगा, जिससे क्षेत्र में दो एयरबेस की उपस्थिति होगी।
ग्रेट निकोबार परियोजना में ICTP पोर्ट , टाउनशिप और पावर प्लांट भी शामिल हैं।

भारत सरकार ग्रेट निकोबार द्वीप (GNI) पर ₹13,000 करोड़ की लागत से एक संयुक्त उपयोग वाला ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा और नौसैनिक वायु स्टेशन विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। रक्षा मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय मिलकर इस निवेश को वहन करेंगे, और परियोजना के पाँच वर्षों में पूरा होने की उम्मीद है। यह कदम अंडमान-निकोबार क्षेत्र में भारत की सामरिक उपस्थिति को गुणात्मक रूप से मजबूत करेगा।

सामरिक महत्व: मलक्का से महज 40 किलोमीटर

ग्रेट निकोबार द्वीप समूह 6-डिग्री चैनल के निकट स्थित है और मलक्का जलडमरूमध्य से मात्र लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर है। यह वह समुद्री गलियारा है जिससे दुनिया के कुल ऊर्जा व्यापार का लगभग दो-तिहाई और कंटेनर परिवहन का लगभग आधा हिस्सा गुजरता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इसी मार्ग से चीन के लगभग 80 प्रतिशत कच्चे तेल और 70 प्रतिशत एलएनजी की आपूर्ति होती है — जो इस स्थान को भू-राजनीतिक दृष्टि से असाधारण रूप से संवेदनशील बनाता है।

यह ऐसे समय में आया है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री शक्ति संतुलन को लेकर तनाव बढ़ रहा है और भारत अपनी 'नेकलेस ऑफ डायमंड्स' काट-रणनीति के जवाब में अपनी द्वीपीय क्षमताओं को सुदृढ़ कर रहा है।

ग्रेट निकोबार परियोजना में क्या शामिल है

केंद्र सरकार ने ग्रेट निकोबार द्वीप समूह के समग्र विकास के तहत चार प्रमुख घटकों को शामिल किया है — अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट (ICTP), संयुक्त उपयोग वाला ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा एवं नौसैनिक वायु स्टेशन, टाउनशिप और पावर प्लांट। नया हवाई अड्डा नागरिक और सैन्य, दोनों उद्देश्यों की पूर्ति करेगा — सैन्य संसाधनों की आवाजाही, समुद्री निगरानी, संकट में त्वरित प्रतिक्रिया और अग्रिम क्षेत्रों में रसद (लॉजिस्टिक्स) बनाए रखने की क्षमता इससे उल्लेखनीय रूप से बढ़ेगी।

गलाथिया खाड़ी का चयन क्यों

रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के लिए आईएनएस बाज सहित पाँच वैकल्पिक स्थलों का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। स्थलाकृति (टोपोग्राफी), हवाई नेविगेशन में संभावित बाधाएँ, जनजातीय आबादी पर प्रभाव तथा वनस्पति एवं वन्यजीवों पर असर — इन सभी मानकों की जाँच के बाद गलाथिया खाड़ी को सर्वाधिक उपयुक्त स्थान के रूप में चुना गया।

गौरतलब है कि आईएनएस बाज के उत्तर में 80 मीटर से अधिक ऊँची पहाड़ियाँ हैं, जिनके कारण बड़े विमानों के सुरक्षित संचालन के लिए व्यापक पैमाने पर पहाड़ी कटान और उथले समुद्री तट की ड्रेजिंग आवश्यक होती। इसके अलावा, मौजूदा बुनियादी ढाँचा कोड-4 श्रेणी के रनवे के लिए आवश्यक सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करता और भविष्य में विस्तार की संभावनाएँ भी सीमित थीं।

आईएनएस बाज: पहला एयरबेस और उसकी सीमाएँ

अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भारतीय नौसेना का आईएनएस बाज वर्ष 2012 से सक्रिय है। यह एयरफील्ड प्रारंभ में 3,500 फीट लंबे रनवे के साथ शुरू हुआ था, जिसे बाद में 4,500 फीट तक बढ़ाया गया। विस्तार योजना के तहत इसे 10,000 फीट तक ले जाने का प्रस्ताव था, परंतु इसके लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण और समुद्री क्षेत्र के पुनर्भरण (रीक्लेमेशन) की आवश्यकता थी। अधिकारियों के अनुसार, यदि आईएनएस बाज को ही ब्राउनफील्ड एयरपोर्ट के लिए चुना जाता, तो जनजातीय आबादी, वनस्पति और वन्यजीवों पर अपेक्षाकृत अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ता।

आगे की राह

नई परियोजना के तहत आईएनएस बाज से लगभग 30 किलोमीटर दूर गलाथिया खाड़ी में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकसित किया जाएगा। इस प्रकार भारत के सुदूर दक्षिण में दो एयरबेस की उपस्थिति — एक मौजूदा, एक नया — हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की निगरानी और प्रतिक्रिया क्षमता को नई ऊँचाई देगी। परियोजना के पाँच वर्षों में पूर्ण होने पर यह क्षेत्र वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों पर भारत के सामरिक प्रभाव का एक निर्णायक केंद्र बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ का यह निवेश तब आया है जब चीन ने हिंद महासागर में अपनी नौसैनिक उपस्थिति तेजी से बढ़ाई है और 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति के तहत भारत को घेरने की कोशिशें जारी हैं। हालाँकि, पर्यावरणीय चिंताएँ — विशेष रूप से लेदरबैक कछुओं के प्रजनन स्थल और आदिवासी समुदायों पर प्रभाव — इस परियोजना पर लंबे समय से सवाल उठाती रही हैं, जिनका पूरी तरह समाधान अभी शेष है। पाँच वर्षों की समयसीमा महत्वाकांक्षी है, और असली कसौटी यह होगी कि क्रियान्वयन उतना ही सुदृढ़ होगा जितनी रणनीतिक परिकल्पना।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रेट निकोबार ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना क्या है?
यह ग्रेट निकोबार द्वीप की गलाथिया खाड़ी में ₹13,000 करोड़ की लागत से बनने वाला संयुक्त उपयोग वाला ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा और नौसैनिक वायु स्टेशन है। रक्षा मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय मिलकर इसे पाँच वर्षों में पूरा करने की योजना बना रहे हैं।
ग्रेट निकोबार द्वीप सामरिक दृष्टि से इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
यह द्वीप मलक्का जलडमरूमध्य से मात्र लगभग 40 किलोमीटर दूर है, जो वैश्विक ऊर्जा व्यापार का सबसे व्यस्त समुद्री गलियारा है। इसी मार्ग से चीन के लगभग 80% कच्चे तेल और 70% एलएनजी की आपूर्ति होती है, जिससे यह क्षेत्र भू-राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है।
गलाथिया खाड़ी को ही नए एयरपोर्ट के लिए क्यों चुना गया?
रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, आईएनएस बाज सहित पाँच वैकल्पिक स्थलों का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। स्थलाकृति, हवाई नेविगेशन बाधाएँ, जनजातीय आबादी और वन्यजीवों पर प्रभाव जैसे मानकों पर जाँच के बाद गलाथिया खाड़ी सर्वाधिक उपयुक्त पाई गई।
आईएनएस बाज को ही विस्तारित क्यों नहीं किया गया?
आईएनएस बाज के उत्तर में 80 मीटर से अधिक ऊँची पहाड़ियाँ बड़े विमानों के संचालन में बाधा डालती हैं और कोड-4 रनवे के लिए आवश्यक सुरक्षा मानक वहाँ उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा, मौजूदा बुनियादी ढाँचे को हटाना पड़ता और भविष्य में विस्तार की संभावनाएँ भी सीमित थीं।
इस परियोजना के पूरा होने के बाद क्षेत्र में क्या बदलेगा?
नया एयरबेस बनने के बाद भारत के सुदूर दक्षिण में दो एयरबेस — आईएनएस बाज और गलाथिया खाड़ी का नया स्टेशन — सक्रिय होंगे। इससे समुद्री निगरानी, सैन्य रसद, संकट प्रतिक्रिया और हिंद महासागर में भारत की सामरिक उपस्थिति उल्लेखनीय रूप से मजबूत होगी।
राष्ट्र प्रेस
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