2 नवंबर 2026
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ज्ञानेश कुमार सिर्फ कठपुतली, डोर और कोई खींच रहा है: शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत

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ज्ञानेश कुमार सिर्फ कठपुतली, डोर और कोई खींच रहा है: शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने 2 नवंबर को रामलीला मैदान की इंडिया ब्लॉक रैली को 25-30 साल में दिल्ली की सबसे बड़ी रैली बताया। ज्ञानेश कुमार को 'कठपुतली' करार देते हुए उन्होंने असली निशाना केंद्र सरकार पर साधा और मुंबई पुलिस से 'गुलाम न बनने' की अपील की।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने 2 नवंबर 2026 को रामलीला मैदान की इंडिया ब्लॉक रैली को पिछले 25-30 वर्षों में दिल्ली की सबसे बड़ी रैली बताया।
सावंत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 'कठपुतली' करार दिया और कहा कि असली निशाना केंद्र सरकार है।
दोपहर 12 बजे खड़गे निवास से चले सावंत दोपहर 3 बजे तक रामलीला मैदान के गेट तक ही पहुँच सके — भीड़ इतनी थी कि गाड़ियाँ एक इंच नहीं हिलीं।
मुंबई पुलिस पर तुषार गांधी को घसीटकर हिरासत में लेने का आरोप लगाते हुए सावंत ने पुलिसकर्मियों से 'गुलाम न बनने' की अपील की।
सावंत ने सोनिया गांधी द्वारा राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों की रिहाई के लिए पत्र लिखने का भी उल्लेख किया।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद अरविंद सावंत ने 2 नवंबर 2026 को रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया ब्लॉक की महारैली को ऐतिहासिक करार देते हुए केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि पिछले 25-30 वर्षों में दिल्ली में इस पैमाने की रैली नहीं देखी गई। साथ ही उन्होंने मुंबई पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी तीखा सवाल उठाया और कहा कि संविधान ने सभी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार दिया है।

रैली का नज़ारा: 'गाड़ियाँ एक इंच नहीं हिलीं'

सावंत ने रैली की विशालता का वर्णन करते हुए बताया कि वे दोपहर 12 बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के निवास से निकले और दोपहर 3 बजे तक रामलीला मैदान के गेट तक ही पहुँच सके। उन्होंने कहा, 'लोगों की भारी संख्या के कारण गाड़ियाँ एक इंच भी नहीं हिल पा रही थीं।' उनके अनुसार, रामलीला मैदान में इस पैमाने की राजनीतिक भीड़ उन्होंने अपने 25-30 साल के राजनीतिक जीवन में पहले कभी नहीं देखी।

ज्ञानेश कुमार पर तीखा प्रहार

सांसद सावंत ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध नहीं था। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार 'महज एक प्रतिनिधि हैं — एक कठपुतली, जिनकी डोर कोई और खींच रहा है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह विरोध केंद्र सरकार की उन गतिविधियों के खिलाफ था, जिन्हें वे 'रावण का काम' बताते हैं। उन्होंने रामलीला मैदान के ऐतिहासिक प्रतीकवाद का हवाला देते हुए कहा कि जब भी वहाँ कोई आंदोलन हुआ है, 'रावण हारा है।'

पुलिस कार्यशैली पर सीधा सवाल

सावंत ने मुंबई पुलिस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बच्चों को हिरासत में लेकर उन्हें रैली की अनुमति देना विरोधाभासी है। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी को पुलिस द्वारा घसीटकर गाड़ी में बैठाने की घटना का भी उल्लेख किया। सावंत ने हाथ जोड़कर पुलिसकर्मियों से अपील की — 'वर्दी पहनते हैं तो गुलाम मत बनिए। संविधान ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार सभी को दिया है।'

कांग्रेस और इतिहास पर टिप्पणी

सावंत ने यह भी कहा कि राहुल गांधी या महा विकास अघाड़ी की रैलियों में ज्ञानेश कुमार को लेकर उठे सवालों का सीधा जवाब नहीं दिया गया। उनका कहना था कि नेता बार-बार इतिहास के पुराने पन्नों की ओर मुड़ते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सोनिया गांधी ने एक बार उन लोगों की रिहाई के लिए पत्र लिखा था जो राजीव गांधी की हत्या में शामिल थे — और इसे 'बड़े दिल' का उदाहरण बताया।

शिवसेना (यूबीटी) की वैचारिक पहचान

सावंत ने अपनी पार्टी की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) दिवंगत बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा और मूल्यों की वाहक पार्टी है। उन्होंने सत्ता पक्ष पर 'ड्रामा' का आरोप लगाते हुए कहा कि असली 'ड्रामा क्वीन' कौन हैं, यह देश और दुनिया भली-भाँति देख रही है। इंडिया ब्लॉक की यह रैली आगामी राजनीतिक मुकाबले का संकेत देती है, और विपक्ष की एकजुटता की परीक्षा अब मैदान से बाहर, नीतिगत ज़मीन पर होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह आवेग ठोस संगठनात्मक ताकत में बदलता है या महज़ एक दिन की सुर्खी बनकर रह जाता है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरविंद सावंत ने ज्ञानेश कुमार को 'कठपुतली' क्यों कहा?
सावंत का कहना है कि ज्ञानेश कुमार महज एक प्रतिनिधि हैं और उनकी 'डोर कोई और खींच रहा है' — यानी वे केंद्र सरकार की ओर इशारा कर रहे थे। उनके अनुसार, इंडिया ब्लॉक का असली विरोध केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली के खिलाफ था, न कि केवल एक अधिकारी के विरुद्ध।
रामलीला मैदान की इंडिया ब्लॉक रैली कब हुई और इसकी खासियत क्या थी?
यह रैली 2 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित हुई। सावंत के अनुसार, पिछले 25-30 वर्षों में दिल्ली में इस पैमाने की कोई राजनीतिक रैली नहीं हुई — भीड़ इतनी थी कि दोपहर 12 बजे खड़गे निवास से चली गाड़ियाँ दोपहर 3 बजे तक गेट तक ही पहुँच सकीं।
सावंत ने मुंबई पुलिस पर क्या आरोप लगाए?
सावंत ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बच्चों को हिरासत में लिया और फिर उन्हें रैली की अनुमति दे दी, जो विरोधाभासी है। उन्होंने तुषार गांधी को घसीटकर गाड़ी में बैठाने की घटना का भी ज़िक्र किया और पुलिसकर्मियों से 'गुलाम न बनने' की अपील की।
शिवसेना (यूबीटी) का इंडिया ब्लॉक में क्या रुख है?
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) इंडिया ब्लॉक की सक्रिय सदस्य है और महा विकास अघाड़ी का भी हिस्सा है। सावंत ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी दिवंगत बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को आगे बढ़ाती है और केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी एकता में पूरी तरह शामिल है।
सावंत ने सोनिया गांधी और राजीव गांधी हत्याकांड का ज़िक्र किस संदर्भ में किया?
सावंत ने यह बात उस संदर्भ में कही जब वे कांग्रेस के इतिहास पर हो रही बहस का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी ने राजीव गांधी की हत्या में शामिल लोगों की रिहाई के लिए पत्र लिखा था और इसे उन्होंने 'बड़े दिल' का उदाहरण बताया।
राष्ट्र प्रेस
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