ज्ञानेश कुमार सिर्फ कठपुतली, डोर और कोई खींच रहा है: शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद अरविंद सावंत ने 2 नवंबर 2026 को रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया ब्लॉक की महारैली को ऐतिहासिक करार देते हुए केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि पिछले 25-30 वर्षों में दिल्ली में इस पैमाने की रैली नहीं देखी गई। साथ ही उन्होंने मुंबई पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी तीखा सवाल उठाया और कहा कि संविधान ने सभी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार दिया है।
रैली का नज़ारा: 'गाड़ियाँ एक इंच नहीं हिलीं'
सावंत ने रैली की विशालता का वर्णन करते हुए बताया कि वे दोपहर 12 बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के निवास से निकले और दोपहर 3 बजे तक रामलीला मैदान के गेट तक ही पहुँच सके। उन्होंने कहा, 'लोगों की भारी संख्या के कारण गाड़ियाँ एक इंच भी नहीं हिल पा रही थीं।' उनके अनुसार, रामलीला मैदान में इस पैमाने की राजनीतिक भीड़ उन्होंने अपने 25-30 साल के राजनीतिक जीवन में पहले कभी नहीं देखी।
ज्ञानेश कुमार पर तीखा प्रहार
सांसद सावंत ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध नहीं था। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार 'महज एक प्रतिनिधि हैं — एक कठपुतली, जिनकी डोर कोई और खींच रहा है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह विरोध केंद्र सरकार की उन गतिविधियों के खिलाफ था, जिन्हें वे 'रावण का काम' बताते हैं। उन्होंने रामलीला मैदान के ऐतिहासिक प्रतीकवाद का हवाला देते हुए कहा कि जब भी वहाँ कोई आंदोलन हुआ है, 'रावण हारा है।'
पुलिस कार्यशैली पर सीधा सवाल
सावंत ने मुंबई पुलिस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बच्चों को हिरासत में लेकर उन्हें रैली की अनुमति देना विरोधाभासी है। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी को पुलिस द्वारा घसीटकर गाड़ी में बैठाने की घटना का भी उल्लेख किया। सावंत ने हाथ जोड़कर पुलिसकर्मियों से अपील की — 'वर्दी पहनते हैं तो गुलाम मत बनिए। संविधान ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार सभी को दिया है।'
कांग्रेस और इतिहास पर टिप्पणी
सावंत ने यह भी कहा कि राहुल गांधी या महा विकास अघाड़ी की रैलियों में ज्ञानेश कुमार को लेकर उठे सवालों का सीधा जवाब नहीं दिया गया। उनका कहना था कि नेता बार-बार इतिहास के पुराने पन्नों की ओर मुड़ते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सोनिया गांधी ने एक बार उन लोगों की रिहाई के लिए पत्र लिखा था जो राजीव गांधी की हत्या में शामिल थे — और इसे 'बड़े दिल' का उदाहरण बताया।
शिवसेना (यूबीटी) की वैचारिक पहचान
सावंत ने अपनी पार्टी की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) दिवंगत बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा और मूल्यों की वाहक पार्टी है। उन्होंने सत्ता पक्ष पर 'ड्रामा' का आरोप लगाते हुए कहा कि असली 'ड्रामा क्वीन' कौन हैं, यह देश और दुनिया भली-भाँति देख रही है। इंडिया ब्लॉक की यह रैली आगामी राजनीतिक मुकाबले का संकेत देती है, और विपक्ष की एकजुटता की परीक्षा अब मैदान से बाहर, नीतिगत ज़मीन पर होगी।