6 नवंबर 2026
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आईआईएम लखनऊ और यूपीएसआरएलएम में समझौता: 150 ग्रामीण महिला उद्यमों को 18 महीने का प्रशिक्षण

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आईआईएम लखनऊ और यूपीएसआरएलएम में समझौता: 150 ग्रामीण महिला उद्यमों को 18 महीने का प्रशिक्षण

सारांश

उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिला उद्यमिता को संस्थागत आधार देने की कोशिश — आईआईएम लखनऊ की प्रबंधन विशेषज्ञता अब सीधे स्वयं सहायता समूहों तक पहुँचेगी। 150 उद्यमों को 18 महीने का प्रशिक्षण, चुनिंदा को अनुदान और बाकी को ब्याज मुक्त ऋण — यह प्रयोग सफल हुआ तो अन्य राज्यों के लिए मॉडल बन सकता है।

मुख्य बातें

आईआईएम लखनऊ और यूपीएसआरएलएम के बीच 6 नवंबर 2026 को औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर हुए।
उत्तर प्रदेश की 150 महिला-नेतृत्व वाली उद्यम इकाइयों को 18 महीने तक विशेषज्ञ प्रशिक्षण मिलेगा।
18 उत्कृष्ट उद्यमों को चैलेंज फंड से अनुदान; शेष 132 उद्यम ब्याज मुक्त ऋण के पात्र होंगे।
कार्यक्रम का लक्ष्य चयनित उद्यमों के राजस्व में कम से कम 15 प्रतिशत की वृद्धि करना है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की पहल पर कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई।
यह कार्यक्रम दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित होगा।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 6 नवंबर 2026 को लखनऊ में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) लखनऊ और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) के बीच एक औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी के अंतर्गत प्रदेश की 150 महिला-नेतृत्व वाली उद्यम इकाइयों को 18 महीने तक व्यवसाय प्रबंधन, डिजिटल तकनीक और बाजार संपर्क का विशेषज्ञ प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह कदम स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को सीमित आजीविका से उठाकर सक्षम उद्यमी बनाने के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है।

समझौते का विवरण

आईआईएम लखनऊ के निदेशक यामिनी भूषण पाण्डेय और मिशन निदेशक अरुण कुमार ने अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता आईआईएम लखनऊ के एंटरप्राइज इनक्यूबेशन सेंटर (आईआईएमएल-ईआईसी) और यूपीएसआरएलएम के बीच हुआ है। दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित इस कार्यक्रम में व्यवसाय प्रबंधन, नियामकीय अनुपालन, डिजिटल प्रशिक्षण, बाजार संपर्क और औपचारिक ऋण तक पहुँच जैसे विषय शामिल हैं।

वित्तीय सहायता की संरचना

कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित 18 उत्कृष्ट उद्यमों को चैलेंज फंड के माध्यम से अनुदान दिया जाएगा। शेष 132 उद्यम सामुदायिक स्तरीय संघ (सीएलएफ) के ज़रिये ब्याज मुक्त ऋण प्राप्त करने के पात्र होंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य चयनित उद्यमों के राजस्व में कम से कम 15 प्रतिशत की वृद्धि करना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के नए अवसर सृजित करना है।

उप मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं में उद्यम चलाने की क्षमता और मेहनत करने का जज़्बा है। उन्होंने कहा, 'सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण महिलाएं केवल आजीविका चलाने तक सीमित न रहें, बल्कि सफल उद्यमी बनें और दूसरे लोगों के लिए भी रोज़गार के अवसर पैदा करें।' मौर्य ने पूर्ववर्ती सरकारों पर भी निशाना साधा और कहा कि पहले '100 में 80 हमारा' का नियम अपनाया जाता था, जबकि मौजूदा सरकार गरीबों के हक का 100 प्रतिशत पैसा उनके खातों तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

आम जनता पर असर और आगे की राह

यह पहल ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों का नेटवर्क तेज़ी से विस्तार पा रहा है। आईआईएम लखनऊ की प्रबंधन विशेषज्ञता और यूपीएसआरएलएम के व्यापक ज़मीनी नेटवर्क को एक साथ जोड़कर महिला उद्यमियों को संस्थागत समर्थन देना इस मॉडल की विशेषता है। गौरतलब है कि समझौते का मसौदा तैयार होने से पहले मौर्य ने संबंधित अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठकें कर कार्यक्रम की रूपरेखा में पारदर्शिता और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। यदि यह मॉडल सफल रहा, तो इसे अन्य राज्यों में भी अपनाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी। 150 उद्यमों की संख्या उत्तर प्रदेश के विशाल ग्रामीण नेटवर्क के सामने बेहद सीमित है — यह एक पायलट से अधिक नहीं। गौरतलब है कि इससे पहले भी इसी तरह की सरकारी-शैक्षणिक साझेदारियाँ घोषणाओं में प्रभावशाली रही हैं, परंतु ज़मीनी स्तर पर टिकाऊ उद्यम बनाने में उनकी सफलता मिश्रित रही है। राजस्व में 15% वृद्धि का लक्ष्य मापनीय है, किंतु इसकी स्वतंत्र निगरानी की व्यवस्था सार्वजनिक नहीं की गई है।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईआईएम लखनऊ और यूपीएसआरएलएम के बीच हुए समझौते का उद्देश्य क्या है?
यह समझौता उत्तर प्रदेश की 150 ग्रामीण महिला-नेतृत्व वाली उद्यम इकाइयों को 18 महीने तक व्यवसाय प्रबंधन, डिजिटल तकनीक और बाजार संपर्क का प्रशिक्षण देने के लिए किया गया है। इसका लक्ष्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को सक्षम उद्यमी बनाना और उनके उद्यमों का राजस्व कम से कम 15 प्रतिशत बढ़ाना है।
इस कार्यक्रम में महिला उद्यमियों को क्या-क्या सुविधाएँ मिलेंगी?
चयनित महिला उद्यमियों को व्यवसाय प्रबंधन, डिजिटल प्रशिक्षण, बाजार संपर्क, नियामकीय अनुपालन और औपचारिक ऋण तक पहुँच बनाने में सहायता मिलेगी। इसके साथ ही 18 उत्कृष्ट उद्यमों को चैलेंज फंड से अनुदान और शेष 132 उद्यमों को ब्याज मुक्त ऋण की सुविधा होगी।
इस कार्यक्रम से कितने उद्यमों को लाभ मिलेगा और कितने समय के लिए?
इस कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 150 महिला-नेतृत्व वाली उद्यम इकाइयों को 18 महीने तक विशेषज्ञ मार्गदर्शन और प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें से 18 को सीधे अनुदान और 132 को ब्याज मुक्त ऋण मिलेगा।
इस पहल में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की क्या भूमिका है?
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समझौते का मसौदा तैयार होने से पहले संबंधित अधिकारियों और संस्थानों के साथ बैठकें कर कार्यक्रम की रूपरेखा में पारदर्शिता और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। उनकी पहल पर ही इस साझेदारी को अंतिम रूप दिया गया।
यह कार्यक्रम किस केंद्रीय योजना के तहत चलाया जाएगा?
यह कार्यक्रम दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित किया जाएगा। इसमें आईआईएम लखनऊ के एंटरप्राइज इनक्यूबेशन सेंटर (आईआईएमएल-ईआईसी) की विशेषज्ञता और यूपीएसआरएलएम के ज़मीनी नेटवर्क का संयुक्त उपयोग होगा।
राष्ट्र प्रेस
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