रामलीला मैदान रैली पर सियासी घमासान: BJP ने कहा 'फ्लॉप शो', इंडिया ब्लॉक बोला 'ऐतिहासिक आंदोलन'
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 1 नवंबर 2026 को रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया ब्लॉक की रैली के एक दिन बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे पूर्ण विफलता बताया, जबकि विपक्षी गठबंधन ने इसे देश के इतिहास का सबसे बड़ा जन आंदोलन करार दिया।
भाजपा की प्रतिक्रिया: 'फ्लॉप रैली, अरबों का नुकसान'
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने रैली को 'भयंकर फ्लॉप' बताते हुए कहा, "राहुल गांधी के नेतृत्व में हुई यह रैली पूरी तरह विफल रही। 10 लाख लोगों को लाने का दावा किया गया था, लेकिन मुश्किल से 20 25 हजार लोग ही जमा हुए। 28,000 कुर्सियाँ लगाई गई थीं, जिनमें से 8 10 हजार कुर्सियाँ खाली रह गईं।"
शुक्ला ने आगे कहा कि दीपावली के अवसर पर इस रैली की वजह से दिल्ली के करीब 3 लाख व्यावसायिक प्रतिष्ठान प्रभावित रहे और व्यापारियों को अरबों रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और उनकी पार्टी ने हिंदुओं के सबसे बड़े पर्व पर देश की अर्थव्यवस्था को ठेस पहुँचाने का काम किया है।
ईवीएम बनाम बैलेट पेपर की बहस पर शुक्ला ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ईवीएम की पारदर्शिता पर अपनी राय दे चुका है और दुनिया के कई देशों में इस प्रणाली का समर्थन किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन राज्यों में बैलेट पेपर पर मतदान हुआ वहाँ भी कांग्रेस का प्रदर्शन खराब रहा है।
विपक्ष का पलटवार: 'ऐतिहासिक रैली, BJP के पास मुद्दे नहीं'
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के प्रवक्ता अवधेश शुक्ला ने रैली को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह अब तक का सबसे बड़ा जन आंदोलन है। उनके अनुसार, "भाजपा के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए वह इसे फ्लॉप बता रही है। सुबह जाकर फोटो या वीडियो बना लेने से देश में नकारात्मक माहौल फैलाया जा रहा है।"
अवधेश शुक्ला ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि पूरे इंडिया एलायंस का चुनाव आयोग पर से भरोसा उठ चुका है और देशभर से उनके इस्तीफे की माँग हो रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट वोट चोरी के सबूत देख चुका है और अप्रैल तक सरकार गिरने की बात कही। गौरतलब है कि ये दावे विपक्ष के अपने हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कांग्रेस नेता का बयान: 'दस लाख लोग आए, व्यापार भी बढ़ा'
तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि BJP अध्यक्ष जे.पी. नड्डा को रैली में आकर खुद देखना चाहिए था। उन्होंने दावा किया कि पूरे भारत, जिसमें तमिलनाडु भी शामिल है, से 10 लाख से अधिक लोग दिल्ली पहुँचे थे। यह दावा भाजपा के आँकड़ों से सीधे टकराता है और दोनों पक्षों की संख्याओं की स्वतंत्र सत्यापन अभी बाकी है।
टैगोर ने व्यापार प्रभावित होने के आरोपों को भी खारिज करते हुए कहा कि रैली के कारण बिक्री में वृद्धि हुई और नए अवसर पैदा हुए। उन्होंने व्यापारी संगठनों के दावों को 'फर्जी' बताया।
रैली की पृष्ठभूमि और मुख्य माँगें
यह ऐसे समय में आया है जब इंडिया ब्लॉक लगातार चुनावी प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा है। रैली की प्रमुख माँगों में ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराना और CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा शामिल था। गौरतलब है कि विपक्ष इससे पहले भी 2025 तक तीन लोकसभा और 56 विधानसभा चुनावों में कथित तौर पर हार का सामना कर चुका है — एक तथ्य जिसे भाजपा प्रवक्ता ने अपने तर्क में उद्धृत किया।
आगे क्या होगा
रैली की भीड़ के आँकड़ों और व्यापारिक नुकसान के दावों पर दोनों पक्षों के बीच विवाद जारी रहने की संभावना है। विपक्ष के अनुसार यह आंदोलन जारी रहेगा और अगले चरण की घोषणा जल्द हो सकती है। देखना यह होगा कि इंडिया ब्लॉक इस रैली की राजनीतिक ऊर्जा को संगठित रूप में कितना बदल पाता है।