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रामलीला मैदान रैली पर सियासी घमासान: BJP ने कहा 'फ्लॉप शो', इंडिया ब्लॉक बोला 'ऐतिहासिक आंदोलन'

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रामलीला मैदान रैली पर सियासी घमासान: BJP ने कहा 'फ्लॉप शो', इंडिया ब्लॉक बोला 'ऐतिहासिक आंदोलन'

सारांश

रामलीला मैदान की रैली खत्म हुई, लेकिन सियासी जंग अभी शुरू हुई है। BJP के 20 25 हजार बनाम विपक्ष के 10 लाख के दावे, दीपावली पर 3 लाख प्रतिष्ठान प्रभावित होने के आरोप और CEC के इस्तीफे की माँग — यह रैली अब खुद से बड़ी राजनीतिक जंग बन चुकी है।

मुख्य बातें

इंडिया ब्लॉक ने 1 नवंबर 2026 को रामलीला मैदान, नई दिल्ली में रैली आयोजित की जिसमें ईवीएम और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग की गई।
भाजपा प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने दावा किया कि 28,000 कुर्सियों में 8 10 हजार खाली रहीं और केवल 20 25 हजार लोग पहुँचे।
BJP ने आरोप लगाया कि रैली के कारण दिल्ली के 3 लाख व्यावसायिक प्रतिष्ठान प्रभावित रहे और दीपावली पर अरबों रुपये का नुकसान हुआ।
शिवसेना (UBT) प्रवक्ता अवधेश शुक्ला ने इसे 'अब तक का सबसे बड़ा ऐतिहासिक आंदोलन' बताया और कहा अप्रैल तक सरकार गिरेगी।
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने दावा किया कि 10 लाख से अधिक लोग पहुँचे और व्यापार में वृद्धि हुई।
दोनों पक्षों के भीड़ और आर्थिक प्रभाव के दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

नई दिल्ली में 1 नवंबर 2026 को रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया ब्लॉक की रैली के एक दिन बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे पूर्ण विफलता बताया, जबकि विपक्षी गठबंधन ने इसे देश के इतिहास का सबसे बड़ा जन आंदोलन करार दिया।

भाजपा की प्रतिक्रिया: 'फ्लॉप रैली, अरबों का नुकसान'

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने रैली को 'भयंकर फ्लॉप' बताते हुए कहा, "राहुल गांधी के नेतृत्व में हुई यह रैली पूरी तरह विफल रही। 10 लाख लोगों को लाने का दावा किया गया था, लेकिन मुश्किल से 20 25 हजार लोग ही जमा हुए। 28,000 कुर्सियाँ लगाई गई थीं, जिनमें से 8 10 हजार कुर्सियाँ खाली रह गईं।"

शुक्ला ने आगे कहा कि दीपावली के अवसर पर इस रैली की वजह से दिल्ली के करीब 3 लाख व्यावसायिक प्रतिष्ठान प्रभावित रहे और व्यापारियों को अरबों रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और उनकी पार्टी ने हिंदुओं के सबसे बड़े पर्व पर देश की अर्थव्यवस्था को ठेस पहुँचाने का काम किया है।

ईवीएम बनाम बैलेट पेपर की बहस पर शुक्ला ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ईवीएम की पारदर्शिता पर अपनी राय दे चुका है और दुनिया के कई देशों में इस प्रणाली का समर्थन किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन राज्यों में बैलेट पेपर पर मतदान हुआ वहाँ भी कांग्रेस का प्रदर्शन खराब रहा है।

विपक्ष का पलटवार: 'ऐतिहासिक रैली, BJP के पास मुद्दे नहीं'

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के प्रवक्ता अवधेश शुक्ला ने रैली को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह अब तक का सबसे बड़ा जन आंदोलन है। उनके अनुसार, "भाजपा के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए वह इसे फ्लॉप बता रही है। सुबह जाकर फोटो या वीडियो बना लेने से देश में नकारात्मक माहौल फैलाया जा रहा है।"

अवधेश शुक्ला ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि पूरे इंडिया एलायंस का चुनाव आयोग पर से भरोसा उठ चुका है और देशभर से उनके इस्तीफे की माँग हो रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट वोट चोरी के सबूत देख चुका है और अप्रैल तक सरकार गिरने की बात कही। गौरतलब है कि ये दावे विपक्ष के अपने हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

कांग्रेस नेता का बयान: 'दस लाख लोग आए, व्यापार भी बढ़ा'

तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि BJP अध्यक्ष जे.पी. नड्डा को रैली में आकर खुद देखना चाहिए था। उन्होंने दावा किया कि पूरे भारत, जिसमें तमिलनाडु भी शामिल है, से 10 लाख से अधिक लोग दिल्ली पहुँचे थे। यह दावा भाजपा के आँकड़ों से सीधे टकराता है और दोनों पक्षों की संख्याओं की स्वतंत्र सत्यापन अभी बाकी है।

टैगोर ने व्यापार प्रभावित होने के आरोपों को भी खारिज करते हुए कहा कि रैली के कारण बिक्री में वृद्धि हुई और नए अवसर पैदा हुए। उन्होंने व्यापारी संगठनों के दावों को 'फर्जी' बताया।

रैली की पृष्ठभूमि और मुख्य माँगें

यह ऐसे समय में आया है जब इंडिया ब्लॉक लगातार चुनावी प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा है। रैली की प्रमुख माँगों में ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराना और CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा शामिल था। गौरतलब है कि विपक्ष इससे पहले भी 2025 तक तीन लोकसभा और 56 विधानसभा चुनावों में कथित तौर पर हार का सामना कर चुका है — एक तथ्य जिसे भाजपा प्रवक्ता ने अपने तर्क में उद्धृत किया।

आगे क्या होगा

रैली की भीड़ के आँकड़ों और व्यापारिक नुकसान के दावों पर दोनों पक्षों के बीच विवाद जारी रहने की संभावना है। विपक्ष के अनुसार यह आंदोलन जारी रहेगा और अगले चरण की घोषणा जल्द हो सकती है। देखना यह होगा कि इंडिया ब्लॉक इस रैली की राजनीतिक ऊर्जा को संगठित रूप में कितना बदल पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह भारतीय राजनीति की एक पुरानी परंपरा है — जहाँ 'जीत' का निर्माण अक्सर मैदान में नहीं, बल्कि प्रेस ब्रीफिंग में होता है। लेकिन असली सवाल यह है कि इंडिया ब्लॉक रैली की भावनात्मक ऊर्जा को क्या कोई ठोस राजनीतिक रणनीति में बदल पाएगा? CEC और ईवीएम पर माँगें तब तक प्रतीकात्मक रहेंगी जब तक कोई संस्थागत रास्ता न हो। दीपावली के दिन रैली का समय चुनना विपक्ष को रणनीतिक रूप से कमजोर करता है — यह भाजपा को एक तैयार नरेटिव देता है जो 'हिंदू विरोध' का है। मुख्यधारा की कवरेज में यह बिंदु अक्सर दब जाता है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामलीला मैदान में इंडिया ब्लॉक की रैली क्यों हुई?
यह रैली 1 नवंबर 2026 को इंडिया ब्लॉक ने ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर आयोजित की। रैली में राहुल गांधी समेत विपक्षी गठबंधन के कई नेता शामिल हुए।
BJP ने रैली को फ्लॉप क्यों बताया?
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने दावा किया कि 10 लाख के वादे के बावजूद केवल 20 25 हजार लोग पहुँचे और 28,000 में से 8 10 हजार कुर्सियाँ खाली रहीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दीपावली पर 3 लाख व्यावसायिक प्रतिष्ठान प्रभावित रहे।
विपक्ष ने BJP के दावों का क्या जवाब दिया?
शिवसेना (UBT) प्रवक्ता अवधेश शुक्ला और कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने रैली को ऐतिहासिक बताया और 10 लाख से अधिक उपस्थिति का दावा किया। विपक्ष ने व्यापार नुकसान के दावों को भी फर्जी बताया। दोनों पक्षों के आँकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद क्या है?
इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर वोट चोरी में संलिप्तता के आरोप लगाते हुए इस्तीफे की माँग की है। यह आरोप विपक्ष के दावे हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इस रैली का राजनीतिक महत्व क्या है?
यह रैली ऐसे समय आई जब इंडिया ब्लॉक कथित तौर पर 2025 तक लोकसभा और विधानसभा चुनावों में लगातार हार का सामना कर चुका है। विपक्ष इसे जन समर्थन की वापसी का संकेत बता रहा है, जबकि भाजपा इसे हताशे का प्रदर्शन कह रही है।
राष्ट्र प्रेस
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