भारत में सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक जागरूकता अभियान का आगाज

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भारत में सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक जागरूकता अभियान का आगाज

सारांश

भारत में सड़क सुरक्षा को बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष दूत जीन टॉड ने 'सुरक्षा का संदेश बनाएं' अभियान की शुरुआत की है। इसमें विभिन्न हस्तियां सड़क सुरक्षा के उपायों को प्रमोट करेंगी, जिससे सड़क हादसों की संख्या में कमी लाने का प्रयास किया जाएगा।

Key Takeaways

  • ग्लोबल अवेयरनेस कैंपेन का लक्ष्य सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देना है।
  • प्रसिद्ध हस्तियों का समर्थन इस अभियान की ताकत है।
  • सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में कमी लाने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है।
  • भारत में हर साल 153,972 लोग सड़क हादसों में मारे जाते हैं।
  • यूएन और अन्य संगठनों का सहयोग महत्वपूर्ण है।

नई दिल्ली, 24 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के लिए सड़क सुरक्षा के विशेष दूत जीन टॉड ने भारत में सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने हेतु एक वैश्विक जागरूकता अभियान 'सुरक्षा का संदेश बनाएं' लॉन्च किया। इस अभियान में विभिन्न प्रसिद्ध हस्तियां सड़क सुरक्षा को सुधारने के लिए रोज़मर्रा के उपायों को प्रचारित करती नजर आएंगी।

इन बयानों वाले डिजिटल बिलबोर्ड और पोस्टर भारत के चार प्रमुख शहरों, नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और बैंगलोर में प्रदर्शित होंगे। इसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों के नेताओं को सड़क सुरक्षा में सहयोग देने के महत्व को उजागर करना है। इस अभियान को सोशल मीडिया पर भी साझा किया जाएगा।

पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने इस अभियान का समर्थन करते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने सड़क सुरक्षा के लिए वैश्विक चैंपियंस में शामिल होने का अपना समर्थन प्रकट किया।

जीन टॉड ने कहा, “सड़क हादसे पूरी दुनिया में एक गंभीर महामारी बन चुके हैं, और भारत में हर साल हजारों लोग इसकी वजह से अपनी जान गंवा रहे हैं। यह पूरे देश के परिवारों और समुदायों पर गहरा प्रभाव डालता है। एक ऐसे देश में जहां मोबिलिटी तेजी से बढ़ रही है, सड़क सुरक्षा पर सामूहिक प्रयास करने से हम सड़क पर होने वाली घटनाओं की संख्या को कम कर सकते हैं।”

यह दौरा माराकेश डिक्लेरेशन के 11 महीने बाद हो रहा है, जहां यूएन सदस्यों ने सड़क सुरक्षा के लिए त्वरित कार्रवाई करने पर सहमति जताई थी। लक्ष्य 2030 तक सड़क हादसों में होने वाली मौतों की संख्या को आधा करना है।

भारत में सड़क दुर्घटनाएं एक बड़ी जन स्वास्थ्य समस्या बन गई हैं, जिनसे हर साल लगभग 153,972 लोगों की जान जाती है और मृत्यु दर 15.4 प्रति 100,000 है। पैदल चलने वाले, साइकिल चलाने वाले और मोटरसाइकिल चलाने वाले खास तौर पर जोखिम में होते हैं।

यूएन ने सड़क सुरक्षा के लिए एक प्रोजेक्ट भी शुरू किया है, जिसका नाम है 'भारत में सड़क सुरक्षा के लिए सतत वित्तपोषण: एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण'। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), यूनिसेफ, और यूएनईएससीएपी के तकनीकी सहयोग से लागू किया गया है। इस परियोजना का उद्देश्य पूरे भारत में सड़क सुरक्षा को सशक्त बनाना है।

भारत में यह प्रोजेक्ट यूएन रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर कार्यालय के सहयोग से राजस्थान, केरल, तमिलनाडु और असम राज्यों में लागू किया जा रहा है। यह पहल एक समन्वित और टिकाऊ सड़क सुरक्षा वित्तपोषण ढांचे का निर्माण करने पर केंद्रित है, ताकि सड़क सुरक्षा की कार्रवाई योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके और सड़क पर होने वाली मौतों और गंभीर चोटों की संख्या को कम किया जा सके।

Point of View

बल्कि यह विभिन्न क्षेत्रों के नेताओं को भी सहयोग में शामिल करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे सड़क पर होने वाली दुर्घटनाओं की संख्या में कमी लाने में मदद मिलेगी, जो एक गंभीर समस्या है।
NationPress
25/02/2026

Frequently Asked Questions

यह अभियान कब शुरू हुआ?
यह अभियान 24 फरवरी को शुरू हुआ।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देना और लोगों को जागरूक करना है।
कौन-कौन सी हस्तियां इस अभियान का समर्थन कर रही हैं?
इसमें पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर सहित कई प्रसिद्ध हस्तियां शामिल हैं।
कौन सा संगठन इस अभियान को समर्थन दे रहा है?
इस अभियान को संयुक्त राष्ट्र और इसके विभिन्न संगठनों द्वारा समर्थन दिया जा रहा है।
भारत में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या कितनी है?
भारत में हर साल लगभग 153,972 लोग सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाते हैं।
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