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DMK विधायक मार्कंडेयन से 13 घंटे की पूछताछ, बेटे अक्षय का पुलिस पर डराने-धमकाने का आरोप

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DMK विधायक मार्कंडेयन से 13 घंटे की पूछताछ, बेटे अक्षय का पुलिस पर डराने-धमकाने का आरोप

सारांश

DMK विधायक मार्कंडेयन की 13 घंटे की पूछताछ और 14 दिन की न्यायिक हिरासत ने तमिलनाडु में नया राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। बेटे अक्षय का आरोप है कि पुलिस ने बीमार पिता को डराया और सत्तारूढ़ दल के एजेंडे के अनुसार बयान देने का दबाव बनाया — परिवार अब अदालत का दरवाज़ा खटखटाएगा।

मुख्य बातें

DMK विधायक जीवी मार्कंडेयन को सोमवार को तूतीकोरिन पुलिस ने मुख्यमंत्री सी.
जोसेफ विजय के खिलाफ दिए कथित धमकी भरे बयान के मामले में गिरफ्तार किया।
पुलिस ने विधायक से करीब 13 घंटे तक पूछताछ की, जबकि विवादित भाषण केवल पाँच मिनट का था।
बेटे अक्षय ने आरोप लगाया कि पूछताछ के दौरान मधुमेह और हृदय रोग से पीड़ित विधायक को डराया-धमकाया गया।
स्थानीय अदालत ने मार्कंडेयन को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा।
परिवार ने पुलिस की कथित ज़्यादती के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की घोषणा की है।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के विधायक जीवी मार्कंडेयन की गिरफ्तारी और उनसे हुई लंबी पूछताछ को लेकर तूतीकोरिन में राजनीतिक तनाव मंगलवार, 21 जुलाई को और गहरा गया। विधायक के बेटे अक्षय ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके पिता से करीब 13 घंटे तक पूछताछ की और इस दौरान उन्हें कथित तौर पर डराने-धमकाने की कोशिश की गई। अक्षय ने यह भी कहा कि परिवार इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती देगा।

मामले की पृष्ठभूमि

विलाथिकुलम से विधायक मार्कंडेयन को सोमवार को तूतीकोरिन पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने एक भाषण में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के खिलाफ कथित तौर पर 'हम आपकी हड्डियाँ तोड़ देंगे' जैसी धमकी भरी टिप्पणी की थी। इसी बयान से जुड़े मानहानि के मामले में पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ की।

बेटे के गंभीर आरोप

मीडिया से बात करते हुए अक्षय ने सवाल उठाया कि केवल पाँच मिनट के भाषण की जाँच के लिए 13 घंटे की पूछताछ का कोई औचित्य नहीं बनता। उन्होंने कहा कि उनके पिता को मधुमेह और हृदय संबंधी बीमारियाँ हैं, ऐसे में इतनी लंबी पूछताछ उनके स्वास्थ्य के लिहाज से भी उचित नहीं थी।

अक्षय ने यह भी आरोप लगाया कि पूछताछ के दौरान पुलिस ने विधायक पर सत्तारूढ़ दल के राजनीतिक एजेंडे के अनुसार बयान देने का दबाव बनाने की कोशिश की। हालाँकि पुलिस की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया तत्काल उपलब्ध नहीं हुई।

न्यायिक हिरासत और कानूनी कदम

पूछताछ के बाद मार्कंडेयन को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहाँ अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अक्षय ने स्पष्ट किया कि परिवार पुलिस की इस कथित ज़्यादती के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा।

लोकतंत्र पर सवाल

अक्षय ने इस गिरफ्तारी को व्यापक राजनीतिक संदर्भ से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ टीवीके सरकार विपक्ष की आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के कामकाज को सीमित करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमज़ोर करने के समान है। यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच पहले से ही तनाव बना हुआ है।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह मामला अब केवल एक भाषण की कानूनी जाँच तक सीमित नहीं रहा — यह विपक्षी विधायकों के साथ पुलिस के व्यवहार और राज्य सरकार की कार्यशैली पर एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। परिवार के कानूनी कदम उठाने की घोषणा के बाद अब यह मामला अदालत में और पेचीदा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

भले ही भाषण की भाषा कितनी भी आपत्तिजनक क्यों न हो। तमिलनाडु में यह पहली बार नहीं है कि किसी विपक्षी नेता की गिरफ्तारी पर पुलिस-प्रक्रिया की आनुपातिकता पर बहस छिड़ी हो। असली सवाल यह है कि क्या मानहानि कानून का इस्तेमाल राजनीतिक असहमति को दबाने के औज़ार के रूप में हो रहा है — और क्या न्यायपालिका इस मामले में स्वतंत्र जाँच सुनिश्चित कर पाएगी। विधायक की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए पुलिस की कार्यशैली पर उच्च न्यायालय की नज़र पड़ना अब अपरिहार्य लगता है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

DMK विधायक मार्कंडेयन को किस मामले में गिरफ्तार किया गया?
मार्कंडेयन को तूतीकोरिन पुलिस ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के खिलाफ कथित धमकी भरी टिप्पणी — 'हम आपकी हड्डियाँ तोड़ देंगे' — से जुड़े मानहानि मामले में गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी सोमवार को हुई और बाद में अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
बेटे अक्षय ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए हैं?
अक्षय ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके पिता से 13 घंटे तक पूछताछ की, पूछताछ के दौरान उन्हें डराया-धमकाया और सत्तारूढ़ दल के एजेंडे के अनुसार बयान देने का दबाव बनाया। उन्होंने यह भी कहा कि मधुमेह और हृदय रोग से पीड़ित विधायक के लिए इतनी लंबी पूछताछ स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अनुचित थी।
13 घंटे की पूछताछ को लेकर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
अक्षय के अनुसार, जिस भाषण की जाँच हो रही है वह केवल पाँच मिनट का था, इसलिए 13 घंटे की पूछताछ अनुपातहीन लगती है। इसके अलावा विधायक की उम्र और उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए भी यह कार्रवाई विवादास्पद बन गई है।
मार्कंडेयन को अदालत ने क्या आदेश दिया?
पूछताछ के बाद विधायक मार्कंडेयन को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहाँ अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
परिवार आगे क्या कदम उठाएगा?
अक्षय ने स्पष्ट किया है कि परिवार पुलिस की कथित ज़्यादती को अदालत में चुनौती देगा और इस मामले में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला अब राज्य में विपक्षी विधायकों के साथ पुलिस व्यवहार पर एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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