DMK विधायक मार्कंडेयन से 13 घंटे की पूछताछ, बेटे अक्षय का पुलिस पर डराने-धमकाने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के विधायक जीवी मार्कंडेयन की गिरफ्तारी और उनसे हुई लंबी पूछताछ को लेकर तूतीकोरिन में राजनीतिक तनाव मंगलवार, 21 जुलाई को और गहरा गया। विधायक के बेटे अक्षय ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके पिता से करीब 13 घंटे तक पूछताछ की और इस दौरान उन्हें कथित तौर पर डराने-धमकाने की कोशिश की गई। अक्षय ने यह भी कहा कि परिवार इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती देगा।
मामले की पृष्ठभूमि
विलाथिकुलम से विधायक मार्कंडेयन को सोमवार को तूतीकोरिन पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने एक भाषण में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के खिलाफ कथित तौर पर 'हम आपकी हड्डियाँ तोड़ देंगे' जैसी धमकी भरी टिप्पणी की थी। इसी बयान से जुड़े मानहानि के मामले में पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ की।
बेटे के गंभीर आरोप
मीडिया से बात करते हुए अक्षय ने सवाल उठाया कि केवल पाँच मिनट के भाषण की जाँच के लिए 13 घंटे की पूछताछ का कोई औचित्य नहीं बनता। उन्होंने कहा कि उनके पिता को मधुमेह और हृदय संबंधी बीमारियाँ हैं, ऐसे में इतनी लंबी पूछताछ उनके स्वास्थ्य के लिहाज से भी उचित नहीं थी।
अक्षय ने यह भी आरोप लगाया कि पूछताछ के दौरान पुलिस ने विधायक पर सत्तारूढ़ दल के राजनीतिक एजेंडे के अनुसार बयान देने का दबाव बनाने की कोशिश की। हालाँकि पुलिस की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया तत्काल उपलब्ध नहीं हुई।
न्यायिक हिरासत और कानूनी कदम
पूछताछ के बाद मार्कंडेयन को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहाँ अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अक्षय ने स्पष्ट किया कि परिवार पुलिस की इस कथित ज़्यादती के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा।
लोकतंत्र पर सवाल
अक्षय ने इस गिरफ्तारी को व्यापक राजनीतिक संदर्भ से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ टीवीके सरकार विपक्ष की आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के कामकाज को सीमित करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमज़ोर करने के समान है। यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच पहले से ही तनाव बना हुआ है।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह मामला अब केवल एक भाषण की कानूनी जाँच तक सीमित नहीं रहा — यह विपक्षी विधायकों के साथ पुलिस के व्यवहार और राज्य सरकार की कार्यशैली पर एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। परिवार के कानूनी कदम उठाने की घोषणा के बाद अब यह मामला अदालत में और पेचीदा हो सकता है।