ग्रेटर नोएडा में मोबाइल चोर गिरोह गिरफ्तार: 100 सील पैक IQOO फोन बरामद, मास्टरमाइंड फरार
सारांश
मुख्य बातें
गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट के थाना नॉलेज पार्क ने 22 जून 2026 को एक संगठित मोबाइल चोरी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने इनके कब्जे से करीब ₹50 लाख मूल्य के 100 सील पैक IQOO स्मार्टफोन, एक फर्जी नंबर प्लेट लगी महिंद्रा पिकअप और दो अवैध चाकू बरामद किए हैं। गिरोह का एक मास्टरमाइंड अभी भी फरार बताया जा रहा है, जिसकी तलाश में विशेष टीमें सक्रिय हैं।
कैसे हुई कार्रवाई
21 जून 2026 को थाना नॉलेज पार्क पुलिस को मैनुअल इंटेलिजेंस और गोपनीय सूचना मिली कि कुछ संदिग्ध चोरी के मोबाइल फोन बेचने की फिराक में हैं। सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने सेक्टर-153 स्थित पानी की टंकी के पीछे घेराबंदी की और तीनों आरोपियों को मौके पर दबोच लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आनंद उर्फ रुद्रेश, पंकज उर्फ धीरेंद्र और मोहित उर्फ संतोष (मोहित पुंडीर) के रूप में हुई है। पुलिस जाँच में सामने आया है कि तीनों पहले भी आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहे हैं। मुख्य आरोपी आनंद उर्फ रुद्रेश के खिलाफ दिल्ली और गुरुग्राम में माल चोरी व आर्म्स एक्ट के तहत कई मुकदमे पहले से दर्ज हैं। मोहित पुंडीर के खिलाफ भी चोरी और अन्य आपराधिक मामले पंजीकृत पाए गए।
बरामदगी का ब्यौरा
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बरामद सभी 100 मोबाइल फोन IQOO ब्रांड के हैं और पूरी तरह सील पैक अवस्था में मिले। इनकी बाजार कीमत करीब ₹50 लाख आँकी गई है। बताया जा रहा है कि ये फोन यमुना एक्सप्रेसवे के सेक्टर-24 स्थित कंपनी के लॉजिस्टिक चैनल से चोरी किए गए थे। आरोपी आनंद उर्फ रुद्रेश और मोहित पुंडीर के पास से एक-एक अवैध चाकू भी जब्त किया गया।
मास्टरमाइंड की तलाश जारी
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गिरोह के फरार मास्टरमाइंड की पहचान कर ली गई है और उसकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है। थाना नॉलेज पार्क में संबंधित मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस को उम्मीद है कि चल रही पूछताछ में इस गिरोह से जुड़े अन्य मामलों का भी खुलासा हो सकता है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि संगठित मोबाइल चोरी गिरोह लॉजिस्टिक सप्लाई चेन को निशाना बनाकर सील पैक माल उड़ाने का तरीका अपनाते हैं, जिससे खुदरा बाजार में नकली और चोरी के उत्पादों की समस्या बढ़ती है। इस मामले में फर्जी नंबर प्लेट के इस्तेमाल से स्पष्ट है कि गिरोह सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। फरार मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना है।