MP किसान कल्याण वर्ष सिर्फ कागज़ों पर: कांग्रेस का दावा, केला किसानों को ₹150 करोड़ का नुकसान
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी ने 3 जून को भोपाल में आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश सरकार का ‘किसान कल्याण वर्ष’ सिर्फ कागज़ों तक सीमित है, जबकि हालिया आंधी-तूफान से निमाड़ अंचल के केला उत्पादकों को कथित तौर पर ₹150 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में चौधरी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के सर्वे आदेश को ‘दिखावटी’ बताते हुए तत्काल 100 प्रतिशत मुआवज़े की माँग की।
मुख्य आरोप और आँकड़े
चौधरी ने कहा कि मध्य प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है, मगर ‘हर वर्ग का किसान प्रताड़ित और बेबस है’। उन्होंने बुरहानपुर, खंडवा और खरगोन ज़िलों के केला उत्पादकों की स्थिति का ज़िक्र करते हुए बताया कि पिछले तीन-चार दिनों में आई भीषण आंधी से शाहपुरा, खापा, धामनगांव, लोनी, बहादुरगढ़, बोलाना और दरियापुर सहित पूरे इलाके की केले की फसल ज़मींदोज़ हो गई है।
उनके अनुसार, प्राथमिक आकलन में किसानों का ₹150 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। चौधरी ने आरोप लगाया कि ‘सरकार में बैठे लोग हिंदू-मुस्लिम के अलावा कोई बात नहीं कर रहे’ और स्थानीय विधायकों को अन्नदाता की चिंता नहीं है।
हिमाचल मॉडल से तुलना
कांग्रेस नेता ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार की कृषि नीतियों का हवाला देते हुए दावा किया कि वहाँ बिना रासायनिक खाद के उत्पादित गेहूँ ₹8,000 प्रति क्विंटल, मक्का ₹5,000 प्रति क्विंटल, कच्ची हल्दी ₹150 प्रति किलो और बेरी ₹6,000 प्रति क्विंटल तक खरीदी जाती है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में किसान को फसल की लागत तक नहीं मिल पाती और आंदोलनों के दौरान उन्हें कथित तौर पर प्रताड़ित किया जाता है।
सरकारी सर्वे पर सवाल
चौधरी ने मुख्यमंत्री द्वारा घोषित सर्वे को ‘किसानों को धोखा देने का ज़रिया’ बताते हुए तर्क दिया कि यदि किसी किसान के पास 10,000 केले के पेड़ हैं और आंधी में 4,000 पेड़ गिर गए, तो सरकारी सर्वे केवल 25-30 प्रतिशत का नुकसान मानेगा। उनके अनुसार, सच्चाई यह है कि बचे हुए 6,000 पेड़ भी जड़ से हिल चुके हैं और अब बेकार हो चुके हैं।
लागत, कर्ज़ और मुआवज़े की माँग
चौधरी ने बताया कि एक केले के पौधे की तैयारी पर लगभग ₹150 खर्च आता है और अच्छी फसल से प्रति पौधा ₹350 से ₹400 तक मुनाफ़े की उम्मीद थी। उन्होंने दावा किया कि एक हेक्टेयर पर किसान ₹5 लाख तक के कर्ज़ में डूब चुका है, जबकि सरकार केवल ₹2 लाख के ‘अपर्याप्त’ मुआवज़े की बात कर रही है, वह भी महीनों बाद तय होगा।
कांग्रेस की माँग है कि बिना किसी दिखावटी सर्वे के प्रभावित क्षेत्रों को 100 प्रतिशत नुकसान मानते हुए तत्काल पूरा मुआवज़ा दिया जाए। गौरतलब है कि निमाड़ क्षेत्र राज्य के प्रमुख केला उत्पादक बेल्ट में से एक है, और बेमौसम आंधी-तूफान से यहाँ की फसलों को नुकसान की घटनाएँ हाल के वर्षों में बार-बार सामने आती रही हैं। आने वाले दिनों में मुआवज़े और सर्वे के तरीके पर राजनीतिक टकराव और तेज़ होने के संकेत हैं।