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नीट पेपर लीक पर सपा विधायक का हमला: 'भारत के युवा नेपाल-बांग्लादेश से भी अधिक नाराज'

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नीट पेपर लीक पर सपा विधायक का हमला: 'भारत के युवा नेपाल-बांग्लादेश से भी अधिक नाराज'

सारांश

सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि भारत के युवाओं में नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश से भी अधिक आक्रोश है। 12 साल में 90 पेपर लीक, नीट में ₹50 लाख का घोटाला और 30 छात्रों की आत्महत्या — सपा ने सुप्रीम कोर्ट जज से जाँच और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग की।

मुख्य बातें

सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने 23 जुलाई को लखनऊ में भाजपा सरकार पर नीट पेपर लीक को लेकर तीखा हमला बोला।
उनके अनुसार भाजपा के 12 वर्षों के शासन में करीब 90 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए और नीट में ₹50 लाख तक की रकम शामिल थी।
नीट पेपर लीक के बाद 30 छात्रों ने आत्महत्या की — मेहरोत्रा ने जिम्मेदारी तय करने की माँग की।
20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज, बैरिकेड में करंट और हवाई फायरिंग का आरोप लगाया।
सपा ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सर्वोच्च न्यायालय के मौजूदा जज से जाँच की माँग की।
मेहरोत्रा ने चेतावनी दी कि भारत के युवाओं का आक्रोश नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश से भी अधिक है।

समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने 23 जुलाई को लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने नीट पेपर लीक, छात्र प्रदर्शनों पर कथित बल प्रयोग और विपक्ष के आंदोलन को केंद्र में रखते हुए आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की आवाज़ को दबाने पर आमादा है। मेहरोत्रा ने चेतावनी दी कि भारत के युवाओं में नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश से भी अधिक आक्रोश भरा हुआ है।

मुख्य आरोप और दावे

मेहरोत्रा ने दावा किया कि भाजपा के 12 वर्षों के शासन में करीब 90 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नीट परीक्षा में ₹50 लाख तक की रकम के बदले पेपर लीक किया गया, और इसके बावजूद परीक्षा रद्द नहीं की गई। उनके अनुसार सरकार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है।

सपा विधायक ने यह भी कहा कि नीट पेपर लीक के बाद 30 छात्रों ने आत्महत्या की और इन मौतों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि डेढ़ महीने बाद प्रधानमंत्री फास्ट ट्रैक कोर्ट की बात कर रहे हैं, जबकि कार्रवाई पहले ही होनी चाहिए थी।

छात्र प्रदर्शन और कथित पुलिस कार्रवाई

मेहरोत्रा ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, बैरिकेड में करंट लगाया गया और हवाई फायरिंग की गई। उन्होंने कहा कि छात्र पत्थर लेकर प्रदर्शन स्थल पर नहीं पहुंचे थे — बल्कि उनके अनुसार पुलिसकर्मी स्वयं गाड़ियों में पत्थर भरकर लाए थे। कार्रवाई में सैकड़ों छात्र गंभीर रूप से घायल हुए और महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार का आरोप लगाया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव प्रधानमंत्री से मिलने गए थे, लेकिन उनके साथ भी अनुचित व्यवहार किया गया।

नेपाल-बांग्लादेश की तुलना

मेहरोत्रा ने कहा कि जिस प्रकार नेपाल में छात्र आंदोलन के बाद नेताओं को देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था, वैसी परिस्थिति भारत में भी उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने कहा कि श्रीलंका और बांग्लादेश की तरह भारत के युवाओं में भी भारी गुस्सा है — बल्कि उनके अनुसार यह आक्रोश उन देशों से भी अधिक है।

यह ऐसे समय में आया है जब नीट विवाद को लेकर पूरे देश में छात्र संगठन सड़क पर हैं और सर्वोच्च न्यायालय में भी मामला विचाराधीन है।

सरकार और शिक्षा मंत्री पर निशाना

मेहरोत्रा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि यदि इस्तीफा नहीं हुआ तो स्वयं प्रधानमंत्री की कुर्सी भी खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सरकार की तुलना आतंकवादियों से की — यह एक विवादास्पद बयान है जिसे भाजपा ने अभी तक अस्वीकार नहीं किया है।

सपा की माँगें और आगे की रणनीति

मेहरोत्रा ने माँग की कि नीट पेपर लीक और अन्य सभी पुराने पेपर लीक मामलों की जाँच सर्वोच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश से कराई जाए। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी युवाओं के अधिकारों के लिए सड़क पर उतरकर लड़ाई लड़ने को तैयार है। पार्टी का रुख स्पष्ट है — जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो जवाबदेही का ढाँचा कहाँ है? नेपाल और बांग्लादेश की तुलना भले ही अतिरंजित लगे, लेकिन यह युवा बेरोज़गारी और परीक्षा प्रणाली की विफलता से उपजे वास्तविक जन-असंतोष को दर्शाती है। फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा डेढ़ महीने बाद आना यह संकेत देता है कि सरकार की प्रतिक्रिया प्रतिक्रियात्मक रही, न कि सक्रिय। असली परीक्षा यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जाँच दोषियों तक पहुँचेगी — या यह भी पिछले पेपर लीक मामलों की तरह अनिर्णीत रह जाएगी।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने भाजपा सरकार पर क्या आरोप लगाए?
मेहरोत्रा ने आरोप लगाया कि भाजपा के 12 वर्षों के शासन में करीब 90 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए और नीट में ₹50 लाख तक की रकम के बदले पेपर लीक किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज और हवाई फायरिंग की गई।
नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश से तुलना क्यों की गई?
मेहरोत्रा ने कहा कि जिस तरह इन देशों में युवा आंदोलनों ने सरकारें हिला दीं, वैसी ही स्थिति भारत में बन सकती है क्योंकि यहाँ के युवाओं में उससे भी अधिक आक्रोश है। उन्होंने नेपाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ नेताओं को देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था।
नीट पेपर लीक के बाद कितने छात्रों ने आत्महत्या की?
सपा विधायक मेहरोत्रा के अनुसार नीट पेपर लीक विवाद के बाद 30 छात्रों ने आत्महत्या की। उन्होंने सवाल किया कि इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा और दोषियों पर कार्रवाई की माँग की।
सपा ने नीट मामले में क्या माँगें रखी हैं?
सपा ने माँग की है कि नीट पेपर लीक और सभी पुराने पेपर लीक मामलों की जाँच सर्वोच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश से कराई जाए। इसके अलावा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी माँगा गया है।
अखिलेश यादव का इस मामले में क्या रुख रहा?
मेहरोत्रा के अनुसार सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव प्रधानमंत्री से छात्र मुद्दों पर चर्चा के लिए मिलने गए थे, लेकिन उनके साथ भी अनुचित व्यवहार किया गया। सपा ने स्पष्ट किया है कि पार्टी युवाओं के अधिकारों के लिए सड़क पर उतरकर लड़ाई लड़ने को तैयार है।
राष्ट्र प्रेस
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