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नीट री-एग्जाम पेपर भी गुजरात में 3 दिन पहले लीक हुआ था: रोहित पवार का बड़ा दावा

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नीट री-एग्जाम पेपर भी गुजरात में 3 दिन पहले लीक हुआ था: रोहित पवार का बड़ा दावा

सारांश

नीट-यूजी की मूल परीक्षा के बाद अब दोबारा परीक्षा पर भी सवाल — एनसीपी-एसपी विधायक रोहित पवार का दावा है कि री-एग्जाम का पेपर भी गुजरात में 3 दिन पहले लीक हो गया था। दस्तावेज़ों सहित लगाए गए इन आरोपों ने नीट विवाद को नई गहराई दे दी है।

मुख्य बातें

एनसीपी-एसपी विधायक रोहित पवार ने 29 जुलाई को एक्स पर दावा किया कि नीट-यूजी री-एग्जाम का पेपर परीक्षा से 3 दिन पहले गुजरात में लीक हो गया था।
पवार ने आरोप के साथ एक ईमेल थ्रेड सहित दस्तावेज़ साझा किए और निष्पक्ष जाँच की माँग की।
शिक्षा मंत्रालय ने नीट पेपर लीक की जाँच सीबीआई को सौंपी है; बिहार, गुजरात और महाराष्ट्र में कई गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं।
केंद्र सरकार ने 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024' लागू किया है।
विपक्ष एनटीए में ढाँचागत सुधार और परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की माँग पर अडिग है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-एसपी) के विधायक रोहित पवार ने 29 जुलाई को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा का प्रश्नपत्र भी परीक्षा से तीन दिन पहले गुजरात में लीक हो गया था। यह दावा ऐसे समय में आया है जब पेपर लीक को लेकर देशभर में विरोध-प्रदर्शन जारी हैं और केंद्र की एनडीए सरकार विपक्ष के निशाने पर है।

रोहित पवार ने क्या दावा किया

पवार ने अपने एक्स पोस्ट के साथ कुछ दस्तावेज़ भी साझा किए, जिनमें एक ईमेल थ्रेड शामिल है। उन्होंने जाँच एजेंसियों से अपील की कि वे घटनाक्रम की समय-सीमा की जाँच करें और कथित पेपर लीक के स्रोत का पता लगाएँ। पवार ने कहा, 'यह परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा व्यवस्था की पूरी तरह विफलता को दर्शाता है।'

उन्होंने आगे कहा, 'अगर यह सच है, तो यह बेहद चिंता की बात है। जाँच एजेंसियों को तुरंत इस मामले की सच्चाई सामने लानी चाहिए। अगर वास्तव में पेपर लीक हुआ है, तो बिना किसी दबाव के पूरे रैकेट का पर्दाफाश किया जाना चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।'

नीट विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि नीट-यूजी परीक्षा के नतीजे घोषित होने के बाद बिहार और गुजरात जैसे राज्यों में पेपर लीक की खबरें सामने आई थीं। इसके अलावा बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के टॉप रैंक हासिल करने और कुछ खास उम्मीदवारों को ग्रेस मार्क्स दिए जाने को लेकर भी न्यायालय में याचिकाएँ दायर हुईं। इन विवादों के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने प्रभावित उम्मीदवारों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित की थी — और अब उसी री-एग्जाम पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

शिक्षा मंत्रालय ने नीट पेपर लीक मामले की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी, जिसके बाद बिहार, गुजरात और महाराष्ट्र में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया।

सरकार की प्रतिक्रिया और कानूनी कदम

देशभर में हुए विरोध और हंगामे के बाद केंद्र सरकार ने 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024' लागू किया। इस कानून का उद्देश्य सख्त सजा, पेपर लीक रोकने के उपायों और भारी जुर्माने के ज़रिए परीक्षाओं में होने वाली धोखाधड़ी पर लगाम लगाना है। हालाँकि आलोचकों का कहना है कि केवल कानून बना देने से ढाँचागत खामियाँ दूर नहीं होंगी।

विपक्ष की माँगें

कानूनी कदम उठाए जाने के बावजूद विपक्षी दलों ने एनडीए सरकार पर दबाव बनाए रखा है। वे एनटीए में ढाँचागत सुधार और राष्ट्रीय स्तर की भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की माँग कर रहे हैं। एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार और कई छात्र संगठन जवाबदेही तय करने तथा राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर सख्त नियम लागू करने की माँग पर अडिग हैं।

आगे क्या होगा

पवार ने जाँच एजेंसियों से अपील की है कि वे राजनीतिक दबाव में आए बिना पेपर लीक नेटवर्क के मुख्य आरोपियों का खुलासा करें। सीबीआई की जाँच जारी है और कथित तौर पर साझा किए गए दस्तावेज़ों की प्रामाणिकता की पड़ताल अभी बाकी है। यह मामला आने वाले दिनों में संसद और अदालतों दोनों में गूँजने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो एनटीए की पूरी प्रणाली की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगता है। सीबीआई जाँच और नए कानून के बावजूद यह तीसरी-चौथी बार है जब परीक्षा-तंत्र में सेंध की खबर आई है — जो दर्शाता है कि समस्या व्यक्तिगत नहीं, ढाँचागत है। जब तक एनटीए में स्वतंत्र ऑडिट, रियल-टाइम निगरानी और जवाबदेही का तंत्र नहीं बनता, तब तक हर परीक्षा के बाद यही चक्र दोहराता रहेगा।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रोहित पवार ने नीट री-एग्जाम पेपर लीक को लेकर क्या दावा किया है?
एनसीपी-एसपी विधायक रोहित पवार ने 29 जुलाई को एक्स पर दावा किया कि नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा से तीन दिन पहले गुजरात में लीक हो गया था। उन्होंने इस दावे के समर्थन में एक ईमेल थ्रेड सहित कुछ दस्तावेज़ भी साझा किए और जाँच एजेंसियों से तत्काल कार्रवाई की माँग की।
नीट री-एग्जाम क्यों आयोजित की गई थी?
मूल नीट-यूजी परीक्षा में पेपर लीक के आरोप, कुछ उम्मीदवारों को ग्रेस मार्क्स दिए जाने और बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के टॉप रैंक हासिल करने को लेकर न्यायालय में याचिकाएँ दायर हुईं। इन विवादों के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने प्रभावित उम्मीदवारों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित की थी।
नीट पेपर लीक मामले की जाँच कौन कर रहा है?
शिक्षा मंत्रालय ने नीट पेपर लीक मामले की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी है। अब तक बिहार, गुजरात और महाराष्ट्र में कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
केंद्र सरकार ने 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024' लागू किया है, जिसमें सख्त सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है। हालाँकि विपक्षी दलों और छात्र संगठनों का कहना है कि एनटीए में ढाँचागत सुधार के बिना केवल कानून पर्याप्त नहीं है।
क्या रोहित पवार के आरोप अभी तक सिद्ध हुए हैं?
नहीं, रोहित पवार के दावे अभी आरोप के स्तर पर हैं। उन्होंने दस्तावेज़ साझा किए हैं, लेकिन उनकी प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। सीबीआई जाँच जारी है और कथित तौर पर इन नए आरोपों की भी पड़ताल की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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