21 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पुंछ-राजौरी में अगले 48 घंटे खतरनाक, किशनगंगा उफान पर; बांदीपोरा में बाढ़ अलर्ट जारी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पुंछ-राजौरी में अगले 48 घंटे खतरनाक, किशनगंगा उफान पर; बांदीपोरा में बाढ़ अलर्ट जारी

सारांश

पुंछ और राजौरी में तीन दिनों में 50 मिमी से अधिक बारिश के बाद अगले 48 घंटे सबसे खतरनाक बताए जा रहे हैं। किशनगंगा उफान पर है, गुरेज में नदी तट खाली कराए गए और बांदीपोरा में एक सप्ताह में तीसरी बार बादल फटा — जम्मू-कश्मीर में मौसमी संकट गहराता जा रहा है।

मुख्य बातें

पुंछ और राजौरी में अगले 48 घंटों के दौरान भूस्खलन, अचानक बाढ़ और ढाँचों को नुकसान का गंभीर खतरा है।
पिछले तीन दिनों में दोनों जिलों में 50 मिमी से अधिक बारिश से मिट्टी पूरी तरह जलसंतृप्त हो चुकी है।
आगामी पश्चिमी विक्षोभ से पीर पंजाल रेंज क्षेत्र में और वर्षा की आशंका है।
किशनगंगा नदी के जलस्तर में उछाल के बाद गुरेज प्रशासन ने पर्यटकों और टेंट कॉलोनी मालिकों को नदी तट तत्काल खाली करने का निर्देश दिया।
बांदीपोरा जिले में एक सप्ताह में तीसरी बार बादल फटा — तुलेल घाटी के जेडगाई और गुरेज के अचूरा गाँव प्रभावित।
प्रशासन ने निवासियों और पर्यटकों से नदियों व जोखिम वाले इलाकों से दूर रहने की अपील की है।

जम्मू-कश्मीर के पुंछ और राजौरी जिलों में अगले 48 घंटों के दौरान मौसम जनित आपदा का गंभीर खतरा बना हुआ है, जबकि बांदीपोरा जिला प्रशासन ने 21 जुलाई 2026 को किशनगंगा नदी के जलस्तर में तेज़ उछाल के बाद आपातकालीन चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने चेताया है कि आसमान से पानी की यह मार थमने के बजाय और बढ़ सकती है।

मौसम विभाग की चेतावनी

मौसम विभाग के अनुसार, पिछले तीन दिनों में पुंछ और राजौरी में 50 मिलीमीटर से अधिक वर्षा दर्ज की गई है, जिससे मिट्टी पूरी तरह जलसंतृप्त हो चुकी है और उसकी जल-अवशोषण क्षमता लगभग समाप्त हो गई है। इसका सीधा परिणाम यह होगा कि सतह पर पानी का बहाव तेज़ होगा और पहाड़ी ढलानें और कमज़ोर पड़ेंगी।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगले दो दिनों में एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) इस क्षेत्र को प्रभावित करेगा। चूँकि पुंछ और राजौरी पीर पंजाल रेंज के अंतर्गत आते हैं, इसलिए जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करने वाले पश्चिमी विक्षोभ का पहला और सबसे तीव्र असर इन्हीं जिलों पर पड़ता है।

खतरे का स्वरूप

अधिकारियों के अनुसार, जलसंतृप्त मिट्टी, कमज़ोर ढलानों और आगामी वर्षा के संयोग से भूस्खलन, मडस्लाइड, अचानक बाढ़, ढलान धंसने और संरचनात्मक क्षति की आशंका काफी बढ़ गई है। ये खतरे विशेष रूप से दोनों जिलों के ऊँचाई वाले और संवेदनशील सड़क मार्गों के निकटवर्ती इलाकों में अधिक हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस स्थिति में हल्की बारिश भी नई घटनाओं को जन्म दे सकती है।

किशनगंगा नदी और गुरेज में स्थिति

किशनगंगा नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि के मद्देनज़र गुरेज के उप-मंडल प्रशासन ने सभी पर्यटकों और स्थानीय टेंट कॉलोनी मालिकों को तत्काल नदी तट खाली करने का निर्देश दिया है। यह एडवाइजरी तुलेल घाटी के जेडगाई गाँव और गुरेज के अचूरा गाँव में सोमवार शाम को हुई लगातार बादल फटने की घटनाओं के बाद जारी की गई है।

प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, इन बादल फटने की घटनाओं से कई घरों और कृषि भूमि को नुकसान पहुँचा है। उल्लेखनीय है कि यह बांदीपोरा जिले में पिछले एक सप्ताह में बादल फटने की तीसरी घटना है, जो इस क्षेत्र में मौसमी संकट की गंभीरता को रेखांकित करती है।

प्रशासन की अपील

जिला प्रशासन ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों से नदियों, नालों और जोखिमग्रस्त इलाकों से पूरी तरह दूर रहने की अपील की है। अधिकारी स्थिति पर निरंतर नज़र रखे हुए हैं और नुकसान का आकलन करने के लिए मूल्यांकन दल तैनात किए जा रहे हैं। आधिकारिक एडवाइजरी का सख्ती से पालन करने को कहा गया है।

आगामी घंटों में पश्चिमी विक्षोभ के और सक्रिय होने के साथ, प्रशासन की नज़र इन दोनों जिलों के हर बदलाव पर टिकी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे आपदा प्रबंधन तंत्र अभी भी प्रतिक्रियात्मक ढंग से संभाल रहा है। पुंछ और राजौरी में हर मानसून इसी तरह की चेतावनियाँ आती हैं, लेकिन स्थायी भूस्खलन-रोधी ढाँचे और नदी तटबंध निर्माण की गति सवालों के घेरे में रहती है। गुरेज जैसे दुर्गम इलाकों में पर्यटन का विस्तार हो रहा है, जबकि आपदा-सुरक्षा का बुनियादी ढाँचा उस रफ्तार से नहीं बढ़ा — यह अंतर्विरोध अगली बड़ी त्रासदी की भूमिका बन सकता है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुंछ और राजौरी में बाढ़ का खतरा क्यों बढ़ गया है?
पिछले तीन दिनों में 50 मिलीमीटर से अधिक बारिश से मिट्टी पूरी तरह जलसंतृप्त हो गई है और ढलानें कमज़ोर पड़ गई हैं। इसके ऊपर से आगामी पश्चिमी विक्षोभ और वर्षा लाएगा, जिससे भूस्खलन, मडस्लाइड और अचानक बाढ़ का खतरा काफी बढ़ गया है।
किशनगंगा नदी के बढ़ते जलस्तर पर प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?
गुरेज के उप-मंडल प्रशासन ने सभी पर्यटकों और स्थानीय टेंट कॉलोनी मालिकों को तत्काल नदी तट खाली करने का निर्देश दिया है। यह कदम किशनगंगा नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने और तुलेल घाटी व अचूरा गाँव में बादल फटने की घटनाओं के बाद उठाया गया है।
बांदीपोरा में बादल फटने की घटनाएँ कहाँ हुईं?
सोमवार शाम तुलेल घाटी के जेडगाई गाँव और गुरेज के अचूरा गाँव में लगातार बादल फटे। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार इन घटनाओं से कई घरों और कृषि भूमि को नुकसान पहुँचा है और यह बांदीपोरा जिले में एक सप्ताह में तीसरी ऐसी घटना है।
पीर पंजाल रेंज के इलाके पश्चिमी विक्षोभ से सबसे पहले क्यों प्रभावित होते हैं?
पुंछ और राजौरी पीर पंजाल रेंज में स्थित हैं, जो जम्मू-कश्मीर में पश्चिम से आने वाले मौसम तंत्र का पहला अवरोध है। इसलिए पश्चिमी विक्षोभ का सबसे पहला और तीव्र असर इन्हीं जिलों पर पड़ता है।
स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
प्रशासन ने नदियों, नालों और जोखिमग्रस्त इलाकों से पूरी तरह दूर रहने की अपील की है। आधिकारिक एडवाइजरी का सख्ती से पालन करने और तेज़ी से बदलते मौसम के प्रति सतर्क रहने को कहा गया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 2 दिन पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 2 सप्ताह पहले
  5. 2 सप्ताह पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले