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राम जन्मभूमि दान विवाद: एसआईटी 15 जून को करेगी परिसर का दौरा, ट्रस्ट ने जताया उत्तर प्रदेश सरकार का आभार

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राम जन्मभूमि दान विवाद: एसआईटी 15 जून को करेगी परिसर का दौरा, ट्रस्ट ने जताया उत्तर प्रदेश सरकार का आभार

सारांश

राम जन्मभूमि दान विवाद में उत्तर प्रदेश सरकार ने 15 घंटे के भीतर एसआईटी गठित की — ट्रस्ट ने खुद जाँच माँगी और सहयोग का आश्वासन दिया। सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने न्यायिक निगरानी में जाँच की माँग की और संपत्ति खरीद के आरोप लगाए। 15 जून को परिसर दौरे से विवाद की दिशा तय होगी।

मुख्य बातें

तीन सदस्यीय एसआईटी 15 जून 2025 को राम जन्मभूमि परिसर, अयोध्या का दौरा कर जाँच शुरू करेगी।
उत्तर प्रदेश सरकार ने 12 से 15 घंटे के भीतर एसआईटी का गठन किया; राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्वयं जाँच की माँग की थी।
मंदिर के दर्शन प्रभारी गोपाल जी राव ने कहा कि ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक की ओर से पहले से ऑडिट जारी था; गलतफहमियों के कारण विवाद सामने आया।
सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने चढ़ावे में 'भारी गड़बड़ी' का आरोप लगाया और उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में जाँच की माँग की।
मेहरोत्रा ने CBI , ED और आयकर विभाग के ज़रिये विपक्ष को दबाने का आरोप भी लगाया।

अयोध्या में राम जन्मभूमि दान विवाद के बीच मंदिर के दर्शन प्रभारी गोपाल जी राव ने 14 जून 2025 को बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष जाँच दल (एसआईटी) 15 जून को राम जन्मभूमि परिसर का दौरा कर मामले की जाँच शुरू करेगी। ट्रस्ट ने स्वयं इस जाँच की माँग की थी और सरकार की त्वरित कार्रवाई के लिए आभार व्यक्त किया है।

जाँच की पृष्ठभूमि और ट्रस्ट का पक्ष

गोपाल जी राव ने स्पष्ट किया कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक की ओर से पहले से ही ऑडिट की प्रक्रिया जारी थी। उनके अनुसार, कुछ गलतफहमियों के कारण यह विवाद सार्वजनिक हुआ, जिसके बाद ट्रस्ट ने स्वयं सरकार से जाँच की माँग की ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 12 से 15 घंटे के भीतर तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन कर दिया — जिसे ट्रस्ट ने सराहनीय कदम बताया। राव ने कहा कि ट्रस्ट जाँच में पूरा सहयोग करेगा और सभी आवश्यक दस्तावेज़ उपलब्ध कराएगा।

विपक्ष के आरोप और न्यायिक जाँच की माँग

समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में चढ़ावे के रूप में आने वाले धन में 'भारी गड़बड़ी और घपला' हुआ है। उन्होंने माँग की कि इस पूरे मामले की जाँच किसी वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में हो — अधिमानतः उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश की देखरेख में — ताकि सच्चाई सामने आ सके।

मेहरोत्रा ने यह भी आरोप लगाया कि इस धन का दुरुपयोग कर कुछ लोगों द्वारा संपत्तियाँ खरीदी गई हैं। गौरतलब है कि ये आरोप अभी तक सिद्ध नहीं हुए हैं और एसआईटी जाँच इन्हीं दावों की पड़ताल करेगी।

सरकार और संस्थाओं पर व्यापक आरोप

मेहरोत्रा ने दान विवाद से आगे बढ़ते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'सरकार और उसके मंत्री जानबूझकर उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव और हिंसा पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। नफ़रत फैलाकर वे लोगों को बाँटकर चुनाव जीतना चाहते हैं।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महंगाई, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली जैसे असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाया जा रहा है।

उन्होंने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) पर भी निशाना साधा और कहा कि यह पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) की 'बी टीम' की तरह काम करते हुए मुस्लिम वोटों का विभाजन करने का प्रयास कर रही है। उनके अनुसार, इसका अंतिम लाभ भाजपा को मिलता है और समाजवादी पार्टी (सपा) को नुकसान।

केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप

मेहरोत्रा ने केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग जैसी जाँच एजेंसियों का उपयोग विपक्षी दलों को दबाने के लिए किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सत्ता और धनबल के ज़रिये राजनीतिक विरोधियों को कमज़ोर करना लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है।

आगे क्या होगा

एसआईटी का 15 जून को राम जन्मभूमि परिसर का दौरा इस विवाद में एक निर्णायक कदम होगा। ट्रस्ट के सहयोग के आश्वासन के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जाँच दल किन दस्तावेज़ों की माँग करता है और क्या विपक्ष की न्यायिक निगरानी की माँग को कोई समर्थन मिलता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

स्वेच्छा से नहीं। यह या तो वास्तविक पारदर्शिता की कोशिश है या विपक्ष की आवाज़ को एसआईटी के दायरे तक सीमित करने की रणनीति। सपा की न्यायिक निगरानी की माँग तार्किक है, लेकिन उनके अपने व्यापक राजनीतिक आरोपों ने मूल वित्तीय जाँच को पृष्ठभूमि में धकेल दिया। असली परीक्षा यह होगी कि एसआईटी को ऑडिट रिकॉर्ड और बैंक दस्तावेज़ों तक स्वतंत्र पहुँच मिलती है या नहीं।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम जन्मभूमि दान विवाद में एसआईटी क्या जाँच करेगी?
एसआईटी राम जन्मभूमि परिसर में दान के रूप में प्राप्त धन के प्रबंधन और उसके उपयोग की जाँच करेगी। ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के ऑडिट रिकॉर्ड सहित सभी संबंधित दस्तावेज़ जाँच के दायरे में होंगे।
एसआईटी का गठन कितनी जल्दी हुआ और इसमें कितने सदस्य हैं?
उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट की माँग के 12 से 15 घंटे के भीतर तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया। यह दल 15 जून 2025 को अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि परिसर का दौरा करेगा।
सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने क्या माँग की है?
सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने माँग की है कि पूरे मामले की जाँच उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के किसी वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में हो। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि दान के धन का दुरुपयोग कर कुछ लोगों ने संपत्तियाँ खरीदी हैं, हालाँकि ये आरोप अभी सिद्ध नहीं हुए हैं।
राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने खुद जाँच की माँग क्यों की?
ट्रस्ट के दर्शन प्रभारी गोपाल जी राव के अनुसार, ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक की ओर से पहले से ऑडिट चल रहा था, लेकिन कुछ गलतफहमियों के कारण यह मुद्दा सार्वजनिक हो गया। पारदर्शिता सुनिश्चित करने और समाज में फैली गलतफहमियों को दूर करने के लिए ट्रस्ट ने स्वयं सरकार से जाँच की माँग की।
इस विवाद में एआईएमआईएम पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने आरोप लगाया कि एआईएमआईएम भाजपा की 'बी टीम' की तरह काम कर रही है और मुस्लिम वोटों का विभाजन कर समाजवादी पार्टी को नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि जनता इस रणनीति को समझ चुकी है और एआईएमआईएम का कोई भी उम्मीदवार चुनाव में सफल नहीं होगा।
राष्ट्र प्रेस
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