राम मंदिर सीईओ भर्ती पर महंत राजू दास का कड़ा रुख: 'मंदिर व्यावसायिक संस्थान नहीं, सेवाभाव जरूरी'
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने 12 अगस्त 2026 को राम मंदिर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति को लेकर चल रही बहस पर स्पष्ट और तीखा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि जैसे पवित्र स्थल को किसी व्यावसायिक केंद्र की तरह नहीं देखा जाना चाहिए और वहाँ के प्रशासनिक पदों पर ऐसे व्यक्ति को प्राथमिकता मिलनी चाहिए जिसमें भगवान की सेवा का भाव हो। इसके साथ ही उन्होंने झारखंड में छात्र आंदोलन पर विपक्षी नेताओं की चुप्पी को 'सिलेक्टिव सोच' करार देते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर सीधे सवाल दागे।
राम मंदिर सीईओ भर्ती पर महंत का स्पष्ट संदेश
महंत राजू दास ने कहा कि राम जन्मभूमि कोई सामान्य संस्थान नहीं है — यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। उनके अनुसार, 'मंदिर भगवान की सेवा और आस्था का केंद्र होता है, इसलिए वहाँ काम करने वाले व्यक्ति में धार्मिक भावना और सेवा का भाव होना जरूरी है।' उन्होंने यह भी कहा कि सावन के महीने में अयोध्या में भगवान की पूजा-अर्चना जिस श्रद्धा से होती है, वह औपचारिक या कृत्रिम नहीं होती — और यही भावना मंदिर प्रशासन में भी झलकनी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर की व्यवस्था आधुनिक और कुशल तरीके से संचालित हो सकती है, लेकिन उसके मूल में भगवान के प्रति समर्पण और श्रद्धा अनिवार्य है। यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर ट्रस्ट में प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर धार्मिक और राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
झारखंड छात्र आंदोलन पर विपक्ष को घेरा
महंत राजू दास ने झारखंड में परीक्षा में कथित धोखाधड़ी और अनियमितताओं के विरुद्ध छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन का उल्लेख करते हुए विपक्षी नेताओं की चुप्पी पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने पूछा कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव छात्र आंदोलन के दौरान कहाँ थे? उनके अनुसार, विपक्ष अपनी सुविधा के अनुसार मुद्दों पर प्रतिक्रिया देता है।
महंत ने कहा, 'यदि झारखंड के छात्र बिना तोड़फोड़, बिना पुलिसकर्मियों से मारपीट और बिना सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाए अपनी माँग रख रहे हैं, तो उनके समर्थन में भी नेताओं को आगे आना चाहिए।' उन्होंने इसे 'सिलेक्टिव रवैया' बताते हुए कहा कि झारखंड भारत का अभिन्न हिस्सा है और वहाँ के छात्रों के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाना चाहिए।
विपक्ष की 'सिलेक्टिव' राजनीति पर आरोप
महंत राजू दास ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक नेता भारत-विरोधी नारेबाजी, हिंसा या प्रधानमंत्री के विरुद्ध अभद्र टिप्पणियों में संलिप्त लोगों के समर्थन में तो सामने आ जाते हैं, लेकिन शांतिपूर्वक माँग रखने वाले छात्रों के लिए उनकी आवाज नहीं उठती। उन्होंने देश के नेताओं से अपील की कि वे छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को दलगत राजनीति से ऊपर रखकर निष्पक्ष दृष्टि से देखें।
छात्रों के अधिकार और निष्पक्ष जाँच की माँग
महंत राजू दास ने कहा कि यदि किसी परीक्षा में गड़बड़ी या धोखाधड़ी की शिकायत सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष जाँच और दोषियों पर कार्रवाई की माँग करना हर छात्र का अधिकार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीतिक विचारधारा अलग हो सकती है, लेकिन छात्रों की समस्याओं को उससे ऊपर रखा जाना चाहिए। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि विपक्षी दल झारखंड के छात्र आंदोलन पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हैं या नहीं।