13 अगस्त 2026
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राम मंदिर सीईओ भर्ती पर महंत राजू दास का कड़ा रुख: 'मंदिर व्यावसायिक संस्थान नहीं, सेवाभाव जरूरी'

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राम मंदिर सीईओ भर्ती पर महंत राजू दास का कड़ा रुख: 'मंदिर व्यावसायिक संस्थान नहीं, सेवाभाव जरूरी'

सारांश

हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने राम मंदिर सीईओ भर्ती पर दो-टूक कहा — आस्था के केंद्र को कॉर्पोरेट संस्थान नहीं बनाया जा सकता। साथ ही झारखंड के शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन पर राहुल गांधी और अखिलेश यादव की चुप्पी को 'सिलेक्टिव राजनीति' बताकर विपक्ष को कटघरे में खड़ा किया।

मुख्य बातें

महंत राजू दास ने 12 अगस्त को कहा कि राम मंदिर में सीईओ पद पर सेवाभाव रखने वाले व्यक्ति को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
राम जन्मभूमि को करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बताते हुए इसे किसी व्यावसायिक संस्थान की तरह संचालित करने का विरोध किया।
झारखंड में परीक्षा अनियमितताओं के विरुद्ध छात्र आंदोलन पर राहुल गांधी और अखिलेश यादव की चुप्पी पर सीधे सवाल उठाए।
विपक्ष पर 'सिलेक्टिव रवैये' का आरोप — हिंसक तत्वों के समर्थन में आवाज, शांतिपूर्ण छात्रों के लिए मौन।
छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को दलगत राजनीति से ऊपर रखकर निष्पक्ष जाँच की माँग का समर्थन किया।

अयोध्या के हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने 12 अगस्त 2026 को राम मंदिर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति को लेकर चल रही बहस पर स्पष्ट और तीखा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि जैसे पवित्र स्थल को किसी व्यावसायिक केंद्र की तरह नहीं देखा जाना चाहिए और वहाँ के प्रशासनिक पदों पर ऐसे व्यक्ति को प्राथमिकता मिलनी चाहिए जिसमें भगवान की सेवा का भाव हो। इसके साथ ही उन्होंने झारखंड में छात्र आंदोलन पर विपक्षी नेताओं की चुप्पी को 'सिलेक्टिव सोच' करार देते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर सीधे सवाल दागे।

राम मंदिर सीईओ भर्ती पर महंत का स्पष्ट संदेश

महंत राजू दास ने कहा कि राम जन्मभूमि कोई सामान्य संस्थान नहीं है — यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। उनके अनुसार, 'मंदिर भगवान की सेवा और आस्था का केंद्र होता है, इसलिए वहाँ काम करने वाले व्यक्ति में धार्मिक भावना और सेवा का भाव होना जरूरी है।' उन्होंने यह भी कहा कि सावन के महीने में अयोध्या में भगवान की पूजा-अर्चना जिस श्रद्धा से होती है, वह औपचारिक या कृत्रिम नहीं होती — और यही भावना मंदिर प्रशासन में भी झलकनी चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर की व्यवस्था आधुनिक और कुशल तरीके से संचालित हो सकती है, लेकिन उसके मूल में भगवान के प्रति समर्पण और श्रद्धा अनिवार्य है। यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर ट्रस्ट में प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर धार्मिक और राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।

झारखंड छात्र आंदोलन पर विपक्ष को घेरा

महंत राजू दास ने झारखंड में परीक्षा में कथित धोखाधड़ी और अनियमितताओं के विरुद्ध छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन का उल्लेख करते हुए विपक्षी नेताओं की चुप्पी पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने पूछा कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव छात्र आंदोलन के दौरान कहाँ थे? उनके अनुसार, विपक्ष अपनी सुविधा के अनुसार मुद्दों पर प्रतिक्रिया देता है।

महंत ने कहा, 'यदि झारखंड के छात्र बिना तोड़फोड़, बिना पुलिसकर्मियों से मारपीट और बिना सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाए अपनी माँग रख रहे हैं, तो उनके समर्थन में भी नेताओं को आगे आना चाहिए।' उन्होंने इसे 'सिलेक्टिव रवैया' बताते हुए कहा कि झारखंड भारत का अभिन्न हिस्सा है और वहाँ के छात्रों के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाना चाहिए।

विपक्ष की 'सिलेक्टिव' राजनीति पर आरोप

महंत राजू दास ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक नेता भारत-विरोधी नारेबाजी, हिंसा या प्रधानमंत्री के विरुद्ध अभद्र टिप्पणियों में संलिप्त लोगों के समर्थन में तो सामने आ जाते हैं, लेकिन शांतिपूर्वक माँग रखने वाले छात्रों के लिए उनकी आवाज नहीं उठती। उन्होंने देश के नेताओं से अपील की कि वे छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को दलगत राजनीति से ऊपर रखकर निष्पक्ष दृष्टि से देखें।

छात्रों के अधिकार और निष्पक्ष जाँच की माँग

महंत राजू दास ने कहा कि यदि किसी परीक्षा में गड़बड़ी या धोखाधड़ी की शिकायत सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष जाँच और दोषियों पर कार्रवाई की माँग करना हर छात्र का अधिकार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीतिक विचारधारा अलग हो सकती है, लेकिन छात्रों की समस्याओं को उससे ऊपर रखा जाना चाहिए। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि विपक्षी दल झारखंड के छात्र आंदोलन पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अरबों रुपये के दान और लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही का प्रबंधन करते हैं, उन्हें कुशल प्रशासनिक ढाँचे की जरूरत है — लेकिन उस ढाँचे में किस कसौटी को प्राथमिकता मिले, यह सवाल अनुत्तरित है। दूसरी ओर, झारखंड छात्र आंदोलन पर विपक्ष की चुप्पी को लेकर उनका आरोप राजनीतिक रूप से चयनात्मक है, क्योंकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं की प्रतिक्रिया का आकलन भी उतनी ही पारदर्शिता से होना चाहिए। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस द्वंद्व को अनदेखा करती है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महंत राजू दास ने राम मंदिर सीईओ भर्ती पर क्या कहा?
महंत राजू दास ने कहा कि राम मंदिर कोई व्यावसायिक केंद्र नहीं है और वहाँ के प्रशासनिक पदों पर ऐसे व्यक्ति को प्राथमिकता मिलनी चाहिए जिसमें भगवान की सेवा का भाव हो। उनके अनुसार, मंदिर आधुनिक तरीके से संचालित हो सकता है, लेकिन उसके मूल में श्रद्धा और समर्पण अनिवार्य है।
झारखंड छात्र आंदोलन में छात्र क्या माँग कर रहे हैं?
झारखंड के छात्र परीक्षा में कथित धोखाधड़ी और अनियमितताओं में शामिल कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। महंत राजू दास के अनुसार, यह आंदोलन शांतिपूर्ण है और छात्रों का यह अधिकार है कि निष्पक्ष जाँच हो और दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
महंत राजू दास ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाए?
महंत राजू दास ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर 'सिलेक्टिव राजनीति' का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ये नेता कुछ खास मुद्दों पर तो सामने आते हैं, लेकिन झारखंड के शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन पर उनकी आवाज नहीं उठती।
हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास कौन हैं?
महंत राजू दास अयोध्या स्थित हनुमानगढ़ी मंदिर के प्रमुख महंत हैं। वे राम जन्मभूमि और अयोध्या से जुड़े धार्मिक व राजनीतिक मुद्दों पर अक्सर अपनी राय सार्वजनिक रूप से व्यक्त करते हैं और हिंदू धार्मिक हलकों में एक प्रमुख आवाज माने जाते हैं।
क्या राम मंदिर में सीईओ की नियुक्ति अनिवार्य है?
राम मंदिर ट्रस्ट में प्रशासनिक पदों की नियुक्ति को लेकर बहस जारी है। महंत राजू दास का कहना है कि ऐसे पदों पर धार्मिक भावना और सेवाभाव वाले व्यक्ति को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए, क्योंकि राम जन्मभूमि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।
राष्ट्र प्रेस
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