राम मंदिर दान विवाद: ट्रस्ट ने गिरफ्तारी के बाद कोई नया आउटसोर्स कर्मचारी नहीं रखा
सारांश
मुख्य बातें
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर दान प्रकरण में आठ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद से कोई नया आउटसोर्स कर्मचारी नियुक्त नहीं किया है। सूत्रों ने 9 जुलाई को यह जानकारी दी। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब जाँच एजेंसियाँ दान पेटी गिनती प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं की गहन जाँच कर रही हैं।
आउटसोर्सिंग का पूरा विवरण
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट ने पिछले वर्ष महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की असाधारण भीड़ को देखते हुए एक आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से कर्मचारियों की भर्ती की थी। इन कर्मचारियों को मुख्यतः हाउसकीपिंग कार्य के लिए रखा गया था। सूत्रों ने स्पष्ट किया कि इस भर्ती के लिए किसी विशेष योग्यता की आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि इन कर्मचारियों को नकदी गिनने का कोई दायित्व नहीं सौंपा गया था।
आउटसोर्स कर्मचारियों की वास्तविक भूमिका
बैंक सूत्रों के अनुसार, ये आउटसोर्स कर्मचारी कथित तौर पर केवल भक्तों द्वारा दान पेटियों में डाले गए मुड़े हुए नोटों को सीधा करने और उन्हें उचित बंडलों में व्यवस्थित करने तक ही सीमित थे। नकदी की वास्तविक गिनती पूरी तरह SBI के नियमित कर्मचारियों द्वारा की जाती थी। इस प्रक्रिया में ₹500, ₹200 और ₹100 के मिश्रित मूल्यवर्ग के नोटों को स्वचालित रूप से अलग करने और नकली नोटों का पता लगाने में सक्षम अत्याधुनिक मुद्रा गिनती मशीनों का उपयोग किया गया था।
जाँच के दायरे में बैंक अधिकारी
राम मंदिर ट्रस्ट का प्राथमिक बैंक खाता SBI की एक शाखा में है, और जाँचकर्ता इस मामले में बैंक अधिकारियों की संभावित भूमिका की पड़ताल कर रहे हैं। अयोध्या पुलिस द्वारा शाखा प्रबंधक से पूछताछ और उनका बयान दर्ज किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके अतिरिक्त, SBI के एक पूर्व प्रबंधक भी अयोध्या पुलिस की निगरानी में हैं और उनसे जल्द ही पूछताछ हो सकती है।
गिनती प्रभारी और पूर्व न्यासी की भूमिका
सूत्रों के अनुसार, दान पेटी गिनती प्रक्रिया के रिकॉर्ड रखने वाले गिनती प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव — जो स्वयं SBI कर्मचारी नहीं थे — को पूर्व न्यासी अनिल मिश्रा के साथ निगरानी में हुई चूक के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। उल्लेखनीय है कि मंदिर ट्रस्ट के पूर्व न्यासी अनिल मिश्रा का बयान इस सप्ताह के अंत तक दर्ज किए जाने की संभावना है।
आगे क्या होगा
जाँच के दायरे में अब मंदिर की दान गिनती प्रक्रिया से जुड़े बैंक कर्मचारी, पूर्व प्रबंधक और ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारी सभी आ चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं, जो देश के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में से एक की वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।