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रांची विश्वविद्यालय नामकरण विवाद: आदिवासी छात्रों ने टायर जलाए, सड़क जाम; डेढ़ साल बाद भी कैबिनेट फैसला लागू नहीं

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रांची विश्वविद्यालय नामकरण विवाद: आदिवासी छात्रों ने टायर जलाए, सड़क जाम; डेढ़ साल बाद भी कैबिनेट फैसला लागू नहीं

सारांश

रांची के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय का नाम बदलने का फैसला कैबिनेट में डेढ़ साल से धूल खा रहा है — और अब आदिवासी छात्र सड़क पर हैं। गेट पर लिखा नाम रातोरात मिटाया गया, टायर जले, सड़क जाम हुई। असली सवाल है: हेमंत सोरेन सरकार अपना ही फैसला क्यों नहीं लागू कर रही?

मुख्य बातें

श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) , रांची का नाम शहीद वीर बुधु भगत विश्वविद्यालय करने का कैबिनेट फैसला 8 मई 2025 को लिया गया था।
फैसले को डेढ़ साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद विश्वविद्यालय पुराने नाम से संचालित है।
छात्र अधिकार मोर्चा , आदिवासी छात्र संघ और सरना समिति ने गुरुवार-शुक्रवार को लगातार दो दिन विरोध प्रदर्शन किया।
गेट पर लाल रंग से लिखा 'शहीद वीर बुधु भगत विश्वविद्यालय' रातोरात मिटाया गया, जिससे आक्रोश और बढ़ा।
पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने इसे झारखंड के शहीदों के सम्मान का मामला बताते हुए तत्काल कार्रवाई की माँग की।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

रांची के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) का नाम बदलकर शहीद वीर बुधु भगत विश्वविद्यालय करने की माँग को लेकर आदिवासी छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों ने शुक्रवार, 7 नवंबर 2026 को लगातार दूसरे दिन जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय के मुख्य गेट के सामने टायर जलाए और बांस-बल्लियों से सड़क को जाम कर दिया, जिससे आसपास के इलाकों में यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। झारखंड सरकार की कैबिनेट ने करीब डेढ़ साल पहले — 8 मई 2025 को — यह नामकरण का निर्णय लिया था, जो अब तक लागू नहीं हो सका है।

मुख्य घटनाक्रम

विवाद की शुरुआत गुरुवार को हुई, जब झारखंड प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के नेतृत्व में छात्र अधिकार मोर्चा, आदिवासी छात्र संघ और सरना समिति के सदस्य विश्वविद्यालय पहुँचे। उन्होंने मुख्य गेट पर लाल रंग से 'शहीद वीर बुधु भगत विश्वविद्यालय' लिखा और नारेबाजी की।

गुरुवार की देर रात किसी अज्ञात व्यक्ति ने गेट पर लिखा गया यह नया नाम मिटा दिया। शुक्रवार को इसकी जानकारी मिलते ही संगठनों में गहरी नाराजगी फैल गई और बड़ी संख्या में छात्र फिर सड़क पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाकर जाम लगाया और मुख्य गेट के बाहर बाँस-बल्लियों से घेराबंदी की।

वीर बुधु भगत कौन थे

प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वीर बुधु भगत झारखंड के महान स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने 1831-32 के ऐतिहासिक कोल विद्रोह का नेतृत्व किया था। आदिवासी समाज उन्हें अपने गौरव और संघर्ष का प्रतीक मानता है।

संगठनों का कहना है कि गेट पर लिखे नाम को रातोरात मिटाना शहीद का घोर अपमान है। उन्होंने दोषियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई करने और विश्वविद्यालय परिसर में वीर बुधु भगत की प्रतिमा स्थापित करने की माँग भी रखी।

सरकार की स्थिति और प्रशासनिक देरी

बंधु तिर्की ने कहा कि कैबिनेट के फैसले को लागू न करना महज प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि यह झारखंड के शहीदों के सम्मान से जुड़ा गंभीर मामला है। उन्होंने कहा, 'सरकार को इस पर जल्द कार्रवाई करनी चाहिए।'

गौरतलब है कि यह विश्वविद्यालय पहले रांची कॉलेज के नाम से जाना जाता था। वर्ष 2017 में तत्कालीन रघुवर दास सरकार ने इसे अपग्रेड कर विश्वविद्यालय का दर्जा दिया और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर इसका नामकरण किया। इसके बाद 8 मई 2025 को हेमंत सोरेन सरकार की कैबिनेट ने इसे शहीद वीर बुधु भगत विश्वविद्यालय करने का प्रस्ताव पारित किया — लेकिन डेढ़ साल बाद भी विश्वविद्यालय पुराने नाम से ही संचालित हो रहा है।

आम जनता पर असर

विरोध प्रदर्शन और सड़क जाम के कारण विश्वविद्यालय के निकटवर्ती इलाकों में आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ। छात्रों और आम नागरिकों को यातायात अवरोध का सामना करना पड़ा।

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस पूरे विवाद पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे स्थिति और अधिक अनिश्चित बनी हुई है।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में आदिवासी अस्मिता और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दे राजनीतिक रूप से संवेदनशील बने हुए हैं। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा। अब सभी की निगाहें हेमंत सोरेन सरकार पर टिकी हैं कि वह अपने ही कैबिनेट के निर्णय को कब और कैसे अमल में लाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी डेढ़ साल में अधिसूचना जारी नहीं हो सकी — यह प्रशासनिक शिथिलता नहीं, राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है। दूसरी ओर, भाजपा के दौर में रखे गए नाम को हटाने में देरी यह भी संकेत देती है कि नामकरण की राजनीति में हर सरकार सहूलियत के हिसाब से चलती है। आदिवासी संगठनों का सड़क पर उतरना इस बात का प्रमाण है कि वादों और क्रियान्वयन के बीच की खाई अब सहन की सीमा पार कर चुकी है।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीएसपीएमयू का नाम बदलकर शहीद वीर बुधु भगत विश्वविद्यालय करने का फैसला कब हुआ था?
झारखंड सरकार की कैबिनेट ने 8 मई 2025 को यह फैसला लिया था। हालाँकि, डेढ़ साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद यह निर्णय अब तक लागू नहीं हुआ है और विश्वविद्यालय पुराने नाम से ही संचालित हो रहा है।
वीर बुधु भगत कौन थे और उनका झारखंड से क्या संबंध है?
वीर बुधु भगत झारखंड के प्रमुख आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने 1831-32 के ऐतिहासिक कोल विद्रोह का नेतृत्व किया था। आदिवासी समाज उन्हें अपने गौरव, संघर्ष और पहचान का प्रतीक मानता है।
रांची में आदिवासी छात्र क्यों सड़क पर उतरे?
आदिवासी छात्र संगठन कैबिनेट फैसले को लागू करने में देरी से नाराज थे। गुरुवार को गेट पर लाल रंग से लिखा गया 'शहीद वीर बुधु भगत विश्वविद्यालय' नाम रातोरात मिटा दिए जाने के बाद शुक्रवार को आक्रोश और बढ़ा, जिसके बाद छात्रों ने टायर जलाए और सड़क जाम की।
इस विश्वविद्यालय का पुराना इतिहास क्या है?
यह संस्था पहले रांची कॉलेज के नाम से जानी जाती थी। वर्ष 2017 में तत्कालीन रघुवर दास सरकार ने इसे अपग्रेड कर विश्वविद्यालय का दर्जा दिया और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर नामकरण किया। इसके बाद हेमंत सोरेन सरकार ने 2025 में नाम बदलने का प्रस्ताव पारित किया।
आगे क्या माँगें हैं और प्रशासन का क्या रुख है?
संगठनों ने माँग की है कि गेट पर नाम मिटाने वाले दोषियों की पहचान कर कार्रवाई हो, कैबिनेट फैसला तत्काल लागू किया जाए और परिसर में वीर बुधु भगत की प्रतिमा स्थापित की जाए। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस पूरे विवाद पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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