रांची विश्वविद्यालय नामकरण विवाद: आदिवासी छात्रों ने टायर जलाए, सड़क जाम; डेढ़ साल बाद भी कैबिनेट फैसला लागू नहीं
सारांश
मुख्य बातें
रांची के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) का नाम बदलकर शहीद वीर बुधु भगत विश्वविद्यालय करने की माँग को लेकर आदिवासी छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों ने शुक्रवार, 7 नवंबर 2026 को लगातार दूसरे दिन जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय के मुख्य गेट के सामने टायर जलाए और बांस-बल्लियों से सड़क को जाम कर दिया, जिससे आसपास के इलाकों में यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। झारखंड सरकार की कैबिनेट ने करीब डेढ़ साल पहले — 8 मई 2025 को — यह नामकरण का निर्णय लिया था, जो अब तक लागू नहीं हो सका है।
मुख्य घटनाक्रम
विवाद की शुरुआत गुरुवार को हुई, जब झारखंड प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के नेतृत्व में छात्र अधिकार मोर्चा, आदिवासी छात्र संघ और सरना समिति के सदस्य विश्वविद्यालय पहुँचे। उन्होंने मुख्य गेट पर लाल रंग से 'शहीद वीर बुधु भगत विश्वविद्यालय' लिखा और नारेबाजी की।
गुरुवार की देर रात किसी अज्ञात व्यक्ति ने गेट पर लिखा गया यह नया नाम मिटा दिया। शुक्रवार को इसकी जानकारी मिलते ही संगठनों में गहरी नाराजगी फैल गई और बड़ी संख्या में छात्र फिर सड़क पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाकर जाम लगाया और मुख्य गेट के बाहर बाँस-बल्लियों से घेराबंदी की।
वीर बुधु भगत कौन थे
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वीर बुधु भगत झारखंड के महान स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने 1831-32 के ऐतिहासिक कोल विद्रोह का नेतृत्व किया था। आदिवासी समाज उन्हें अपने गौरव और संघर्ष का प्रतीक मानता है।
संगठनों का कहना है कि गेट पर लिखे नाम को रातोरात मिटाना शहीद का घोर अपमान है। उन्होंने दोषियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई करने और विश्वविद्यालय परिसर में वीर बुधु भगत की प्रतिमा स्थापित करने की माँग भी रखी।
सरकार की स्थिति और प्रशासनिक देरी
बंधु तिर्की ने कहा कि कैबिनेट के फैसले को लागू न करना महज प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि यह झारखंड के शहीदों के सम्मान से जुड़ा गंभीर मामला है। उन्होंने कहा, 'सरकार को इस पर जल्द कार्रवाई करनी चाहिए।'
गौरतलब है कि यह विश्वविद्यालय पहले रांची कॉलेज के नाम से जाना जाता था। वर्ष 2017 में तत्कालीन रघुवर दास सरकार ने इसे अपग्रेड कर विश्वविद्यालय का दर्जा दिया और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर इसका नामकरण किया। इसके बाद 8 मई 2025 को हेमंत सोरेन सरकार की कैबिनेट ने इसे शहीद वीर बुधु भगत विश्वविद्यालय करने का प्रस्ताव पारित किया — लेकिन डेढ़ साल बाद भी विश्वविद्यालय पुराने नाम से ही संचालित हो रहा है।
आम जनता पर असर
विरोध प्रदर्शन और सड़क जाम के कारण विश्वविद्यालय के निकटवर्ती इलाकों में आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ। छात्रों और आम नागरिकों को यातायात अवरोध का सामना करना पड़ा।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस पूरे विवाद पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे स्थिति और अधिक अनिश्चित बनी हुई है।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में आदिवासी अस्मिता और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दे राजनीतिक रूप से संवेदनशील बने हुए हैं। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा। अब सभी की निगाहें हेमंत सोरेन सरकार पर टिकी हैं कि वह अपने ही कैबिनेट के निर्णय को कब और कैसे अमल में लाती है।