21 जुलाई 2026
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डीएसपीएमयू रांची में सीट कटौती व आरक्षण विवाद: छात्रों-पुलिस झड़प, लाठीचार्ज के बाद परिसर में तनाव

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डीएसपीएमयू रांची में सीट कटौती व आरक्षण विवाद: छात्रों-पुलिस झड़प, लाठीचार्ज के बाद परिसर में तनाव

सारांश

रांची के डीएसपीएमयू में सीट कटौती और आरक्षण उल्लंघन के आरोपों पर भड़के छात्रों ने 20 जुलाई को कुलपति का पुतला फूंका और गाड़ी पर स्याही फेंकी। पुलिस लाठीचार्ज के बाद परिसर में तनाव है। छात्र संगठनों ने माँगें न मानने पर आंदोलन तेज़ करने की चेतावनी दी है।

मुख्य बातें

डीएसपीएमयू, रांची में 20 जुलाई को छात्रों और पुलिस के बीच झड़प; पुलिस ने लाठीचार्ज कर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया।
छात्रों का आरोप — ट्रेडिशनल और वोकेशनल स्नातक पाठ्यक्रमों में सीटों में भारी कटौती की गई है।
नामांकन सूची में राज्य सरकार की आरक्षण नीति का पालन न होने का आरोप; संशोधित सूची की माँग।
छात्रों ने कुलपति का पुतला फूंका और कुलपति की गाड़ी पर स्याही फेंकी ।
तत्काल किसी के गंभीर रूप से घायल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं; परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात।
छात्र नेताओं ने लिखित निर्णय न मिलने पर आंदोलन तेज़ करने की चेतावनी दी।

रांची स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) में 20 जुलाई को स्नातक पाठ्यक्रमों में सीट कटौती और आरक्षण नीति के कथित उल्लंघन को लेकर छात्र आंदोलन उग्र हो गया, जब प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिस के बीच सीधी झड़प हुई। पुलिस ने बल प्रयोग कर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया, जिसके बाद परिसर में अफरातफरी का माहौल बन गया और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

मुख्य घटनाक्रम

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने प्रशासनिक भवन के बाहर कुलपति का पुतला फूंका। कुछ छात्रों ने कुलपति की गाड़ी पर स्याही भी फेंकी। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। हालांकि, तत्काल किसी के गंभीर रूप से घायल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

गौरतलब है कि छात्र संगठन पिछले कई सप्ताहों से विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपते रहे हैं, लेकिन उनके अनुसार कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया — जिससे आक्रोश चरम पर पहुँचा।

छात्रों की आपत्तियाँ

प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने ट्रेडिशनल और वोकेशनल स्नातक पाठ्यक्रमों में सीटों की संख्या में भारी कमी की है। उनका कहना है कि इससे बीसीए, बीबीए, बीकॉम समेत अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में आर्थिक रूप से कमज़ोर और मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्र दाखिले से वंचित हो सकते हैं।

इसके अलावा, छात्रों ने आरोप लगाया कि हाल में जारी नामांकन सूची में राज्य सरकार की आरक्षण नीति का सही ढंग से पालन नहीं किया गया। उन्होंने माँग की है कि नामांकन प्रक्रिया की समीक्षा कर आरक्षण नियमों के अनुरूप संशोधित सूची जारी की जाए।

छात्र संगठनों की माँगें

छात्र संगठनों ने कई माँगें रखी हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

ट्रेडिशनल और वोकेशनल पाठ्यक्रमों में सीटें पूर्ववत करना; जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग सहित विभिन्न विभागों में स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति; एससी-एसटी छात्रों के लिए फीस में रियायत; छात्रवृत्ति की समयबद्ध व्यवस्था; रोस्टर और बैकलॉग पदों पर भर्ती; तथा पीएचडी नियमावली लागू करना।

विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से घटना के संबंध में तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। डीएसपीएमयू झारखंड के प्रमुख सरकारी विश्वविद्यालयों में शामिल है और यहाँ की स्थिति राज्य के उच्च शिक्षा परिदृश्य पर सीधा असर डालती है।

आगे क्या

छात्र नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी माँगों पर शीघ्र लिखित निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज़ किया जाएगा। परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड के कई सरकारी विश्वविद्यालयों में नामांकन प्रक्रिया चल रही है और आरक्षण नीति को लेकर राज्यभर में संवेदनशीलता बढ़ी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ज़मीनी क्रियान्वयन में बार-बार सवाल उठते हैं। सीट कटौती का सबसे बड़ा असर पहली पीढ़ी के उन छात्रों पर पड़ता है जिनके पास निजी संस्थानों की फीस चुकाने की क्षमता नहीं है। प्रशासन की चुप्पी — जो कई सप्ताहों के ज्ञापनों के बावजूद बनी रही — यह दर्शाती है कि संस्थागत जवाबदेही का तंत्र कमज़ोर है। जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन पारदर्शी और समयबद्ध संवाद स्थापित नहीं करता, इस तरह की झड़पें दोहराई जाती रहेंगी।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीएसपीएमयू में छात्र आंदोलन किस कारण हुआ?
छात्रों ने स्नातक पाठ्यक्रमों में सीट कटौती और नामांकन सूची में आरक्षण नीति के कथित उल्लंघन के विरोध में आंदोलन किया। छात्र संगठनों का कहना है कि वे कई सप्ताहों से ज्ञापन दे रहे थे लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
20 जुलाई को डीएसपीएमयू परिसर में क्या हुआ?
छात्रों ने प्रशासनिक भवन के बाहर कुलपति का पुतला फूंका और कुलपति की गाड़ी पर स्याही फेंकी। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया; तत्काल किसी के गंभीर रूप से घायल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
छात्र संगठनों की प्रमुख माँगें क्या हैं?
छात्र संगठन ट्रेडिशनल और वोकेशनल पाठ्यक्रमों में सीटें पूर्ववत करने, आरक्षण नियमों के अनुरूप संशोधित नामांकन सूची जारी करने, स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति, एससी-एसटी छात्रों को फीस रियायत, समयबद्ध छात्रवृत्ति और पीएचडी नियमावली लागू करने की माँग कर रहे हैं।
डीएसपीएमयू में सीट कटौती से किन छात्रों पर सबसे ज़्यादा असर पड़ेगा?
छात्रों के अनुसार सीट कटौती से आर्थिक रूप से कमज़ोर और मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्र सबसे अधिक प्रभावित होंगे, जो बीसीए, बीबीए, बीकॉम जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में दाखिला लेना चाहते हैं और निजी संस्थानों की महँगी फीस वहन करने में असमर्थ हैं।
आगे आंदोलन का क्या रुख रहेगा?
छात्र नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी माँगों पर शीघ्र लिखित निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज़ किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है और परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है।
राष्ट्र प्रेस
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